[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

पौराणिक करकोटिका (किरोड़ी धाम) में संतों की परिक्रमा, प्रशासनिक उपेक्षा से जीर्ण-शीर्ण हाल में नागवंशी राजा द्वारा स्थापित प्राचीन मंदिर


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
उदयपुरवाटीझुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

पौराणिक करकोटिका (किरोड़ी धाम) में संतों की परिक्रमा, प्रशासनिक उपेक्षा से जीर्ण-शीर्ण हाल में नागवंशी राजा द्वारा स्थापित प्राचीन मंदिर

पौराणिक करकोटिका (किरोड़ी धाम) में संतों की परिक्रमा, प्रशासनिक उपेक्षा से जीर्ण-शीर्ण हाल में नागवंशी राजा द्वारा स्थापित प्राचीन मंदिर

उदयपुरवाटी : पौराणिक काल में ‘करकोटिका’ के नाम से प्रसिद्ध वर्तमान किरोड़ी धाम में इन दिनों भक्ति का माहौल है, जहाँ संत-महंतों द्वारा ठाकुर जी की पालकी के साथ भव्य परिक्रमा की जा रही है। ब्रह्म सरोवर की दूसरी धारा के अंतिम छोर पर स्थित यह धाम धार्मिक और ऐतिहासिक दृष्टि से अत्यंत महत्वपूर्ण है, किंतु प्रशासनिक उदासीनता और जानकारी के अभाव में यहाँ की पौराणिक धरोहरें जीर्ण-शीर्ण अवस्था में पहुँच चुकी हैं।

नागवंशी राजा करकोटक की तपोस्थली और नामकरण
धार्मिक ग्रंथों और मान्यताओं के अनुसार ब्रह्म सरोवर की पवित्र जल धारा के पास नागवंश के राजा करकोटक ने भगवान शिव की कठिन उपासना की थी। उन्हीं के नाम पर इस पावन स्थल का नाम ‘करकोटिका’ पड़ा। राजा करकोटक ने यहाँ एक पवित्र शिवलिंग की स्थापना की थी तथा हनुमान जी का मंदिर भी बनवाया था। ये दोनों प्राचीन मंदिर आज भी यहाँ विद्यमान हैं और इनमें नियमित रूप से पूजा-पाठ होती है, लेकिन देख-रेख के अभाव में इनका अस्तित्व संकट में है।

400 वर्ष पुराना ऐतिहासिक गिरधारी जी मंदिर
किरोड़ी धाम में अधिपति देवता के रूप में भगवान गिरधारी जी का ऐतिहासिक मंदिर स्थापित है। इस मंदिर में भगवान कृष्ण का सुंदर ‘गिरिधर मुद्रा’ रूप तथा साथ में श्रीराधा जी की प्रतिमा विराजमान है। इसका निर्माण विक्रम संवत 1684 (लगभग 400 वर्ष पूर्व), अक्षय तृतीया के दिन। उदयपुरवाटी के तत्कालीन शासक टोडरमल के मुसाहिब (वित्त मंत्री) मुंशा महाजन थे।

संतों का संघ कर रहा परिक्रमा
वर्तमान में धाम की पावन धरा पर ठाकुर जी की पालकी यात्रा निकाली जा रही है। इस परिक्रमा में क्षेत्र के अनेक संत-महंत और श्रद्धालु भाव-विभोर होकर भाग ले रहे हैं। इस दौरान परिक्रमा में शामिल में दयालदास महाराज, गणेश दास महाराज, बलवीर दास जेरठी, भोमदास महाराज, राजेश्वरी दास, राम आधार दास, विसमेश दास महाराज, गिरी दास महाराज, कमल दास महाराज, आनंद दास, सुरेंद्र दास, श्याम दास, कल्याण दास, राजू दास, श्याम दास (एडवोकेट), नवीन काजल, लोकेश, सियाग सहित अनेक भक्तगण मौजूद रहे।

स्थानीय निवासियों और श्रद्धालुओं का कहना है कि इतने समृद्ध पौराणिक इतिहास और आस्था का केंद्र होने के बावजूद किरोड़ी धाम को वह स्थान नहीं मिल सका जिसका यह हकदार है। यदि प्रशासन और पुरातत्व विभाग इस ओर ध्यान दे, तो इस प्राचीन तीर्थ स्थल का जीर्णोद्धार कर इसे एक प्रमुख पर्यटन और धार्मिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा सकता है।

Related Articles