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सर्वेयर रिपोर्ट के बाद 572 दिन तक बीमा दावा लटकाया, कंपनी को देना होगा 4.80 लाख


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
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झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

सर्वेयर रिपोर्ट के बाद 572 दिन तक बीमा दावा लटकाया, कंपनी को देना होगा 4.80 लाख

उपभोक्ता आयोग ने 9 प्रतिशत ब्याज, 1.35 लाख मानसिक संताप और 10,500 रुपए परिवाद व्यय भी देने के दिए आदेश

झुंझुनूं : सर्वेयर की अंतिम रिपोर्ट मिलने के बाद बीमा दावा निर्धारित समय में निपटाना बीमा कंपनी की जिम्मेदारी है, लेकिन बोलेरो चोरी के एक मामले में यूनाइटेड इंडिया इंश्योरेंस कंपनी लिमिटेड ने सर्वेयर रिपोर्ट मिलने के बाद भी करीब 572 दिन तक दावे का निस्तारण नहीं किया। जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग, झुंझुनूं ने इसे सेवा में कमी और अनुचित व्यापार-प्रथा मानते हुए बीमा कंपनी को उपभोक्ता के पक्ष में फैसला सुनाया।

आयोग के अध्यक्ष एवं पीठासीन अधिकारी मनोज कुमार मील तथा सदस्य प्रमेन्द्र कुमार सैनी ने कंपनी को 4 लाख 80 हजार रुपए की बीमित राशि 29 जनवरी 2025 से वास्तविक भुगतान तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित देने के आदेश दिए हैं। इसके अलावा मानसिक संताप के लिए 1 लाख 35 हजार रुपए तथा परिवाद व्यय के रूप में 10,500 रुपए भी अदा करने होंगे। निर्धारित अवधि में भुगतान नहीं करने पर आदेशानुसार 12.5 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लागू होगा।

23 नवंबर 2024 को चोरी हुआ था बोलेरो

मामला खेतड़ी नगर क्षेत्र का है। बोलेरो की बीमा पॉलिसी 28 नवंबर 2023 से 27 नवंबर 2024 तक प्रभावी थी। वाहन 23 नवंबर 2024 की रात करीब 11:45 बजे चोरी हो गया। अगले दिन 24 नवंबर को खेतड़ी नगर थाने में प्राथमिकी दर्ज कराई गई। परिवादी ने 26 नवंबर को बीमा कंपनी में दावा प्रस्तुत किया।

पुलिस जांच में वाहन चोरी होना प्रमाणित हुआ और न्यायिक मजिस्ट्रेट, खेतड़ी ने 16 जनवरी 2025 को पुलिस की अंतिम रिपोर्ट स्वीकार कर ली। इसके बाद बीमा कंपनी के सर्वेयर ने 29 जनवरी 2025 को अपनी रिपोर्ट कंपनी को सौंप दी। रिपोर्ट के साथ प्राथमिकी की प्रमाणित प्रति और न्यायालय का आदेश भी उपलब्ध था। इसके बावजूद कंपनी ने लंबे समय तक दावे का अंतिम निस्तारण नहीं किया।

देरी को आयोग ने माना गंभीर सेवा दोष

आयोग ने सर्वेयर रिपोर्ट मिलने से निर्णय होने तक हुई 572 दिन की देरी को गंभीर सेवा दोष माना। बीमा कंपनी की ओर से प्राथमिकी दर्ज कराने में देरी, सूचना में विलंब और दस्तावेजों से संबंधित आपत्तियां उठाई गईं, लेकिन आयोग ने इन्हें स्वीकार नहीं किया।

आयोग ने सुप्रीम कोर्ट, राष्ट्रीय उपभोक्ता आयोग और राजस्थान राज्य उपभोक्ता आयोग के पूर्व निर्णयों का हवाला देते हुए कहा कि सर्वेयर की रिपोर्ट मिलने के बाद बीमा कंपनी को दावे पर समयबद्ध निर्णय लेना चाहिए। वैध दावे को अनावश्यक रूप से लंबित रखने की स्थिति में उपभोक्ता को ब्याज सहित राहत से वंचित नहीं किया जा सकता।

आयोग ने स्पष्ट किया कि बीमा कंपनी की जिम्मेदारी केवल बीमा राशि प्राप्त करने तक सीमित नहीं है, बल्कि वैध दावे का निष्पक्ष और समयबद्ध निस्तारण करना भी उसका दायित्व है। इस मामले में दावे को लंबे समय तक लंबित रखना सेवा में कमी और अनुचित व्यापार-प्रथा माना गया।

फैसले में 29 जनवरी 2025, यानी सर्वेयर रिपोर्ट प्राप्त होने की तारीख से ही 4.80 लाख रुपए पर ब्याज देने का आदेश दिया गया है। आयोग का यह फैसला बीमा उपभोक्ताओं के लिए महत्वपूर्ण माना जा रहा है।

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