सभापति का ताज किसके सिर? चूरू में भाजपा के 30 पार्षद, अब नए चेहरे पर निगाहें
विनय गोयनका, विजय शर्मा, अनुराग शर्मा और अभिषेक चोटिया के नाम चर्चा में; भाजपा नेतृत्व के फैसले पर टिकी नजरें
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : नगर परिषद चुनाव-2026 के परिणाम सामने आने के साथ ही चूरू शहर की राजनीति में अब सबसे बड़ा सवाल सभापति पद को लेकर खड़ा हो गया है। 60 वार्डों के परिणाम में भाजपा 30 सीटों के साथ सबसे बड़े दल के रूप में सामने आई है। कांग्रेस को 24 और निर्दलीयों को 6 सीटें मिली हैं। ऐसे में सभापति पद पर भाजपा का दावा मजबूत माना जा रहा है, लेकिन अंतिम फैसला पार्टी नेतृत्व और निर्वाचित पार्षदों के राजनीतिक समीकरण पर निर्भर करेगा।
चुनाव से पहले और मतदान के बाद तक कांग्रेस के पक्ष में माहौल को लेकर चर्चाएं थीं, लेकिन परिणामों ने राजनीतिक समीकरण बदल दिए। भाजपा ने 30 सीटें जीतकर बढ़त बनाई, हालांकि बहुमत के लिए जरूरी 31 सीटों से वह एक कदम पीछे है। ऐसे में सभापति चुनाव से पहले निर्दलीय पार्षदों की भूमिका भी महत्वपूर्ण हो सकती है।
दो बड़े राजनीतिक चेहरों के प्रभाव का भी इम्तिहान
निकाय चुनाव को केवल पार्षदों के चुनाव तक सीमित नहीं माना जा रहा। इसे पूर्व नेता प्रतिपक्ष राजेंद्र सिंह राठौड़ और कांग्रेस के विधानसभा व लोकसभा प्रत्याशी रहे रफीक मंडेलिया के राजनीतिक प्रभाव की परीक्षा के तौर पर भी देखा जा रहा है। भाजपा की ओर से शहर में कई प्रमुख चेहरों को चुनाव मैदान में उतारने की रणनीति का परिणाम पार्टी के पक्ष में रहा।
वार्ड 17 से रजिया ने 1456 मतों के अंतर से जीत दर्ज की, जबकि वार्ड 11 से उनके पुत्र संजय भाटी ने 1301 मतों के अंतर से शानदार जीत हासिल की। इन बड़े अंतर की जीत ने भी चुनाव परिणाम में खास चर्चा बटोरी है।
जिले के निकाय परिणामों ने भी दिए संकेत
पूरे चूरू जिले के निकाय चुनाव परिणामों को देखें तो भाजपा कई निकायों में मजबूत स्थिति में रही। 11 स्थानों पर हुए चुनावों में भाजपा 7 जगह सबसे आगे रही, जबकि कांग्रेस 3 जगह आगे रही और एक जगह दोनों बराबरी पर रहे। सुजानगढ़ में कांग्रेस तीसरे स्थान पर रही। ऐसे में इन परिणामों को केवल स्थानीय निकायों तक सीमित मानना आने वाले समय की राजनीति के लिए महत्वपूर्ण संकेत हो सकता है।
कौन बनेगा चूरू का अगला सभापति?
अब सबसे ज्यादा चर्चा चूरू नगर परिषद के अगले सभापति को लेकर है। सामान्य श्रेणी की सीट होने के कारण भाजपा के सामने कई विकल्प बताए जा रहे हैं। विनय गोयनका, पूर्व सभापति विजय शर्मा, अनुराग शर्मा और अभिषेक चोटिया जैसे नाम राजनीतिक गलियारों में चर्चा में हैं।
मौजूदा समीकरणों में विनय गोयनका को मजबूत दावेदार माना जा रहा है, हालांकि पार्टी की ओर से अभी कोई अंतिम निर्णय सामने नहीं आया है। सभापति का चुनाव निर्वाचित पार्षदों के समर्थन और पार्टी नेतृत्व के निर्णय से तय होगा।
राठौड़ को मिली राजनीतिक बढ़त, मंडेलिया के सामने चुनौती
तारानगर विधानसभा चुनाव में हार के बावजूद राजेंद्र सिंह राठौड़ की चूरू जिले की राजनीति में सक्रियता और प्रभाव को इन निकाय चुनाव परिणामों ने फिर चर्चा में ला दिया है। चूरू नगर परिषद सहित जिले के कई निकायों में भाजपा के प्रदर्शन को उनके लिए राजनीतिक बढ़त के रूप में देखा जा रहा है।
दूसरी ओर कांग्रेस के सामने संगठन को मजबूत करने और जमीनी स्तर पर कार्यकर्ताओं को सक्रिय करने की चुनौती है। चुनावी राजनीति में केवल मतदान के समय सक्रिय होने के बजाय बूथ, वार्ड और कार्यकर्ता स्तर पर लगातार संगठन को मजबूत करना पार्टी के लिए अहम होगा।
फिलहाल चुनाव परिणाम आ चुके हैं, लेकिन चूरू की सियासत में अगला मुकाबला सभापति की कुर्सी को लेकर है। भाजपा के 30 पार्षदों के बीच से ताज किसके सिर सजेगा—विनय गोयनका, विजय शर्मा, अनुराग शर्मा, अभिषेक चोटिया या कोई नया चेहरा? इसका फैसला भाजपा नेतृत्व और पार्षदों के बीच बनने वाले समीकरणों से होगा। – इमरान भाटी
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