निजी स्कूलों पर मनमानी का आरोप, तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा:महंगी किताबों, कमीशनखोरी के खिलाफ कार्रवाई की मांग; आंदोलन की चेतावनी दी
निजी स्कूलों पर मनमानी का आरोप, तहसीलदार को ज्ञापन सौंपा:महंगी किताबों, कमीशनखोरी के खिलाफ कार्रवाई की मांग; आंदोलन की चेतावनी दी
सादुलपुर : सादुलपुर में निजी शिक्षण संस्थानों द्वारा महंगी पाठ्य सामग्री बेचने के विरोध में एसडीएम के नाम तहसीलदार रामसिंह सैनी को ज्ञापन सौंपा गया। ज्ञापन अनूप पूनिया के नेतृत्व में भगत सिंह फोर्स द्वारा दिया गया। ज्ञापन में निजी स्कूलों की मनमानी रोकने और कानूनी कार्रवाई करने की मांग की गई।
आरोप-10 से 15 गुना कीमत में बेची जा रही किताबें
ज्ञापन में बताया- नए शैक्षणिक सत्र की शुरुआत के साथ ही निजी स्कूल संचालक किसानों और मजदूर वर्ग के अभिभावकों पर आर्थिक बोझ डाल रहे हैं। अभिभावकों को स्कूलों द्वारा निर्धारित दुकानों से ही किताबें खरीदने के लिए मजबूर किया जाता है, जिससे कमीशनखोरी को बढ़ावा मिल रहा है।
प्रतिनिधिमंडल ने आरोप लगाया कि कई निजी विद्यालय एनसीईआरटी पाठ्यक्रम की पुस्तकों पर अपने विज्ञापन छपवाकर उन्हें 10 से 15 गुना अधिक कीमत पर बेच रहे हैं। उदाहरण के तौर पर, एक निजी स्कूल में कक्षा 5 की अंग्रेजी पुस्तक 395 रुपए में बेची जा रही थी, जबकि समान पाठ्यक्रम की सामान्य पुस्तक मात्र 65 रुपए में उपलब्ध है।

बच्चों पर बढ़ रहा मानसिक दबाव
ज्ञापन में शिक्षा के अधिकार अधिनियम के उल्लंघन का भी उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया है कि बच्चों पर अतिरिक्त पाठ्यक्रम का बोझ डाला जा रहा है। एलकेजी और यूकेजी के छोटे बच्चों को भी उच्च कक्षाओं का पाठ्यक्रम पढ़ाया जा रहा है, जिससे उन पर मानसिक दबाव बढ़ रहा है।
इसके अतिरिक्त, छोटे बच्चों के भारी स्कूल बैग को लेकर भी चिंता व्यक्त की गई। ज्ञापन में बताया गया कि 14-15 किलोग्राम वजन के बच्चों को 10-12 किलोग्राम तक का बैग उठाने के लिए मजबूर किया जा रहा है, जिससे उनके शारीरिक विकास पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ सकता है।
अभिभावकों ने प्रशासन से मांग की है कि निजी स्कूलों द्वारा फैलाई जा रही इस ‘शिक्षा माफिया’ पर तुरंत रोक लगाई जाए, महंगी पाठ्य सामग्री जब्त की जाए और राज्य में एक समान पाठ्यक्रम लागू किया जाए। उन्होंने चेतावनी दी कि यदि शीघ्र कार्रवाई नहीं हुई तो आंदोलन शुरू किया जाएगा।
ये रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने वालों में अनूप पूनिया, मोहन लाल झाड़सर, सुखबीर भामाशी, राजेश भामासी, सत्यवीर, सुखबीर सहारण, समुद्र ददरेवा, एडवोकेट गायत्री पूनिया, सुरेश किलका, एडवोकेट शिव मंगल, सुभाष जोईया, राजकुमार फगेड़िया, धर्मवीर महला, मुकेश दुग्गल और कृष्ण सिंह फौजी सहित कई अन्य लोग शामिल थे।
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