700 किमी की पदयात्रा के बाद अब हर जिले में होगा एक दिवसीय मार्च, झुंझुनूं से शुरुआत
700 किमी की पदयात्रा के बाद अब हर जिले में होगा एक दिवसीय मार्च, झुंझुनूं से शुरुआत
झुंझुनूं : खाद्य पदार्थों में मिलावट और सुरक्षित भोजन के अधिकार को लेकर बीकानेर से दिल्ली तक 700 किलोमीटर से अधिक की पदयात्रा के बाद अब अभियान को राजस्थान के हर जिले तक पहुंचाने की तैयारी है। अभियान के अगले चरण में प्रत्येक जिले में एक दिवसीय फूड रियलिटी मार्च आयोजित किया जाएगा। इसकी शुरुआत झुंझुनूं से होगी।
शनिवार को आयोजित प्रेस वार्ता में अभियान के संयोजक एवं मरुसेना फाउंडेशन के अध्यक्ष अधिवक्ता जयन्त मूंड ने बताया कि 4 सितंबर को बीकानेर से शुरू हुई पदयात्रा 20 दिन में 700 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय कर दिल्ली के राजघाट पर संपन्न हुई। उन्होंने कहा कि अभियान किसी राजनीतिक दल के पक्ष या विपक्ष में नहीं, बल्कि सुरक्षित भोजन के अधिकार और जनस्वास्थ्य से जुड़े मुद्दों को लेकर चलाया जा रहा है।
अभियान की ओर से खाद्य सुरक्षा विभाग में प्रशिक्षित अधिकारियों की नियुक्ति, पर्याप्त संसाधन, जांच उपकरण और आधुनिक प्रयोगशालाएं उपलब्ध कराने तथा मिलावटखोरी के खिलाफ कानूनों को कठोर बनाने की मांग की गई। गंभीर मामलों में कठोरतम सजा का प्रावधान करने की मांग भी उठाई गई। अभियान की 12 सूत्रीय मांगों में प्रत्येक जिले में निःशुल्क खाद्य परीक्षण प्रयोगशाला, पैकेज्ड खाद्य पदार्थों पर स्वास्थ्य रेटिंग, खाद्य सामग्री की जानकारी हिंदी में देने, विद्यालयों में ‘शुद्ध आहार’ की शिक्षा, भ्रामक विज्ञापनों पर कार्रवाई और मिलावट के मामलों के शीघ्र निस्तारण के लिए त्वरित न्यायालयों की स्थापना शामिल है।
अभियान के तहत खाद्य सुरक्षा से जुड़े मामलों की कानूनी पैरवी के लिए विधिक प्रकोष्ठ भी गठित किया गया है। मूंड ने कहा कि पदयात्रा समाप्त हुई है, लेकिन अभियान जारी रहेगा। प्रेस वार्ता में सहदेव कड़वासरा, राकेश ढाका, अधिवक्ता सुनील सिहाग, सुनील कुमार झाझोंत, नवीन रामकरण, प्रदीप सिहाग और अधिवक्ता वाहिद खान मौजूद रहे।
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