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पलसाना के गुर्जर समाज का अहम निर्णय:मृत्यु भोज, दशोठन और बर्तन वितरण पर लगाई रोक


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पलसाना के गुर्जर समाज का अहम निर्णय:मृत्यु भोज, दशोठन और बर्तन वितरण पर लगाई रोक

पलसाना के गुर्जर समाज का अहम निर्णय:मृत्यु भोज, दशोठन और बर्तन वितरण पर लगाई रोक

पलसाना : सीकर के पलसाना स्थित सुंदरपुरा गांव में गुर्जर समाज ने सामाजिक सुधारों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं। रविवार को हुई एक बैठक में समाज ने मृत्यु भोज, दशोठन (छूछक) और बर्तन वितरण जैसी प्रथाओं पर पूर्ण प्रतिबंध लगाने का फैसला किया। इसका मकसद फिजूलखर्ची और दिखावे पर रोक लगाना है।

बर्तन वितरण की प्रथा भी बंद होगी

समाज के निर्णय के अनुसार, अब किसी भी व्यक्ति की मृत्यु के बाद मृत्यु भोज का आयोजन नहीं किया जाएगा। इसके साथ ही, महिलाओं द्वारा किए जाने वाले बर्तन वितरण की प्रथा भी पूरी तरह से बंद कर दी गई है। 11वें दिन केवल सामान्य सत्संग का आयोजन होगा, जबकि बड़ी पार्टियों पर पूर्णतः रोक रहेगी।

टीका-पगड़ी की रस्म में ₹101 से अधिक की राशि नहीं दी जाएगी। सीसी पूजन के दिन भी केवल रोटी-सब्जी बनाकर रिश्तेदारों को खिलाने का प्रावधान किया गया है, ताकि अनावश्यक खर्चों से बचा जा सके। विवाह समारोहों में भी सादगी बनाए रखने का निर्णय लिया गया है। अब शादी में किसी भी प्रकार का दिखावा नहीं किया जाएगा। टिका, बाटका और पेरवानी जैसी रस्मों में केवल ₹101 ही दिए जाएंगे।

दहेज में वाहन नहीं लेंगे

दहेज के रूप में किसी भी प्रकार का वाहन (जैसे बाइक या गाड़ी) न तो लिया जाएगा और न ही दिया जाएगा। विवाह में बर्तन वितरण की प्रथा पर भी पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है। हालांकि, समाज ने स्पष्ट किया है कि शादी, भात और कुआं पूजन जैसे अवसरों पर डीजे बजाने की अनुमति जारी रहेगी।

पलसाना स्थित सुंदरपुरा गांव में गुर्जर समाज ने सामाजिक सुधारों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।
पलसाना स्थित सुंदरपुरा गांव में गुर्जर समाज ने सामाजिक सुधारों को लेकर महत्वपूर्ण निर्णय लिए हैं।

जन्मोत्सव और दशोठन (छूछक) के बड़े आयोजनों पर भी रोक लगा दी गई है। पोतड़ा की रस्म में ₹101 से अधिक की राशि नहीं दी जाएगी। समाज ने लोगों से अपील की है कि जन्मदिन केवल परिवार के सदस्यों के साथ सादगी से मनाए जाएं।

बैठक में समाज के कई वरिष्ठ सदस्य उपस्थित रहे। समाज के प्रतिनिधियों ने बताया कि इन सुधारों का मुख्य उद्देश्य फिजूलखर्ची को समाप्त कर समाज में सादगी और एकता का संदेश देना है। दिखावे में खर्च होने वाली राशि का उपयोग अब शिक्षा और अन्य सामाजिक कार्यों में किया जाएगा।

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