24 कोसी परिक्रमा: कोट बांध पर भव्य स्वागत के बाद शाकंभरी पहुंची ठाकुरजी की पालकी
किरोड़ी कुंड में स्नान-पूजन के बाद आगे बढ़ा श्रद्धालुओं का जत्था, शाकंभरी में किया रात्रि विश्राम; भाद्रपद अमावस्या पर सूर्यकुंड में मुख्य स्नान के साथ होगा समापन
उदयपुरवाटी : अरावली की वादियों में चल रही प्रसिद्ध मालकेतु बाबा की 24 कोसी परिक्रमा के दूसरे दिन साधु-संतों और पदयात्रियों का जत्था ठाकुरजी की पालकी के साथ शाकंभरी धाम पहुंचा। यहां ठाकुरजी की पालकी के साथ श्रद्धालुओं ने रात्रि विश्राम किया। इससे पहले कोट बांध के समीप स्थित प्राचीन शिव मंदिर में परिक्रमार्थियों और संत-महंतों का भव्य स्वागत किया गया। प्राचीन शिव मंदिर में डॉ. साध्वी योग श्री नाथ के नेतृत्व में सेवकों ने परिक्रमार्थियों एवं संत-महंतों का भेंट-पूजा और माल्यार्पण कर अभिनंदन किया। श्रद्धालुओं के स्वागत के दौरान धार्मिक माहौल बना रहा।
किरोड़ी कुंड में आस्था की डुबकी, ठाकुरजी की पूजा के बाद रवाना हुआ जत्था
लोहार्गल से रवाना होकर शनिवार रात किरोड़ी पहुंचे श्रद्धालुओं ने रविवार सुबह पवित्र किरोड़ी कुंड में स्नान किया। इसके बाद ठाकुरजी को स्नान कराकर विशेष पूजा-अर्चना की गई और महाआरती के बाद भोग लगाया गया। श्रद्धालुओं ने प्रसादी ग्रहण की और फिर ठाकुरजी की पालकी के साथ अगले पड़ाव के लिए रवाना हुए।

दोपहर बाद परिक्रमा का जत्था कोट बांध पहुंचा। यहां कुछ देर विश्राम और अल्पाहार के बाद श्रद्धालु शाम को शाकंभरी धाम के लिए रवाना हुए। शाकंभरी पहुंचने के बाद श्रद्धालुओं ने रात्रि विश्राम किया। वहीं, लोहार्गल में रविवार को दशमी के अवसर पर भी बड़ी संख्या में नए श्रद्धालुओं ने 24 कोसी परिक्रमा की शुरुआत की।
महाभारत काल से जुड़ी है लोहार्गल की धार्मिक मान्यता
24 कोसी परिक्रमा का समापन भाद्रपद अमावस्या पर लोहार्गल स्थित सूर्यकुंड में मुख्य स्नान के साथ होगा। धार्मिक मान्यताओं के अनुसार लोहार्गल का संबंध महाभारत काल से माना जाता है।
मान्यता है कि महाभारत युद्ध के बाद पांडवों को गोत्र-हत्या के पाप से मुक्ति के लिए तीर्थ यात्रा करने को कहा गया था। उन्हें बताया गया कि जिस तीर्थ में स्नान करने पर उनके लोहे के अस्त्र-शस्त्र गल जाएंगे, वहीं उन्हें पाप से मुक्ति मिलेगी। पांडवों ने यहां भाद्रपद की सोमवती अमावस्या पर स्नान किया और उनके अस्त्र-शस्त्र गल गए। इसी मान्यता के चलते भाद्रपद अमावस्या पर लोहार्गल के सूर्यकुंड में स्नान का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है।
परिक्रमा मार्ग में जगह-जगह भंडारे, सेवा में जुटे भामाशाह
परिक्रमा में शामिल हजारों श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए मार्ग में जगह-जगह निशुल्क भंडारे और सेवा शिविर लगाए गए हैं। विभिन्न समितियों और भामाशाहों की ओर से श्रद्धालुओं के लिए भोजन, प्रसादी और अन्य सुविधाओं की व्यवस्था की जा रही है। परिक्रमा मार्ग में श्रद्धालुओं की बढ़ती संख्या के साथ धार्मिक उत्साह भी चरम पर है। साधु-संतों, पदयात्रियों और श्रद्धालुओं के जयकारों से अरावली की वादियां भक्तिमय नजर आ रही हैं।
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