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रास्ता नहीं तो वोट नहीं : नीमकाथाना के वार्ड 5 में रास्ता नहीं होने पर प्रदर्शन:निकाय चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी दी, बोले-लंबे समय से कर रहे इंतजार


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रास्ता नहीं तो वोट नहीं : नीमकाथाना के वार्ड 5 में रास्ता नहीं होने पर प्रदर्शन:निकाय चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी दी, बोले-लंबे समय से कर रहे इंतजार

रास्ता नहीं तो वोट नहीं : नीमकाथाना के वार्ड 5 में रास्ता नहीं होने पर प्रदर्शन:निकाय चुनाव के बहिष्कार की चेतावनी दी, बोले-लंबे समय से कर रहे इंतजार

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : नैना शेखावत

नीमकाथाना : सरकारें बदलती रहीं, जनप्रतिनिधि बदलते रहे और प्रशासनिक अधिकारी आते-जाते रहे, मगर नीमकाथाना की आगवाड़ी की नयावासी और गंगासागर की ढाणी के ग्रामीणों की किस्मत नहीं बदली। आजादी के 79 साल बाद भी ग्रामीण एक अदद रास्ते के लिए सरकारी सिस्टम के सामने गुहार लगा रहे हैं।

इस बार ग्रामीणों का गुस्सा निकाय चुनाव में सामने आया है। वार्ड नंबर 5 में शामिल किए गए दोनों ढाणियों के ग्रामीणों ने कहा है- रास्ता नहीं तो वोट नहीं। ग्रामीणों का आरोप है कि नगरपालिका क्षेत्र में शामिल तो कर दिया, लेकिन मूलभूत सुविधा उपलब्ध करवाने की जिम्मेदारी सिस्टम भूल गया।

फाइलों में विकास, जमीन पर रास्ता तक नहीं

ग्रामीणों का कहना है कि रास्ते की समस्या कोई नई नहीं है। वर्षों से अधिकारी और जनप्रतिनिधि इस समस्या से अवगत हैं। कई बार शिकायतें हुईं, गुहार लगाई गई, आश्वासन मिले, लेकिन समाधान के नाम पर सिर्फ इंतजार मिला। सवाल यह है कि जब ग्रामीणों को नगरपालिका क्षेत्र में शामिल किया गया है तो क्या उन्हें सड़क और रास्ते जैसी मूलभूत सुविधा पाने का अधिकार नहीं है? आखिर सरकारी सिस्टम को एक रास्ता बनाने के लिए कितने साल और चाहिए।

बीमार को अस्पताल ले जाना भी बन जाता है चुनौती

ग्रामीण सांवलराम सैनी ने बताया कि आजादी के बाद से रास्ते की समस्या बनी हुई है। कई बार अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को बताया, लेकिन समस्या का स्थायी समाधान नहीं हुआ। उन्होंने कहा कि बीमार और गर्भवती महिलाओं को अस्पताल ले जाने के दौरान परिवार की सांसें अटक जाती हैं। बच्चों के रिश्ते करवाने में भी परेशानी होती है। रास्ता नहीं होने के कारण गांव के लोगों को रोजाना अपमान और परेशानी झेलनी पड़ती है।

कॉलेज छात्रा बोली- रास्ता नहीं, इसलिए लेने आना पड़ता है

बीएड की छात्रा संगीता ने बताया कि कॉलेज जाने में उसे परेशानी होती है। कॉलेज से लौटने के लिए कई बार किसी को लेने के लिए बुलाना पड़ता है। यह सिर्फ रास्ते की समस्या नहीं, बल्कि उन विद्यार्थियों के भविष्य का सवाल है जो बेहतर शिक्षा के लिए रोज घर से निकलते हैं। संगीता ने कहा कि चुनाव के समय नेता घर-घर पहुंचकर वोट मांगते हैं, लेकिन चुनाव जीतने के बाद उनकी मूलभूत समस्याएं नजर नहीं आतीं। अब

ग्रामीण भी पूछ रहे हैं कि जब वर्षों से रास्ता नहीं दिया गया तो वोट किस विकास के नाम पर मांगा जा रहा है। संगीता ने कहा कि विरोध सरकार के खिलाफ नहीं हैं, बल्कि उस सरकारी व्यवस्था के खिलाफ हैं जो उनकी पीड़ा सुनने के बावजूद समाधान नहीं कर पाई। ग्रामीणों ने चेतावनी दी कि निकाय चुनाव से पहले रास्ते की समस्या का समाधान नहीं हुआ तो मतदान का बहिष्कार किया जाएगा।

ये रहे मौजूद

इस दौरान सावलराम सैनी, अशोक कुमार सैनी, पालाराम सैनी, हरनाथ सैनी, गिरधारी लाल सैनी, सत्यनारायण सैनी, सिंबूदयाल सैनी, रामवतार सैनी, संजय सैनी, साहिल सैनी सहित बड़ी संख्या में ग्रामीण मौजूद रहे।

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