[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

चूरू में मुआवजे के बिना टावर लगाने पर विवाद:किसान के खेत में पहुंची तहसीलदार; मोबाइल छीना, वीडियो शेयर


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
चूरूटॉप न्यूज़रतनगढ़राजस्थानराज्य

चूरू में मुआवजे के बिना टावर लगाने पर विवाद:किसान के खेत में पहुंची तहसीलदार; मोबाइल छीना, वीडियो शेयर

चूरू में मुआवजे के बिना टावर लगाने पर विवाद:किसान के खेत में पहुंची तहसीलदार; मोबाइल छीना, वीडियो शेयर

रतनगढ़ : चूरू जिले के रतनगढ़ में गौरीसर से दाउदसर जाने वाली सड़क पर स्थित एक खेत में मुआवजे को लेकर विवाद सामने आया है। रतनगढ़ तहसीलदार पूजा पारीक निजी कंपनी के कर्मचारियों और पुलिस बल के साथ किसान के खेत में पहुंचीं। इस दौरान किसान ने घटना का वीडियो बनाना शुरू कर दिया, जिसके बाद तहसीलदार के आदेश पर पुलिस ने किसान का मोबाइल छीन लिया। यह वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर हो रहा है।

जानकारी के अनुसार एक निजी कंपनी द्वारा 765 केवी की बिजली लाइन बिछाई जा रही है। किसानों का आरोप है कि कंपनी ने तारों के नीचे आने वाले 67 मीटर कॉरिडोर में मौजूद पेड़ों, मकानों, कुंडों और ढाणियों के मुआवजे का भुगतान किए बिना ही खेतों में टावर बना दिए हैं। किसान मांग कर रहे हैं कि उन्हें तय मुआवजा राशि का भुगतान करने के बाद ही तार खींचने की अनुमति दी जाए।

घटना के समय तहसीलदार पूजा पारीक जबरन तार खिंचवाने पर अड़ी हुई थीं। जब किसान ने इस बर्ताव और कार्रवाई को अपने मोबाइल में रिकॉर्ड करना चाहा, तो तहसीलदार नाराज हो गईं और उन्होंने पुलिसकर्मी को मोबाइल छीनने का आदेश दिया। वायरल वीडियो में यह घटना साफ देखी जा सकती है।

किसान नेता कामरेड भादर भाम्भू ने इस घटना को किसानों के साथ अन्याय बताया। उन्होंने आरोप लगाया कि प्रशासन निजी कंपनी के साथ मिलकर किसानों को डरा रहा है। किसान सभा इस कार्रवाई का विरोध करती है और स्पष्ट किया है कि मुआवजा देने के बाद ही तार खींचने दिए जाएंगे। उन्होंने संघर्ष के लिए तैयार रहने की बात कही।

किसान सभा के जिला उपाध्यक्ष मदन जाखड़ ने बताया कि वे पिछले दो-तीन महीनों से इस मामले में संघर्ष कर रहे हैं। उन्होंने जानकारी दी कि कंपनी, रतनगढ़ एसडीएम और किसान सभा के बीच एक लिखित समझौता हुआ था, जिसमें मुआवजा राशि का भुगतान करने के बाद ही तार खींचने पर सहमति बनी थी। इसके बावजूद प्रशासन द्वारा किसानों पर जबरन तार खिंचवाने का दबाव बनाया जा रहा है।

Related Articles