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छापर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा:कथावाचक बोरायड़ा ने कहा कि भगवान भक्त का हृदय देखते हैं


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छापर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा:कथावाचक बोरायड़ा ने कहा कि भगवान भक्त का हृदय देखते हैं

छापर में सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा:कथावाचक बोरायड़ा ने कहा कि भगवान भक्त का हृदय देखते हैं

छापर : छापर के चेताखेड़ी मोहल्ले में स्थित श्री राधावल्लभ मंदिर में चल रही सात दिवसीय श्रीमद्भागवत कथा का समापन हो गया। व्यासपीठ पर विराजित कथावाचक पंडित नारायण प्रसाद बोरायड़ा ने श्रोताओं को सुदामा चरित्र, दत्तात्रेय के चौबीस गुरुओं, यदुवंशियों को श्राप और भगवान श्रीकृष्ण के स्वधाम गमन का प्रसंग सुनाया।

कथावाचक बोरायड़ा ने कहा कि भगवान भक्त का हृदय देखते हैं। कलियुग में भगवान को पाने का सबसे सरल साधन नाम संकीर्तन है। उन्होंने बताया कि भागवत सुनने से व्यक्ति का चरित्र निर्माण होता है और कलियुग के सभी कष्टों, दुखों और संतापों का नाश होता है।

उन्होंने चौबीस गुरुओं की कथा सुनाते हुए कहा कि व्यक्ति को जहां से भी शिक्षा मिले, उसे ग्रहण कर लेना चाहिए। महाराज श्री ने यह भी बताया कि भागवत कथा सात दिन सुनना सबसे अच्छा है, लेकिन एक दिन एक घंटा भी सुनने से भगवान भक्त को अपना वैकुंठ प्रदान कर देते हैं।

इस अवसर पर वैदिक मंत्रोच्चार के साथ श्रीमद्भागवत कथा का विधिवत पूजन किया गया। आयोजन समिति के रतनलाल पलोड़, विनोद चोटिया, विनोद अग्रवाल और श्रीभगवान बिहानी ने कथावाचक बोरायड़ा सहित सभी का दुपट्टा ओढ़ाकर सम्मान किया।

कथा समापन पर यजमान रतनलाल पलोड़, विनोद चोटिया, विनोद अग्रवाल और श्रीभगवान बिहानी ने अपनी पत्नियों के साथ कथा को सिर पर धारण कर गाजे-बाजे के साथ रघुनाथ मंदिर पहुंचाया। इस मौके पर जितेंद्र तंवर, मुकेश शर्मा, नितेश जाजू, नितेश शर्मा, डॉ. गिरधारी रतावा, दीपक जोशी सहित कई श्रद्धालु मौजूद रहे।

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