पानी का बिल पूरा, फिर भी नलों में बूंद नहीं!
उपभोक्ता आयोग का एलएंडटी के वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट मैनेजर को 72 घंटे का अल्टीमेटम, 30 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से पेश होकर देनी होगी पालना रिपोर्ट-आदेश की पालना नहीं हुई तो गिरफ्तारी वारंट की चेतावनी
झुंझुनूं : शहर में पेयजल आपूर्ति की बदहाल व्यवस्था से परेशान उपभोक्ताओं की शिकायत अब जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग तक पहुंच गई है। उपभोक्ताओं का आरोप है कि पेयजल के बिल लगातार लिए जा रहे हैं, लेकिन नलों में नियमित पानी नहीं पहुंच रहा। मामले को गंभीरता से लेते हुए जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील ने झुंझुनूं शहर में पेयजल आपूर्ति व्यवस्था संभाल रही एलएंडटी कंपनी के वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट मैनेजर को 72 घंटे के भीतर पेयजल व्यवस्था सुचारू करने के निर्देश दिए हैं।
आयोग ने स्पष्ट किया है कि आदेश की पालना सुनिश्चित करने के बाद संबंधित अधिकारी को 30 सितंबर को व्यक्तिगत रूप से आयोग के समक्ष उपस्थित होकर पालना रिपोर्ट प्रस्तुत करनी होगी। आदेश की पालना नहीं करने पर आयोग ने गिरफ्तारी वारंट जारी करने की चेतावनी भी दी है।
बार-बार आयोग तक पहुंच रही पेयजल की शिकायतें
झुंझुनूं शहर में पेयजल संकट को लेकर उपभोक्ताओं की शिकायतें पहले भी आयोग के समक्ष पहुंचती रही हैं। न्यायिक प्रक्रिया के दौरान शहरवासियों ने पेयजल आपूर्ति से जुड़ी समस्याएं आयोग के सामने रखी थीं। उस समय तत्कालीन सहायक अभियंता पुनित सैनी ने गर्मी के मौसम में उपभोक्ताओं की समस्याओं का संज्ञान लेते हुए उनके समाधान के प्रयास किए थे।
समस्याओं के समाधान के बाद आयोग ने भी संबंधित प्रकरणों का लोक अदालत की भावना से निस्तारण किया था। हालांकि इसके बाद भी शहर में पेयजल आपूर्ति से जुड़ी शिकायतों का सिलसिला पूरी तरह खत्म नहीं हुआ। वर्तमान मामले में भी उपभोक्ताओं ने नियमित पेयजल उपलब्ध नहीं होने की समस्या आयोग के समक्ष रखी। इसके बाद आयोग ने पेयजल आपूर्ति परियोजना के जिम्मेदार अधिकारी को तलब कर व्यवस्था सुधारने के निर्देश दिए हैं।
बिल लगातार लिए जा रहे, पानी नहीं मिलने पर आयोग ने माना ‘सेवा में दोष’
मामले का सबसे अहम पहलू यह है कि उपभोक्ताओं से पेयजल सुविधा के लिए राशि लगातार ली जा रही है। इसके बावजूद उन्हें नियमित और अपेक्षित पेयजल आपूर्ति नहीं मिल रही है। उपभोक्ताओं की इसी शिकायत को गंभीरता से लेते हुए आयोग ने पेयजल आपूर्ति में कमी को ‘सेवा में दोष’ के रूप में लिया है। आयोग ने वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट का संचालन कर रही एलएंडटी कंपनी के प्रोजेक्ट मैनेजर को आवश्यक कार्रवाई के लिए तलब किया है।
72 घंटे में व्यवस्था सुधारने के निर्देश
आयोग ने संबंधित प्रोजेक्ट मैनेजर को 72 घंटे के भीतर शहरवासियों को सुचारू पेयजल आपूर्ति सुनिश्चित करने के निर्देश दिए हैं। साथ ही की गई कार्रवाई की विस्तृत रिपोर्ट निर्धारित तारीख को आयोग के समक्ष प्रस्तुत करने को कहा है। आयोग के आदेश के बाद अब शहर की पेयजल व्यवस्था और वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट की कार्यप्रणाली पर निगाह रहेगी। लंबे समय से पेयजल संकट झेल रहे उपभोक्ताओं को उम्मीद है कि आयोग के हस्तक्षेप के बाद व्यवस्था में ठोस सुधार होगा।
आदेश की पालना नहीं हुई तो गिरफ्तारी वारंट
आयोग ने अपने आदेश में सख्ती दिखाते हुए स्पष्ट किया है कि यदि संबंधित वाटर सप्लाई प्रोजेक्ट मैनेजर निर्धारित समय में आदेश की पालना नहीं करते और 30 सितंबर को पालना रिपोर्ट प्रस्तुत नहीं करते, तो उनके विरुद्ध गिरफ्तारी वारंट जारी किया जा सकता है। अब शहरवासियों की नजर 30 सितंबर को होने वाली सुनवाई पर है। इस दिन संबंधित अधिकारी को आयोग के समक्ष व्यक्तिगत रूप से उपस्थित होकर यह बताना होगा कि 72 घंटे के अल्टीमेटम के बाद शहर की पेयजल व्यवस्था में क्या सुधार किए गए और आयोग के आदेश की किस तरह पालना की गई।
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