फतेहपुर के सियासी समीकरण : मधु-महरिया का और मेला’: शहर की सियासत में हलचल, समीकरणों में लगी सेंध?
ज़मीनी पैठ से बदला सियासी पारा, विरोधियों के खेमे में खलबली..?
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : आबिद खान
फतेहपुर : सभापति चुनाव की दहलीज़ पर दस्तक देते ही सड़कों पर उतरा मोटरसाइकिलों का यह लंबा काफिला और ‘भारत माता’ के नारों से थर्राता शहर का हर कोना, महज़ एक चुनावी जुलूस नहीं है। यह शहर की राजनीति के सीने पर सीधे-सीधे उस ‘मधु-महरिया’ जोड़ी की दस्तक है, जिसने आते ही स्थापित सियासतदारों के दफ्तरों में सन्नाटा पसार दिया है।
राजनीतिक गलियारों की बंद बैठकों में भले ही अब तक इस गठजोड़ को ‘अस्थायी’ या ‘बेअसर’ आंकने की कोशिशें की जा रही थीं, लेकिन ज़मीन पर उमड़े इस हुजूम ने तमाम कयासों और पुराने गणित को एक झटके में ध्वस्त कर दिया है। आमजन में चर्चा हैं कि हवा का यह अचानक बदला रुख और दोनों की ज़मीनी पैठ, शहर के पुराने क्षत्रपों के लिए किसी सीधी चेतावनी से कम नहीं दिख रही।

सड़कों पर दिखी इस आक्रामक लामबंदी ने चुनाव की बिसात पर ऐसा पासा फेंका है कि विरोधियों के खेमे में रणनीति से ज्यादा खलबली, और असमंजस का माहौल तैरने लगा है। हालाँकि, शक्ति प्रदर्शन का यह उफान आने वाली तारीखों में वोटों की पेटी तक कितना टिक पाता है और क्या वाकई सत्ता की चाबी तक पहुँच पाता है, यह तो वक्त की गर्त में है-लेकिन इतना तय है कि मधु, महरिया के समीकरण ने विरोधियों की रातों की नींद और माथे की सिलवटें ज़रूर बढ़ा दी हैं।
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