सांसद कस्वां ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष राठौड़ पर साधा निशाना:कहा- अब भाजपा बाप, बेटे और बहू की पार्टी हो गई; परिवारवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज
सांसद कस्वां ने पूर्व नेता प्रतिपक्ष राठौड़ पर साधा निशाना:कहा- अब भाजपा बाप, बेटे और बहू की पार्टी हो गई; परिवारवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : चूरू में पंचायतीराज चुनाव के बीच सियासत में परिवारवाद को लेकर जुबानी जंग तेज हो गई है। इसी कड़ी में सांसद राहुल कस्वां का एक वीडियो सामने आया है। जिसमें वे खुद को परिवारवाद का जीता-जागता प्रतीक बताते हुए पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र राठौड़ पर निशाना साधते नजर आ रहे हैं।
यह वीडियो बालरासर आथुना गांव में 27 अक्टूबर को वार्ड 23 से कांग्रेस प्रत्याशी आशा स्वामी के प्रचार के दौरान का बताया जा रहा है। जिसमे सांसद कस्वां ने कहा कि उनका परिवार 49 साल से राजनीति में है। दादा, पिता, मां और वे खुद राजनीति में हैं। परिवार ने मेहनत की और कुर्बानियां दी हैं। जनता आशीर्वाद देगी तो वे अपने बेटे को भी राजनीति में आगे ला सकते हैं। फैसला जनता को करना है कि वह किसे नेता स्वीकार करती है।
‘भाजपा छोड़ने का सबसे बड़ा दुख काका को’
राठौड़ का नाम लिए बिना सांसद कस्वां ने कहा कि उनके भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आने के बाद सबसे बड़ा दुख काका को है। सांसद ने कहा कि वे परिवारवाद की बात न तो पहले करते थे और न ही इसे मानते हैं। उन्होंने राठौड़ का नाम लिए बिना कहा कि पहले रफीक मंडेलिया के लिए काका (राजेंद्र राठौड़) कहते थे कि कांग्रेस बाप-बेटे की पार्टी है, लेकिन अब भाजपा बाप, बेटे और बहू की पार्टी हो गई है। सांसद ने कहा कि चुनाव लड़ने का अधिकार सभी को है। जीत-हार का फैसला जनता करेगी।

परिवारवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज
आपको बता दे कि पंचायतराज चुनाव में राजेंद्र राठौड़ के बेटे पराक्रम सिंह और बहू कनिका सिंह के चुनाव मैदान में उतरने के बाद परिवारवाद को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हुई है। राठौड़ पहले कांग्रेस पर परिवारवाद का आरोप लगाते हुए चूरू कांग्रेस को बाप-बेटे की पार्टी बताते रहे हैं।
लगातार तीसरी बार सांसद है राहुल कस्वां
सांसद राहुल कस्वां का जन्म 20 जनवरी 1977 को राजगढ़ तहसील में हुआ। कस्वां वर्ष 2014, 2019 और 2024 में लगातार 3 बार सांसद बने हैं। फिलहाल वह कांग्रेस से चूरू लोकसभा क्षेत्र के सांसद हैं। उन्होंने अपने राजनीतिक जीवन की शुरुआत भाजपा से की थी। वर्ष 2014 और 2019 के लोकसभा चुनाव भाजपा उम्मीदवार के रूप में जीते। वर्ष 2024 में उन्होंने भाजपा छोड़कर कांग्रेस की सदस्यता ग्रहण की और कांग्रेस प्रत्याशी के रूप में वापस सांसद निर्वाचित हुए।
पिता भी लगातार 3 बार सांसद रह चुके
राहुल कस्वां के पिता रामसिंह कस्वां भी चूरू लोकसभा से लगातार 3 बार सांसद रह चुके हैं। वह वर्ष 1991, 1999, 2004 और 2009 में सांसद रहे थे। रामसिंह कस्वां 1990 में सादुलपुर (राजगढ़) विधानसभा सीट से भाजपा के विधायक भी चुने गए थे। राहुल कस्वां के दादा दीपचंद कस्वां भी विधायक रह चुके हैं।
मां भी विधायक रह चुकी
राहुल कस्वां की मां कमला कस्वां ने साल 2008 के विधानसभा चुनाव में सादुलपुर (राजगढ़) सीट से भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ा और बसपा (BSP) के वीरेंद्र न्यांगली को हराकर पहली बार विधायक बनीं। साल 2013 के चुनाव में भी भाजपा ने उन्हें इसी सीट से टिकट दिया था, लेकिन इस चुनाव में उन्हें बसपा के मनोज न्यांगली से हार का सामना करना पड़ा था। कमला कस्वां ने इस सीट से कुल 4 बार भाजपा के टिकट पर भाग्य आजमाया (1993, 2003, 2008 और 2013), जिसमें से वह केवल 2008 में विजयी रहीं।
- मेरे भाजपा छोड़कर कांग्रेस में आने का सबसे बड़ा दुख काका को है। अब भाजपा बाप, बेटे और बहू की पार्टी हो गई है। – राहुल कस्वां सासंद, चूरू
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