चूरू में ट्रिपल इंजन की सरकार में जनता डबल परेशान, कलेक्ट्रेट के सामने सड़क बदहाल
जयपुर रोड और अग्रसेन नगर पुल निर्माण की आड़ में सड़क की अनदेखी, पुल के पास सड़क तक नहीं बनाई; भ्रष्टाचार की चर्चाओं के बीच अधिकारी और जनप्रतिनिधि मौन
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : प्रदेश में ट्रिपल इंजन की सरकार होने के बावजूद चूरू में आमजन की परेशानियां कम होने का नाम नहीं ले रही हैं। जिला कलेक्ट्रेट के सामने मुख्य सड़क की बदहाल स्थिति ने सरकारी विकास कार्यों और जिम्मेदारों की कार्यप्रणाली पर सवाल खड़े कर दिए हैं। जयपुर रोड और अग्रसेन नगर की ओर पुल निर्माण कार्य चल रहा है, लेकिन पुल के आसपास सड़क निर्माण की अनदेखी के चलते आमजन को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।
हैरानी की बात यह है कि जिला मुख्यालय के कलेक्ट्रेट के सामने ही सड़क की यह दुर्दशा है, जहां से प्रतिदिन प्रशासनिक अधिकारियों, जनप्रतिनिधियों और आमजन का आवागमन होता है। इसके बावजूद समस्या के समाधान को लेकर जिम्मेदारों की ओर से कोई प्रभावी पहल नजर नहीं आ रही है।
पुल बन रहा है, लेकिन सड़क का अता-पता नहीं
पुल निर्माण कार्य के आसपास सड़क की स्थिति बेहद खराब बताई जा रही है। पुल के पास सड़क का निर्माण नहीं होने से वाहन चालकों और राहगीरों को परेशानी उठानी पड़ रही है। निर्माण कार्य के दौरान यातायात और आमजन की सुविधा को लेकर जिन व्यवस्थाओं की जरूरत होती है, उन पर भी सवाल उठ रहे हैं।
स्थानीय स्तर पर निर्माण कार्य में नियमों की अनदेखी और भ्रष्टाचार को लेकर भी चर्चाएं हो रही हैं। हालांकि इन आरोपों की आधिकारिक पुष्टि नहीं हुई है, लेकिन निर्माण कार्य की गुणवत्ता और निगरानी की निष्पक्ष जांच होना जरूरी है।
ट्रिपल इंजन की सरकार में जनता डबल दुःखी
केंद्र, राज्य और स्थानीय स्तर पर भाजपा की सरकार होने के बावजूद यदि जिला मुख्यालय पर कलेक्ट्रेट के सामने ही सड़क की ऐसी स्थिति है तो विकास के दावों पर सवाल उठना लाजिमी है। आमजन का सवाल है कि जब सरकार के पास संसाधन और जिम्मेदार विभाग मौजूद हैं, तो फिर सड़क निर्माण में इतनी लापरवाही क्यों?
एक ओर सरकार विकास और बेहतर बुनियादी सुविधाओं की बात करती है, वहीं दूसरी ओर जिला मुख्यालय पर लोगों को सड़क जैसी मूलभूत सुविधा के लिए परेशान होना पड़ रहा है।
अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों के मुंह पर ताला क्यों?
सबसे बड़ा सवाल यह है कि आखिर इस समस्या को लेकर जिम्मेदार अधिकारी और जनप्रतिनिधि चुप क्यों हैं? क्या किसी जनप्रतिनिधि ने मौके पर पहुंचकर निर्माण कार्य की स्थिति देखी है? क्या संबंधित विभाग के अधिकारियों ने सड़क निर्माण की गुणवत्ता और नियमों की पालना की जांच की है? यदि जांच हुई है तो कार्रवाई कहां है?
समाजसेवी संगठनों और राजनीतिक दलों की चुप्पी भी चर्चा का विषय बनी हुई है। आमजन आखिर अपनी समस्या लेकर किसके पास जाए और उसकी सुनवाई कौन करेगा?
सरकारी धन का सदुपयोग हो, जनता को राहत मिले
निर्माण कार्यों में सरकारी धन खर्च होने का उद्देश्य आमजन को बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराना है। यदि पुल निर्माण के साथ आसपास की सड़क और यातायात व्यवस्था पर ध्यान नहीं दिया जाता तो लोगों को राहत मिलने के बजाय परेशानी ही बढ़ेगी। इससे सरकारी धन के सदुपयोग और निर्माण कार्यों की निगरानी पर भी सवाल खड़े होते हैं।
अब जरूरत है कि संबंधित विभाग के अधिकारी मौके का निरीक्षण करें, निर्माण कार्य की गुणवत्ता और स्वीकृत नियमों की जांच करवाएं तथा पुल के आसपास सड़क निर्माण का कार्य जल्द पूरा करवाएं।
आमजन का सीधा सवाल है कि जब कलेक्ट्रेट के सामने ही सड़क की यह हालत है तो शहर के दूसरे इलाकों की स्थिति का अंदाजा सहज ही लगाया जा सकता है। आखिर चूरू की जनता की समस्या कौन सुनेगा? जनता को विकास के दावे नहीं, धरातल पर अच्छी सड़क और राहत चाहिए।
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