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सीकर के सर्राफा कारोबारी की जमानत खारिज:कोटड़ी शक्ति ट्रस्ट में 2.25 करोड़ रुपए की हेराफेरी का आरोप, कोर्ट ने कहा- गंभीर सबूत मौजूद


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सीकर के सर्राफा कारोबारी की जमानत खारिज:कोटड़ी शक्ति ट्रस्ट में 2.25 करोड़ रुपए की हेराफेरी का आरोप, कोर्ट ने कहा- गंभीर सबूत मौजूद

सीकर के सर्राफा कारोबारी की जमानत खारिज:कोटड़ी शक्ति ट्रस्ट में 2.25 करोड़ रुपए की हेराफेरी का आरोप, कोर्ट ने कहा- गंभीर सबूत मौजूद

सीकर : सीकर जिले के कोटड़ी गांव स्थित शक्ति मंदिर के ट्रस्ट में गबन मामले में आरोपी की जमानत याचिका कोर्ट ने खारिज कर दी। डिस्ट्रिक्ट कोर्ट सीकर के अपर सेशन जज-1 ने सावित्री जन कल्याण ट्रस्ट कोटड़ीधाम में हुए करोड़ों रुपए के गबन मामले में गिरफ्तार आरोपी ट्रस्ट अध्यक्ष रामकुमार तोषावड़ की जमानत याचिका खारिज कर दी है। कोर्ट ने अपराध की गंभीरता और ट्रस्ट की राशि के व्यक्तिगत दुरुपयोग को देखते हुए आरोपी रामकुमार को राहत देने से इंकार कर दिया।

दरअसल अगस्त 2024 में परिवादी तुलसीराम ने कोतवाली थाने में रिपोर्ट दर्ज कराई थी। इसमें बताया था कि सर्राफा कारोबारी रामकुमार तोषावड़ और शंभूदयाल भामा ने फर्जी तरीके से खुद को अध्यक्ष व कोषाध्यक्ष घोषित कर लिया। आरोप है कि इन्होंने ट्रस्ट के नियमों के विरुद्ध नए बैंक खाते खुलवाए। वहीं स्वर्णकार समाज से एकत्र हुए चंदे की करीब 2.25 करोड़ रुपए की राशि सेल्फ चेक और करीबियों के नाम पर जारी करके हड़प ली।

दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद अपर सेशन जज-1 सत्यप्रकाश सोनी ने जमानत याचिका नामंजूर कर दी। जज ने ऑर्डर में स्पष्ट लिखा, “आरोपी ने ट्रस्ट के नियमों के विपरीत काम किया। संदिग्ध तरीके से पैसा खर्च किया और अमानत में खयानत की है, जिसके गंभीर सबूत मौजूद हैं। इस मामले में सह-आरोपी (शंभूदयाल भामा) की गिरफ्तारी अभी बाकी है। ऐसे में आरोपी को जमानत नहीं दी जा सकती।”

कोर्ट ने कहा- आरोपी के खिलाफ गंभीर सबूत

आरोपी‌ रामकुमार के वकील ने कोर्ट में तर्क दिया कि 74 वर्षीय रामकुमार समाजसेवी हैं और उनकी ओपन हार्ट सर्जरी हो चुकी है। यह मामला राजनीतिक रंजिश का है। ट्रस्ट पर रामकुमार का खुद का पैसा बकाया है। इसलिए उम्र को मद्देनजर रखते हुए रामकुमार को‌ राहत देते हुए जमानत दी जानी चाहिए।

वहीं सरकारी वकील और परिवादी के वकील ने जमानत का विरोध करते हुए कहा कि पुलिस इन्वेस्टिगेशन में अब तक 72 लाख 98 हजार 617 रुपए का गबन सामने आ चुका है। आरोपी ने ट्रस्ट की राशि परिजनों और कर्मचारियों को ट्रांसफर की। साथ ही बैंक में बैकडेट में डॉक्यूमेंट्स पेश कर गड़बड़ी को छिपाने का प्रयास किया।

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