विश्व पर्यटन दिवस पर सालासर में गूंजे राजस्थान की लोक संस्कृति के सुर : धार्मिक आस्था के साथ लोक कला और विरासत पर्यटन की दिखी अनूठी झलक
लंगा, कालबेलिया और रोबिला कलाकारों ने दी मनमोहक प्रस्तुतियां, लोक संगीत से सजी पर्यटन नगरी
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
सालासर : विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर रविवार को चूरू जिले के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थल सालासर में राजस्थान की समृद्ध लोक संस्कृति और पारंपरिक कलाओं से सजा विशेष सांस्कृतिक कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम में लोक कलाकारों की प्रस्तुतियों ने माहौल को जीवंत बना दिया और देश-विदेश से आए पर्यटकों को राजस्थान की लोक परंपराओं से रूबरू होने का अवसर मिला। कार्यक्रम में लंगा, कालबेलिया एवं रोबिला लोक कलाकारों ने अपनी मनमोहक प्रस्तुतियों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया। लोक वाद्य यंत्रों की धुन, पारंपरिक संगीत और लोक प्रस्तुतियों ने राजस्थान की सांस्कृतिक विविधता और सदियों पुरानी लोक विरासत की खूबसूरत तस्वीर पेश की।
लोक कलाकारों ने बांधा समां
कार्यक्रम में लोक कलाकार गोपाल बिस्सा, रतन एवं काजू खान ने अपनी प्रस्तुतियों से दर्शकों का मनोरंजन किया। कलाकारों ने राजस्थान की पारंपरिक लोक संगीत शैली और सांस्कृतिक विरासत को अपनी प्रस्तुतियों के माध्यम से प्रभावी ढंग से प्रस्तुत किया। लोक धुनों और पारंपरिक प्रस्तुतियों के बीच दर्शक राजस्थान की लोक संस्कृति के रंग में रंगे नजर आए।
पर्यटन विभाग की रही महत्वपूर्ण भूमिका
कार्यक्रम के आयोजन एवं समन्वय में महेश कुमार व्यास, सहायक निदेशक, राजस्थान पर्यटन की महत्वपूर्ण भूमिका रही। वहीं पर्यटकों की सहायता और आयोजन के दौरान आवश्यक सहयोग के लिए टूरिस्ट असिस्टेंस फोर्स के उम्मेद सिंह भी मौजूद रहे।

‘पंच गौरव’ में शामिल है सालासर
विश्व पर्यटन दिवस के आयोजन के लिए सालासर का चयन विशेष महत्व रखता है। सालासर राजस्थान सरकार के ‘पंच गौरव’ कार्यक्रम के तहत चूरू जिले के चयनित गौरव स्थलों में शामिल है। इसके साथ ही सालासर बालाजी धाम जिले के प्रमुख धार्मिक एवं पर्यटन स्थलों में महत्वपूर्ण स्थान रखता है। सालासर बालाजी धाम में वर्षभर देश के विभिन्न हिस्सों से बड़ी संख्या में श्रद्धालु और पर्यटक पहुंचते हैं। ऐसे में यहां लोक संस्कृति का आयोजन धार्मिक पर्यटन के साथ सांस्कृतिक पर्यटन को भी बढ़ावा देने वाला रहा।
हवेलियों से लोक कला तक, चूरू की पर्यटन विरासत को किया प्रदर्शित
विश्व पर्यटन दिवस के अवसर पर चूरू जिले की व्यापक पर्यटन विरासत को भी रेखांकित किया गया। चूरू शहर की ऐतिहासिक हवेलियां जिले की स्थापत्य और सांस्कृतिक पहचान का महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। भव्य भित्तिचित्रों, पारंपरिक वास्तुकला, खूबसूरत झरोखों और कलात्मक सज्जा से सजी ये हवेलियां शेखावाटी की समृद्ध कला एवं विरासत की कहानी बयां करती हैं और देश-विदेश के पर्यटकों के लिए आकर्षण का प्रमुख केंद्र हैं।
धर्म, विरासत और लोक संस्कृति का संगम
विश्व पर्यटन दिवस का यह आयोजन धार्मिक पर्यटन, विरासत पर्यटन और लोक संस्कृति को एक साथ जोड़ने का प्रयास रहा। एक ओर जहां सालासर की धार्मिक आस्था को सामने रखा गया, वहीं दूसरी ओर चूरू की ऐतिहासिक हवेलियों और राजस्थान की जीवंत लोक कलाओं के माध्यम से जिले की विविध पर्यटन संभावनाओं को प्रदर्शित किया गया। कार्यक्रम ने यह संदेश भी दिया कि राजस्थान की पर्यटन पहचान केवल ऐतिहासिक स्मारकों और धार्मिक स्थलों तक सीमित नहीं है, बल्कि यहां की लोक कला, संगीत, परंपराएं और सांस्कृतिक विरासत भी पर्यटकों के लिए बड़ा आकर्षण हैं।
देश
विदेश
प्रदेश
संपादकीय
वीडियो
आर्टिकल
व्यंजन
स्वास्थ्य
बॉलीवुड
G.K
खेल
बिजनेस
गैजेट्स
पर्यटन
राजनीति
मौसम
ऑटो-वर्ल्ड
करियर/शिक्षा
लाइफस्टाइल
धर्म/ज्योतिष
सरकारी योजना
फेक न्यूज एक्सपोज़
मनोरंजन
क्राइम
चुनाव
ट्रेंडिंग
Covid-19






Total views : 2410538


