धोद नगरपालिका के वार्ड 11 और 18 हॉट सीट:दिग्गज नेता के सामने 3 प्रत्याशी, तो कहीं त्रिकोणीय मुकाबला; स्थानीय मुद्दों की लोगों में चर्चा
धोद नगरपालिका के वार्ड 11 और 18 हॉट सीट:दिग्गज नेता के सामने 3 प्रत्याशी, तो कहीं त्रिकोणीय मुकाबला; स्थानीय मुद्दों की लोगों में चर्चा
धोद : धोद नगरपालिका चुनाव के लिए 11 सितंबर को वोटिंग होनी है। ससे पहले धोद के 20 वार्डों में चुनावी हलचल तेज हो गई है। नामांकन के बाद प्रत्याशियों की तस्वीर साफ हो चुकी है। अब मुकाबला पूरी तरह जनसंपर्क, स्थानीय मुद्दों और व्यक्तिगत प्रभाव पर टिका है। स्थानीय ग्रामीण भी थड़ी, चौपाल पर चुनाव को लेकर चर्चा कर रहे है।
कई वार्डों में बीजेपी-कांग्रेस में सीधा मुकाबला
धोद के कई वार्डों में भाजपा और कांग्रेस के बीच सीधा मुकाबला है। कुछ वार्डों में निर्दलीय प्रत्याशियों ने मुकाबले को त्रिकोणीय या बहुकोणीय बना दिया है। खास बात यह है कि टिकट नहीं मिलने के बाद बागी होकर मैदान में उतरे प्रत्याशी भी कई वार्डों में अधिकृत प्रत्याशियों के लिए चुनौती बने हुए हैं।
वार्ड 11 और 18 सबसे ज्यादा चर्चा में
वार्ड 11 में कांग्रेस के दिग्गज नेता विनोद पुजारी चुनाव लड़ रहे हैं। भाजपा की ओर से पवन शर्मा उन्हें चुनौती दे रहे हैं। इनके अलावा निर्दलीय राजेंद्र प्रसाद शर्मा और विनोद कुमार शर्मा भी मैदान में हैं। दो निर्दलीयों के आने से मुकाबला और दिलचस्प हो गया है। यह वार्ड माकपा के राज्य सचिव किशन पारीक का भी है। ऐसे में यहां भाजपा और कांग्रेस के मुकाबले के साथ माकपा के स्थानीय प्रभाव और राजनीतिक समीकरणों पर भी सबकी नजर रहेगी।
सड़क निर्माण, गंदे पानी की निकासी और पानी समस्या का मुद्दा छाया
वार्ड में सड़क निर्माण, गंदे पानी की निकासी और पीने के पानी जैसी समस्याएं मुख्य चुनावी मुद्दे हैं। वार्ड 18 में पूर्व उपजिला प्रमुख शोभ सिंह के बेटे भाजपा के टिकट पर चुनाव लड़ रहे हैं। उनके सामने कांग्रेस के मांगूसिंह और निर्दलीय प्रताप सिंह हैं। तीन प्रत्याशियों के कारण यहां मुकाबला त्रिकोणीय हो गया है।
स्थानीय मुद्दे भी होंगे निर्णायक चु
नाव में राजनीतिक समीकरणों के साथ वार्डों की स्थानीय समस्याएं भी अहम भूमिका निभा सकती हैं। पेयजल, सड़क निर्माण, गंदे पानी की निकासी और सफाई जैसे मुद्दे मतदाताओं के बीच चर्चा में हैं। कई वार्डों में बागी और निर्दलीय प्रत्याशियों की मौजूदगी ने राजनीतिक दलों की चिंता बढ़ाई है। जहां सीधा मुकाबला है, वहां पार्टी संगठन और प्रत्याशी की व्यक्तिगत पकड़ की परीक्षा होगी, जबकि त्रिकोणीय मुकाबले वाले वार्डों में वोटों का बंटवारा परिणाम की दिशा तय कर सकता है।
पांच दिन का काउंटडाउन, बढ़ी चुनावी हलचल
मतदान में पांच दिन बाकी हैं। इसके बाद प्रत्याशियों के पास मतदाताओं तक पहुंचने के लिए चार, तीन, दो और फिर केवल एक दिन बचेगा। अंतिम दौर में घर-घर संपर्क, छोटी बैठकें, कार्यकर्ताओं को सक्रिय करना और बूथ स्तर की रणनीति सबसे अहम होगी। 11 सितंबर को मतदान के साथ इन सभी समीकरणों पर मतदाताओं का फैसला सामने आएगा।
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