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नरहड़ दरगाह में उमड़ा आस्था का सैलाब, चादर चढ़ाकर बांधी मन्नत की डोरी


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नरहड़ दरगाह में उमड़ा आस्था का सैलाब, चादर चढ़ाकर बांधी मन्नत की डोरी

भादवा मेले में देशभर से पहुंचे जायरीन, सूफियाना कलाम ने बांधा समां; कौमी एकता और भाईचारे का दिखा संदेश

नरहड़ : सूफी संत हजरत हाजिब शकरबार की दरगाह में आयोजित तीन दिवसीय भादवा मेला श्रद्धा, आस्था और कौमी एकता के रंग में रंगा नजर आया। भादवा की सप्तमी, अष्टमी और नवमी को आयोजित वार्षिक मेले में राजस्थान के साथ देश के विभिन्न राज्यों से बड़ी संख्या में जायरीन नरहड़ पहुंचे। मेले का समापन आज होगा।

दरगाह पहुंचने वाले श्रद्धालुओं ने मजार पर चादर चढ़ाकर मन्नतें मांगीं और मन्नत की डोरी बांधी। मन्नत पूरी होने पर नवजात बच्चों का झड़ूला गढ़ाने, जोड़ा चढ़ाने, सवामणी सहित विभिन्न धार्मिक रस्में पूरी करने के लिए भी श्रद्धालु दरगाह पहुंचे। जायरीनों की आस्था और उमंग से पूरे दिन दरगाह परिसर में रौनक बनी रही।

राजस्थान समेत कई राज्यों से पहुंचे जायरीन

भादवा मेले में राजस्थान के अलावा हरियाणा, पंजाब, गुजरात, महाराष्ट्र, दिल्ली, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश और बिहार सहित कई राज्यों से श्रद्धालु पहुंचे। दरगाह की खासियत यह है कि यहां विभिन्न धर्म और समुदायों के लोग अपनी मन्नतें लेकर पहुंचते हैं। यही विविधता नरहड़ दरगाह को कौमी एकता और भाईचारे की अनूठी मिसाल बनाती है।

सूफियाना कलाम ने बांधा समां

मेले के दौरान दरगाह परिसर में सूफियाना कलाम की प्रस्तुतियां हुईं। सूफी संगीत और जायरीनों की आस्था से माहौल आध्यात्मिक बना रहा। दरगाह फाउंडेशन की ओर से परिसर में कौमी एकता और सामाजिक सद्भाव का संदेश देने वाले पोस्टर और पेम्पलेट भी लगाए गए।

सुरक्षा और सुविधाओं के विशेष इंतजाम

मेले में आने वाले जायरीनों की सुविधा और सुरक्षा को लेकर प्रशासन एवं पुलिस की ओर से विशेष व्यवस्थाएं की गईं। श्रद्धालुओं के लिए मेडिकल कैंप लगाया गया, वहीं पुलिस टीम ने मेले की मॉनिटरिंग करते हुए सुरक्षा और अन्य व्यवस्थाओं को संभाला।

दरगाह की व्यवस्थाओं में खादिम हाजी अजीज पठान, सदर खलील बुडाना, सचिव करीम पीरजी, रफीक पीरजी, दरगाह फाउंडेशन के निदेशक एवं खादिम शाहिद-शमीम सहित अन्य पदाधिकारी जुटे रहे। वहीं सीआई अल्का बिश्नोई के नेतृत्व में पुलिस जाब्ता मेले के दौरान मुस्तैद रहा।

आस्था के साथ भाईचारे का संदेश

नरहड़ का भादवा मेला केवल धार्मिक आस्था का आयोजन नहीं, बल्कि विभिन्न धर्मों और क्षेत्रों से आने वाले लोगों के मिलन का अवसर भी बना। दरगाह परिसर में अलग-अलग समुदायों के लोगों की मौजूदगी के बीच श्रद्धा के साथ सामाजिक सद्भाव और कौमी एकता का संदेश मजबूत होता दिखाई दिया। तीन दिवसीय मेले ने एक बार फिर नरहड़ की गंगा-जमुनी तहजीब और आपसी भाईचारे की तस्वीर सामने रखी।

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