संसद में हथकरघा उद्योग का मुद्दा उठाया – बृजेन्द्र सिंह ओला
संसद में हथकरघा उद्योग का मुद्दा उठाया - बृजेन्द्र सिंह ओला
झुंझुनूं : झुंझुनूं सहित देश का हथकरघा उद्योग लाखों बुनकरों की आजीविका का आधार है, लेकिन वर्तमान नीतियां और सही से कार्ययोजना के अभाव में यह उद्योग गहरे संकट में है। सरकार की ओर से हथकरघा उत्पादों को बढ़ावा देने के लिए बड़े दावे किए जाते हैं, लेकिन जमीनी हकीकत इसके विपरीत है। मशीन-निर्मित वस्त्रों के आयात को बढ़ावा मिलने से पारंपरिक हथकरघा उद्योग बुरी तरह प्रभावित हो रहा है।
छोटे बुनकरों को पर्याप्त वित्तीय सहायता और उचित मूल्य नहीं मिल पा रहा है, जिससे यह ऐतिहासिक कला विलुप्ति की कगार पर है। हथकरघा उद्योग के लिए सरकार द्वारा जो प्रोत्साहन योजनाएं लाई गई है, वह पर्याप्त नहीं हैं। इसके लिए विशेष योजनाये और प्रोत्साहन दिया जाएं, ताकि वे आधुनिक तकनीक और बाजार की जरूरतों के अनुरूप खुद को ढाल सकें।
सरकार बुनकरों को वित्तीय और तकनीकी विशेष सहायता दे। साथ ही हथकरघा उत्पादों को राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर पहचान दिलाने के लिए विशेष कार्ययोजना बनाई जाए तो सकारात्मक परिणाम जरूर मिलेंगे। सरकार को चाहिए कि वह केवल घोषणाओं तक सीमित न रहे, बल्कि ठोस कदम उठाए, ताकि यह प्राचीन धरोहर संरक्षित रह सके और लाखों बुनकरों का भविष्य सुरक्षित हो।
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