क्या हवेलियों तक ही सीमित है शेखावाटी की विरासत? मंदिर, बावड़ियों और ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण पर भी हो ध्यान
पर्यटन विशेषज्ञ राजेश शर्मा ने उठाई मांग, ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को मास्टर प्लान में शामिल कर अवैध विध्वंस रोकने का आग्रह
शेखावाटी : जयपुर में शेखावाटी फाउंडेशन की ओर से आयोजित ‘शेखावाटी हेरिटेज एवं विकास’ कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा मुख्य अतिथि के रूप में शामिल हुए। कार्यक्रम में झुंझुनूं, सीकर और चूरू जिले के विकास, पर्यटन को बढ़ावा देने तथा ऐतिहासिक धरोहरों के संरक्षण के लिए राज्य सरकार की ओर से उठाए गए कदमों के प्रति आभार व्यक्त किया गया। हालांकि, पर्यटन विशेषज्ञ राजेश शर्मा ने शेखावाटी की विरासत के संरक्षण को लेकर एक महत्वपूर्ण सवाल उठाया है। उनका कहना है कि क्षेत्र की विरासत को केवल हवेलियों तक सीमित नहीं रखा जाना चाहिए, बल्कि मंदिरों, छतरियों, जोहड़ों, कुओं, बावड़ियों और ऐतिहासिक स्मारकों के संरक्षण पर भी विशेष ध्यान दिया जाना चाहिए।
राजेश शर्मा के अनुसार, शेखावाटी की पहचान उसकी अनूठी वास्तुकला, भित्ति चित्रों और समृद्ध सांस्कृतिक परंपराओं से है। यहां की ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरें भी क्षेत्र के गौरवशाली अतीत की गवाह हैं। ऐसे में इनके जीर्णोद्धार और संरक्षण के लिए भी योजनाबद्ध तरीके से काम करने की आवश्यकता है। उन्होंने बताया कि इन धरोहरों के संरक्षण को लेकर वे कई बार पत्राचार के माध्यम से केंद्र और राज्य सरकार का ध्यान आकर्षित कर चुके हैं।

200 करोड़ रुपये के बजट के पारदर्शी उपयोग पर जोर
पर्यटन विशेषज्ञ ने कहा कि यदि राज्य सरकार की ओर से प्रस्तावित 200 करोड़ रुपये की राशि का उपयोग पूरी पारदर्शिता और जवाबदेही के साथ किया जाए तथा इस कार्य में भारतीय राष्ट्रीय कला एवं सांस्कृतिक धरोहर न्यास (इंटैक) जैसी संस्थाओं और विरासत संरक्षण विशेषज्ञों की मदद ली जाए, तो शेखावाटी के पर्यटन उद्योग को नई गति मिल सकती है। इससे ऐतिहासिक धरोहरों को सुरक्षित रखने के साथ स्थानीय स्तर पर रोजगार और पर्यटन से जुड़ी गतिविधियों को भी बढ़ावा मिल सकता है।
मास्टर प्लान में शामिल हों ऐतिहासिक धरोहरें
राजेश शर्मा ने मांग की कि ऐतिहासिक और धार्मिक धरोहरों को संबंधित नगरों के मास्टर प्लान में शामिल किया जाए, ताकि उनके आसपास अनियंत्रित निर्माण और अवैध विध्वंस पर रोक लगाने के लिए प्रभावी कदम उठाए जा सकें। उन्होंने कहा कि संरक्षण के अभाव में क्षेत्र की कई महत्वपूर्ण धरोहरों के अस्तित्व पर खतरा पैदा हो सकता है।
उन्होंने सरकार से आग्रह किया कि हवेलियों के साथ-साथ मंदिरों, छतरियों, कुओं, बावड़ियों, जोहड़ों और स्मारकों की पहचान कर उनके संरक्षण की समग्र योजना बनाई जाए। इससे शेखावाटी की सांस्कृतिक विरासत आने वाली पीढ़ियों के लिए सुरक्षित रह सकेगी और क्षेत्र को विरासत पर्यटन के प्रमुख केंद्र के रूप में विकसित करने में मदद मिलेगी।
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