ज़कात हर मालिके निसाब (धनवान )पर फ़र्ज़ है- एम ए पठान
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : जिला मुख्यालय से पत्रकार मोहम्मद अली पठान ने माहे रमजान के बारे में खासकर जकात पर शहर के आलिमो एवं मुफ्तियों से चर्चा कर जकात के बारे में बताया की जीस व्यक्ति के पास 653 ग्राम 184 मिलीग्राम चाँदी या उसकी कीमत का मालिक हो, वह मालिके निसाब है। मौजूदा समय में जयपुर,लखनऊ ,गोल्ड मार्केट के हिसाब से इसका रेट लगभग 1,70,000 (एक लाख सत्तर हज़ार) रुपये है। अलग-अलग शहरों में चाँदी के रेट में फर्क होता है, इसलिए दिल्ली,मुंबई, बैंगलोर, हैदराबाद,आदि शहरों और आस-पास के लोग अपने शहर के हिसाब से निसाब का रेट मालूम करके निकालें। साढ़े सात तोला सोना या साढे बावन तोला चांदी दोनों में से जिसकी कीमत कम हो या उस कीमत के बराबर रकम इस्तेमाल से जायद चीज हो तिजारत का माल हो वह मालीके निसाब है।
जो व्यक्ति इतनी या उससे ज़्यादा रकम का मालिक हो, वह ढाई प्रतिशत (2.5%) के हिसाब से ज़कात अदा करे।
● जिसके पास चाँदी न हो, सिर्फ सोना और रुपये हों, वह सोने की कीमत को अपने रुपयों में जोड़कर देखे। अगर निसाब पूरा होता है तो ज़कात दे, वरना माफ़ है।
● सोने का निसाब साढ़े सात तोले है, जिसका वज़न आज के हिसाब से 93 ग्राम 312 मिलीग्राम है। जिसके पास इतना या इससे ज़्यादा सोना हो उस पर सोने की ज़कात फ़र्ज़ है। और जिसके पास इससे कम सोना हो, वह सोने की कीमत अपने रुपयों में जोड़ ले। कुल कीमत 1,70,000 रुपये या उससे ज़्यादा हो तो ज़कात दे, कम हो तो माफ़ है। हाँ, रुपये देना सवाब का काम है, और न दे तो गुनाह नहीं।● मायके से दुल्हन को जो ज़ेवर मिले हैं, उनकी ज़कात दुल्हन पर ही फ़र्ज़ है। वह खुद अदा करे, या उसकी इजाज़त से उसका शौहर, बाप, भाई वगैरह अदा कर सकते हैं।
● गोल्ड मार्केट में सोना अलग-अलग शक्लों में मिलता है और उनके रेट में भी काफी फर्क होता है। खालिस (शुद्ध) सोना 24 कैरेट कहलाता है। मिलावट वाला सोना 22 कैरेट, 18 कैरेट या 16 कैरेट कहा जाता है। आम तौर पर ज़ेवर 22 कैरेट या 18 कैरेट या उससे कम के होते हैं। जिस कैरेट का सोना होगा, उसी के हिसाब से ज़ेवर के कुल वज़न पर ज़कात वाजिब होगी। ज़ेवर के वज़न में कोई कमी नहीं की जाएगी। बहारे-शरीअत में है: “अगर सोने-चाँदी में खोट हो और गालिब सोना या चाँदी हो, तो उसे सोना-चाँदी ही करार दिया जाएगा और कुल वज़न पर ज़कात वाजिब होगी।” और 22 कैरेट, 18 कैरेट वाले ज़ेवर में हक़ीक़त में मिलावट होती है, जो यकीनन खोट है, लेकिन जब गालिब सोना होता है, इसलिए पूरे वज़न पर ज़कात अदा की जाएगी।
● जो रुपये अपने खाते में हों, या बैंक या डाकखाने में फिक्स जमा हों, या किसी दूसरे के जिम्मे कर्ज़ या दैन हों, या दुकान या मकान के मालिक के पास ज़मानत के तौर पर जमा हों — उनकी ज़कात भी वाजिब है। जिसने ये रुपये दिए हैं या जमा किए हैं, वही उनकी ज़कात अदा करेगा।
● जो जमीन बेचने के लिए खरीदी गई हो, वह माले तिजारत है। हर साल बाजार भाव से उसकी कीमत लगाकर उसकी ज़कात अदा करना फ़र्ज़ है।
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