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झुंझुनूं में वायरल का डबल अटैक:7 दिन में 15 हजार मरीज हॉस्पिटल पहुंचे, बच्चे-बुजुर्ग ज्यादा प्रभावित, त्वचा रोग भी बढ़े


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झुंझुनूं में वायरल का डबल अटैक:7 दिन में 15 हजार मरीज हॉस्पिटल पहुंचे, बच्चे-बुजुर्ग ज्यादा प्रभावित, त्वचा रोग भी बढ़े

झुंझुनूं में वायरल का डबल अटैक:7 दिन में 15 हजार मरीज हॉस्पिटल पहुंचे, बच्चे-बुजुर्ग ज्यादा प्रभावित, त्वचा रोग भी बढ़े

झुंझुनूं : झुंझुनूं जिले में मौसम का अजीब मिजाज अब बीमारी का कारण बन गया है। दिन में तेज धूप और रात में ठंड के बीच वायरस-बैक्टीरिया सक्रिय हो गए हैं। हालात ऐसे हैं कि जिला हॉस्पिटल में पिछले एक सप्ताह में वायरल बुखार के 15 हजार से ज्यादा मरीज पहुंच चुके हैं। डॉक्टरों का कहना है कि इस बार संक्रमण सामान्य वायरल से अलग है। मरीजों की रिकवरी धीमी हो रही है।

7 दिनों में 15,249 ओपीडी, रोज 2 से ढाई हजार मरीज

बीडीके हॉस्पिटल के पीएमओ डॉ. जितेंद्र भांबू के अनुसार 11 फरवरी से 18 फरवरी के बीच कुल 15,249 मरीज ओपीडी में पहुंचे। प्रतिदिन औसतन 2,100 से 2,500 मरीज वायरल लक्षणों के साथ आ रहे हैं। सबसे ज्यादा 2,741 मरीज 16 फरवरी को दर्ज हुए, जबकि 17 फरवरी को गंभीर हालत में 102 मरीज भर्ती करने पड़े। पूरे सप्ताह में 577 मरीजों को वार्ड में शिफ्ट किया गया। लगातार बढ़ती भीड़ से डॉक्टरों और जांच लैब पर भारी दबाव बन गया है।

रिपोर्ट सामान्य, फिर भी सांस लेने में परेशानी

डॉक्टरों के मुताबिक इस बार संक्रमण चुनौतीपूर्ण है। कई मरीज जांच में सामान्य दिखाई देते हैं, लेकिन कमजोरी और खांसी लंबे समय तक बनी रहती है। मरीजों में सर्दी-जुकाम के साथ सांस फूलने की समस्या देखी जा रही है, जबकि प्राथमिक जांच रिपोर्ट सामान्य आती है। जहां पहले 5-7 दिन में राहत मिल जाती थी, वहीं अब ठीक होने में 15-20 दिन लग रहे हैं।

बच्चे-बुजुर्ग ज्यादा प्रभावित, त्वचा रोग भी बढ़े

बदलते तापमान का सबसे ज्यादा असर कमजोर इम्युनिटी वाले लोगों पर पड़ा है। बच्चों और बुजुर्गों में तेज बुखार, सूखी खांसी और थकान के मामले बढ़े हैं। धूल और एलर्जी के कारण स्किन संक्रमण भी बढ़ रहा है, जिससे चर्म रोग विभाग में मरीजों की लंबी कतारें लग रही हैं।

कोविड जैसे लक्षणों से बढ़ी घबराहट

कई मरीजों में तेज बुखार और सूखी खांसी कोविड जैसे लक्षणों से मिलती-जुलती है, जिससे लोगों में डर का माहौल बन रहा है। हालांकि डॉक्टरों का कहना है कि घबराने की जरूरत नहीं है और अधिकतर मामले मौसमी वायरल के हैं।

वायरस म्यूटेशन और लापरवाही बना कारण

बीडीके हॉस्पिटल के पीएमओ डॉ. जितेंद्र भांबू ने बताया- वायरस-बैक्टीरिया समय-समय पर बदलते रहते हैं, जिससे संक्रमण तेजी से फैलता है। दिन में गर्मी देखकर लोग गर्म कपड़े छोड़ देते हैं, जबकि सुबह-रात की ठंड शरीर की प्रतिरोधक क्षमता कमजोर कर रही है।

तापमान में उतार-चढ़ाव से शरीर तालमेल नहीं बैठा पाता और वायरल अटैक आसान हो जाता है। उन्होंने लोगों से अपील की कि कुछ दिन सावधानी रखें, लक्षण दिखते ही डॉक्टर से सलाह लें और खुद दवा लेने से बचें।

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