श्रीमाधोपुर में चाचा हारे, भतीजा बना पार्षद:करोड़पति प्रत्याशियों को नहीं मिली सफलता, कांग्रेस प्रत्याशी को केवल 3 वोट मिले
श्रीमाधोपुर में चाचा हारे, भतीजा बना पार्षद:करोड़पति प्रत्याशियों को नहीं मिली सफलता, कांग्रेस प्रत्याशी को केवल 3 वोट मिले
श्रीमाधोपुर : श्रीमाधोपुर नगर पालिका के 35 वार्डों में भाजपा ने 19 सीटें जीतकर बहुमत हासिल कर लिया है। कांग्रेस को 9 और निर्दलीयों को 7 सीटें मिलीं। भाजपा यहां लगातार तीसरी बार नगर पालिका बोर्ड बनाएगी। चेयरमैन पद ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित है। अध्यक्ष पद के लिए मंगलवार को एक भी नामांकन नहीं हुआ। इधर, बाड़ाबंदी में रखे गए भाजपा के 19 नवनिर्वाचित पार्षद और उनके साथ वार्ड 19, 20 व 25 से जीते तीन निर्दलीय पार्षद एक साथ चार गाड़ियों में एसडीएम कार्यालय पहुंचे। सभी ने निर्वाचक रजिस्ट्रीकरण अधिकारी सौरभ भाम्बू से जीत का प्रमाण-पत्र लिया और शपथ ली।
2021 में बागी निर्दलीयों के समर्थन से बनाया था बोर्ड
2021 के चुनाव में भाजपा को 12 सीटें मिली थीं। तब कांग्रेस के बागी निर्दलीयों के समर्थन से बोर्ड बना था। इस बार भाजपा ने 7 सीटें ज्यादा जीतकर 19 कर ली हैं। अब पार्टी को बोर्ड बनाने के लिए निर्दलीयों के सहारे की जरूरत नहीं पड़ेगी। कांग्रेस की सीटें 13 से घटकर 9 रह गईं, जबकि निर्दलीयों की संख्या 10 से घटकर 7 हो गई।
करोड़पति प्रत्याशी हारे
इस चुनाव में करोड़पति प्रत्याशियों को हार का सामना करना पड़ा। वार्ड 33 से डॉ. ज्योति सैनी, वार्ड 8 से सांवरमल मीणा और वार्ड 26 से निरंजनलाल कयाल चुनाव हार गए। वार्ड 16 में कांग्रेस प्रत्याशी राम सिंह को सिर्फ 3 वोट मिले। भाजपा के रोशनलाल ने 256 वोट हासिल कर 134 वोटों से जीत दर्ज की। रोशनलाल लगातार दूसरी बार पार्षद चुने गए हैं। कांग्रेस ने राम सिंह को बाहरी वार्ड 17 से प्रत्याशी बनाया था।
374 वोट की सबसे बड़ी जीत, 5 वोट से सबसे छोटी
वार्ड 9 में भाजपा के विष्णु कुमार मिश्रा ने 374 वोटों से सबसे बड़ी जीत दर्ज की। इसके उलट वार्ड 1 में निर्दलीय सुमन देवी ने महज 5 वोट के अंतर से जीत हासिल की।

चाचा हारे, भतीजा लगातार दूसरी बार जीता
वार्ड 12 से कांग्रेस के विजय कुमार सैनी ने लगातार दूसरी बार जीत दर्ज की। वहीं उनके चाचा प्रभुदयाल सैनी वार्ड 2 से कांग्रेस प्रत्याशी थे, लेकिन चुनाव हार गए, उन्हे महज 58 वोट मिले और छठवें नंबर पर रहे। यानी एक ही परिवार के दो प्रत्याशियों में भतीजे ने बाजी मारी, जबकि चाचा को हार का सामना करना पड़ा।
सबसे युवा और सबसे उम्रदराज विजेता भी कांग्रेस से
वार्ड 12 के विजय कुमार सैनी सबसे कम उम्र के विजेता रहे, जबकि वार्ड 29 के 78 वर्षीय रामनाथ सबसे उम्रदराज विजेता बने। खास बात यह रही कि दोनों कांग्रेस से हैं और दोनों लगातार दूसरी बार पार्षद चुने गए।
दिग्गजों के वार्ड में भी उलटफेर
भाजपा शहर मंडल अध्यक्ष नटवर पारीक और उपाध्यक्ष चुन्नीलाल नायक के वार्ड 27 में पार्टी प्रत्याशी तीसरे स्थान पर रहा। चुनाव संयोजक कमल जैन और सहसंयोजक मोहन व्यास भी अपने-अपने वार्डों में पार्टी प्रत्याशियों को जीत नहीं दिला सके। दूसरी ओर भाजपा के महामंत्री विष्णु मिश्रा और ओमप्रकाश सैनी अपनी-अपनी जीत के साथ संगठन में प्रभाव बनाए रखने में सफल रहे।
महिला प्रत्याशियों में भाजपा का स्ट्राइक रेट बेहतर
भाजपा और कांग्रेस ने मिलकर 21 महिला प्रत्याशियों को मैदान में उतारा था। इनमें 7 जीतने में सफल रहीं। भाजपा की 10 महिला प्रत्याशियों में से 4 ने जीत दर्ज की, जबकि कांग्रेस की 11 में से 3 महिला प्रत्याशी जीतीं। संख्या के साथ जीत के प्रतिशत में भी भाजपा की महिला प्रत्याशियों का प्रदर्शन बेहतर रहा।
पूर्व चेयरमैन के बेटे पहली बार मैदान में उतरे, बीजेपी प्रत्याशी से हारे
वार्ड 21 में पूर्व चेयरमैन प्रभुदयाल कुमावत के बेटे चिरंजीलाल कुमावत पहली बार कांग्रेस के टिकट पर चुनाव मैदान में उतरे थे। उनके सामने भाजपा के चरणजीत कुमावत भी पहली बार चुनाव लड़ रहे थे। मुकाबले में चरणजीत कुमावत ने चिरंजीलाल को शिकस्त देकर जीत दर्ज की।
वहीं वार्ड 33 में पूर्व चेयरमैन गुलाबी देवी सैनी निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में मैदान में उतरीं, लेकिन उन्हें भी हार का सामना करना पड़ा। वे चौथे स्थान पर रहीं। इस तरह चुनाव में राजनीतिक अनुभव और पुराने रसूख वाले चेहरों के साथ-साथ दिग्गज परिवारों को भी मतदाताओं ने कई वार्डों में बड़ा झटका दिया।
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