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सरदारशहर में लोक अदालत से नाराज दिखई दिए लोग:बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, कहा- शिविर में राहत देने के बजाए लोगों को किया जा रहा परेशान


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सरदारशहर में लोक अदालत से नाराज दिखई दिए लोग:बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, कहा- शिविर में राहत देने के बजाए लोगों को किया जा रहा परेशान

सरदारशहर में लोक अदालत से नाराज दिखई दिए लोग:बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए, कहा- शिविर में राहत देने के बजाए लोगों को किया जा रहा परेशान

सरदारशहर : सरदारशहर में शनिवार को एडीजे कोर्ट परिसर में राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया गया। इसमें बिजली विभाग के लंबित मामलों के निपटारे के लिए एक विशेष शिविर लगाया गया, जिसका लक्ष्य मार्च 2025 से पहले के कटे हुए कनेक्शनों को जोड़ना और ब्याज (LPS) में छूट देकर लोगों को राहत देना था। हालांकि, शिविर के दौरान अव्यवस्था और नियमों को लेकर लोगों व वकीलों ने कड़ी नाराजगी व्यक्त की।

शिविर में सरदारशहर ग्रामीण एईएन राजेश कुमार मीणा, भानीपुरा एईएन लोकेश कुमार मीणा और भादासर एईएन भोजराज प्रजापत अपनी टीमों के साथ मौजूद रहे। उन्होंने लोगों की शिकायतें सुनीं। लगभग 80 लोगों के मामलों का निस्तारण कर उन्हें राहत प्रदान की गई।

मालकसर निवासी शिशपाल ने बताया- उनके घर का एक महीने का बिजली बिल 24 हजार रुपए आया था। वे समाधान की उम्मीद में लोक अदालत पहुंचे, लेकिन विभाग की ओर से कोई संतोषजनक जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने विरोध दर्ज कराया।

खेजड़ा गांव के ओम प्रकाश ने आरोप लगाया कि उन पर 26 हजार रुपए की वीसीआर (VCR) भरी गई थी। वे राहत की उम्मीद में अदालत पहुंचे, लेकिन उन्हें कोई सहायता नहीं मिली। उन्होंने कहा कि लोक अदालत के नाम पर आमजन को केवल परेशान किया जा रहा है।

वरिष्ठ वकील अमरचंद सिद्ध, ओमप्रकाश बेनीवाल और केसराराम पांडर ने बिजली विभाग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाए। एडवोकेट पांडर ने कहा- कमजोर और गरीब लोगों के कनेक्शन लंबे समय से कटे हुए हैं। नियमानुसार, राष्ट्रीय लोक अदालत में मूल बकाया राशि में भी 50 प्रतिशत तक की छूट मिलनी चाहिए थी, लेकिन उपभोक्ताओं को कोई खास राहत नहीं दी गई।

उन्होंने आरोप लगाया कि यह शिविर किसानों और गरीबों को राहत देने के बजाय उन्हें परेशान करने का जरिया बन गया है। इस संबंध में बिजली विभाग के अधिकारियों की पूरी दलील उपलब्ध नहीं हो पाई।

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