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प्रो. अनिल राय ने संभाला रूहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति का पदभार


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प्रो. अनिल राय ने संभाला रूहेलखंड विश्वविद्यालय के कुलपति का पदभार

शैक्षणिक गुणवत्ता, शोध और तकनीकी नवाचार पर रहेगा जोर; इससे पहले शेखावाटी विश्वविद्यालय के कुलपति रहे

सीकर : महात्मा ज्योतिबा फुले रूहेलखंड विश्वविद्यालय, बरेली के नवनियुक्त कुलपति प्रो. (डॉ.) अनिल कुमार राय ने सोमवार को पदभार ग्रहण किया। विश्वविद्यालय के कुलसचिव, वित्त नियंत्रक, अधिकारियों, शिक्षकों एवं कर्मचारियों ने उनका स्वागत कर नई जिम्मेदारी के लिए शुभकामनाएं दीं।

पदभार ग्रहण करने के बाद प्रो. राय ने कहा कि विश्वविद्यालय में शैक्षणिक वातावरण को और बेहतर बनाना उनकी प्राथमिकता होगी। उन्होंने शैक्षणिक गुणवत्ता में सुधार, शोध एवं तकनीकी नवाचार को बढ़ावा देने तथा विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण और रोजगारपरक शिक्षा उपलब्ध कराने पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों के हितों को प्राथमिकता देते हुए विश्वविद्यालय को नई ऊंचाइयों तक ले जाने के लिए सामूहिक प्रयास किए जाएंगे।

17 अगस्त को हुई थी नियुक्ति:

उत्तर प्रदेश की राज्यपाल एवं कुलाधिपति आनंदीबेन पटेल ने 17 अगस्त 2026 को प्रो. अनिल राय को तीन वर्ष के लिए रूहेलखंड विश्वविद्यालय का कुलपति नियुक्त किया था।

शेखावाटी विश्वविद्यालय में कई नवाचार किए:

प्रो. राय इससे पहले पंडित दीनदयाल उपाध्याय शेखावाटी विश्वविद्यालय, सीकर के कुलपति रहे। उनके कार्यकाल में शोध, नवाचार, डिजिटल तकनीक और विद्यार्थी सुविधाओं के क्षेत्र में कई पहल हुईं। भारतीय ज्ञान परंपरा केंद्र, पंडित दीनदयाल उपाध्याय शोध केंद्र, हाईटेक विज्ञान एवं मीडिया लैब, रेडियो शेखावाटी 91.2 एफएम, स्वचालित प्रश्नपत्र प्रणाली, ऑनलाइन प्रोविजनल डिग्री व माइग्रेशन सुविधा तथा वाई-फाई युक्त परिसर जैसी सुविधाएं शुरू की गईं।

प्रो. राय के कार्यकाल में छात्रावास, स्वास्थ्य केंद्र, अतिथि गृह, कैंटीन और ज्ञान उद्यान जैसी सुविधाओं का भी विकास हुआ। नई शिक्षा नीति के अनुरूप रोजगारपरक एवं आधुनिक पाठ्यक्रम शुरू करने के साथ शोध गतिविधियों को भी विस्तार दिया गया।

प्रो. अनिल राय उच्च शिक्षा, शोध, मीडिया और विश्वविद्यालय प्रशासन का व्यापक अनुभव रखते हैं। वे महात्मा गांधी अंतरराष्ट्रीय हिंदी विश्वविद्यालय, वर्धा में जनसंचार के वरिष्ठ प्रोफेसर रहे हैं। इसके अलावा विभिन्न विश्वविद्यालयों में कार्यकारी कुलपति, प्रतिकुलपति और विभागाध्यक्ष जैसे महत्वपूर्ण दायित्व संभाल चुके हैं।

शिक्षा और पत्रकारिता के क्षेत्र में योगदान के लिए उन्हें कई सम्मान मिल चुके हैं। वे 21 पुस्तकों के लेखक, संपादक एवं संचयक हैं तथा दो विषयों में पीएचडी की उपाधि प्राप्त कर चुके हैं।

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