खेतड़ी के राजा अमरसिंह ने दी थी बबाई के महाजन को ‘पंच’ की पदवी, आज भी ‘पंच परिवार’ के नाम से प्रसिद्ध
खेतड़ी के राजा अमरसिंह ने दी थी बबाई के महाजन को ‘पंच’ की पदवी, आज भी ‘पंच परिवार’ के नाम से प्रसिद्ध
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मुकेश कुमार सैनी
बबाई : झुंझुनूं जिले के ग्राम बबाई में महाजनों का एक परिवार आज भी ‘पंच परिवार’ के नाम से विख्यात है। गर्ग गोत्र से संबंधित इस परिवार को गांववासी पिछले चार पीढ़ियों से ‘पंच’ के नाम से पुकारते आ रहे हैं। यह परंपरा ऐतिहासिक पृष्ठभूमि से जुड़ी हुई है।
बताया जाता है कि खेतड़ी नरेश राजा अमरसिंह के समय प्रशासनिक सुधारों के तहत न्याय व्यवस्था को मजबूत बनाने के प्रयास किए गए। इसी दौरान 25 जुलाई 1922 को जी.ए. करोल की खेतड़ी में सुपरिटेंडेंट पद पर नियुक्ति हुई और 1 अगस्त 1923 को उन्होंने शासन संचालन की जिम्मेदारी संभाली। प्रशासन में सुधार करते हुए उन्होंने स्थानीय स्तर पर त्वरित और सुलभ न्याय व्यवस्था सुनिश्चित करने के लिए योग्य व्यक्तियों को जिम्मेदारियां सौंपी।
इसी क्रम में बबाई के शिक्षित, योग्य एवं युवा महाजन मूलचंद को न्यायिक कार्यों में सहयोग हेतु ‘पंच’ की पदवी दी गई। मूलचंद ने अपने कर्तव्यों का निष्ठापूर्वक निर्वहन करते हुए ग्रामीणों को न्याय दिलाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई। उनकी ईमानदारी और कार्यशैली के कारण उन्हें विशेष सम्मान मिला और तभी से उनके वंशज ‘पंच परिवार’ के नाम से प्रसिद्ध हो गए।
परिवार की सामाजिक व प्रशासनिक क्षेत्र में भी उल्लेखनीय पहचान रही है। ब्रह्मदत्त पंच ने वर्ष 1985 में ग्राम पंचायत चुनाव में सरपंच पद के लिए चुनाव लड़ा, हालांकि वे विजयी नहीं हो सके। इस परिवार के मदनलाल गुप्ता एवं उनके पुत्र नरेंद्र गुप्ता दोनों ही जिला कलेक्टर जैसे उच्च पदों पर आसीन रहे हैं। वहीं आर.जी. गुप्ता विद्युत विभाग में अधीक्षण अभियंता रहे, कैलाश चंद्र गुप्ता जयपुर में वरिष्ठ सर्जन के रूप में सेवाएं दे रहे हैं।
परिवार के अन्य सदस्य भी विभिन्न उच्च पदों पर कार्यरत हैं। मदनलाल गुप्ता के पुत्र महेंद्र गुप्ता एवं उनकी पत्नी अमेरिका में कैंसर विशेषज्ञ हैं, जबकि मनोज गुप्ता वर्तमान में बीकानेर के सरकारी अस्पताल में कैंसर विशेषज्ञ के रूप में कार्यरत हैं। परिवार के कई युवा चार्टर्ड अकाउंटेंट सहित अन्य महत्वपूर्ण क्षेत्रों में सेवाएं दे रहे हैं।
वर्तमान में मूलचंद का परिवार संबलपुर (उड़ीसा) में व्यापारिक गतिविधियों में संलग्न है। बबाई आए उनके पौत्र उमेश कुमार ने बताया कि उनके दादाजी मूलचंद को खेतड़ी दरबार में विशेष सम्मान दिया जाता था और बुलावे पर उन्हें घोड़े की सवारी की सुविधा भी दी जाती थी। उन्होंने यह भी कहा कि यदि सरकार उनके दादाजी पंच मूलचंद की प्रतिमा स्थापित करने के लिए स्थान उपलब्ध कराए, तो वे इसे स्थापित कराने के लिए तैयार हैं। यह ‘पंच परिवार’ आज भी अपनी ऐतिहासिक विरासत, सामाजिक योगदान और प्रतिष्ठा के लिए क्षेत्र में सम्मानित स्थान रखता है।
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