सालासर हाईवे पर गोवंश को गाड़ी से बांधकर घसीटा, लाखों का टोल वसूलने वाली कंपनी की सुविधाएं शून्य
एनएचएआई का संवेदनहीन चेहरा: सावन में नंदी की पूजा, एनएचएआई ने हाईवे पर बेदर्दी से घसीटा! क्या गोभक्त एनएचएआई पर करवाएंगे एफआईआर?
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : आबिद खान, दाडून्दा
फतेहपुर : एक ओर जहां पूरे देश में गोवंश संरक्षण की बड़ी-बड़ी बातें हो रही हैं, सरकारें भारी-भरकम अनुदान बांट रही हैं और पवित्र सावन महीने में नंदी की पूजा-अर्चना की जा रही है, वहीं दूसरी ओर सीकर जिले के फतेहपुर में नेशनल हाईवे-58 पर राष्ट्रीय राजमार्ग प्राधिकरण (एनएचएआई ) और टोल कंपनी का बेहद शर्मनाक व संवेदनहीन चेहरा उजागर हुआ है।
सालासर मार्ग पर जिस गोवंश की सुरक्षा और सम्मान के लंबे-चौड़े दावे किए जाते हैं, उसे ही एनएचएआई की गाड़ी से बांधकर बीच सड़क पर घसीटा गया। इस पूरी घटना ने यह साफ कर दिया है कि आम जनता से रोजाना लाखों रुपये का टोल वसूलने वाली कंपनियों के पास न तो कोई न्यूनतम मानवीय संवेदना बची है और न ही बुनियादी सुविधाएं।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, गुरुवार देर रात नेशनल हाईवे-58 सालासर रोड पर एक अज्ञात बीट कार की भीषण टक्कर से एक नंदी की मौके पर ही मौत हो गई। दुर्घटना के बाद सड़क को साफ करने और मृतक नंदी को ससम्मान हटाने के लिए क्रेन या जेसीबी मशीन का इंतजाम करने के बजाय एनएचएआई के कर्मचारियों ने शर्मनाक तरीका अपनाया। एनएचएआई में तैनात कैंपर गाड़ी से नंदी के शव को बेल्ट पट्टे से बांध दिया गया और उसे कई मीटर दूर तक बेदर्दी से डामर की सड़क पर घसीटा गया। जहां गोवंश बार बार छिलता रहा इस अमानवीय कृत्य का पूरा वीडियो जनमानस शेखावाटी के पास सुरक्षित मौजूद है।


इस घिनौनी हरकत को देखकर स्थानीय नागरिक आक्रोशित हो उठे। बाबू लाल सरदारपुरा, हंसराज कड़वासरा और नवरत्न नेहरा हरसावा सहित उनकी पूरी टीम ने मौके पर ही इस बर्बरता का कड़ा विरोध किया। और वीडियो बनाया। स्थिति बिगड़ती देख उन्होंने तुरंत स्थानीय पुलिस और एनएचएआई के वरिष्ठ अधिकारियों को इसकी सूचना दी, जिसके बाद पुलिस टीम मौके पर पहुंची।
हर दिन यात्रियों और वाहन चालकों की जेब से लाखों-करोड़ों रुपये का टोल टैक्स वसूलने वाली इस कंपनी की हकीकत यह है कि जब आपात स्थिति में एक जेसीबी या क्रेन की जरूरत पड़ी, तो इनके पास केवल बहानों की लंबी फेहरिस्त थी। गोवंश के प्रति अपनी जवाबदेही को ठेंगा दिखाने वाली इस कंपनी की पोल खुद इसके कर्मचारियों के बयानों से खुल गई।
मामले पर संबंधित पक्षों के सीधे बयान
“मैं मौके पर टीम के साथ पहुंचा, मेरे पहुंचने से पहले नंदी को घसीटते हुए नहीं देखा गया। एनएचएआई वालों को सूचना देकर मृतक नंदी का दाह संस्कार करवा जा रहा हैं मैं मौके पर मौजूद हूं। – नेमीचंद हेडकोंस्टेबल 112 कोतवाली थाना फतेहपुर
सर ऐसा कुछ नहीं हुआ। पुलिया के पास सांड मरा था, जो एक्सीडेंट में मरा था। हमारे पास जेसीबी का ड्राइवर नहीं था, इसलिए हमने उसको एनएचएआई की गाड़ी के बांधकर 10 से 15 मीटर ही घसीटा था। ज्यादा नहीं घसीटा तब दो-पांच बंदों ने विरोध किया तो हमने रोक दिया। जेसीबी का ऑपरेटर बीमार था, इसलिए यह सब हुआ।” – नितेश कुमार (पैरामेडिकल नर्सिंग स्टाफ, सालासर टोल प्लाजा एनएचएआई 58):
“मैंने फोन आते ही जेसीबी भेज दी थी। उन्होंने नंदी को घसीटा क्यों, मैं इस बात का पता करवाता हूं। यह तो बिल्कुल गलत बात है, मैं आपको वापस कॉल करता हूं।” (थोड़ी देर बाद) मेरी बात हो हुई हैं थोड़ा सा साइड में किया था ज्यादा नहीं घसीटा लोगो ने विरोध किया तो रोक दिया गया अभी जेसीबी गई हैं। – सुशील कुमार (मैनेजर, टोल प्लाजा एनएचएआई 58)
आमजन में उठते सवाल
सावन के महीने में जहां नंदी की पूजा की जाती है, वहीं सड़क पर घसीटकर किए गए इस घिनौने अपमान पर तथाकथित गोभक्त और संगठन मौन क्यों हैं-क्या वे टोल कंपनी के जिम्मेदार अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करवाकर उन्हें जेल भिजवाएंगे या उनका आक्रोश सिर्फ भाषणों और राजनीति तक ही सीमित रहेगा?
हर दिन वाहन चालकों की जेब से टोल राशि लेने वाली एनएचएआई कंपनी के पास क्या एक क्रेन तक का इंतजाम नहीं था, जो बेजुबान गोवंश के शव को गाड़ी से बांधकर सड़क पर घसीटा गया-
क्या प्रशासन इस हैवानियत पर टोल प्रबंधन के खिलाफ आपराधिक मामला (FIR) दर्ज करने की हिम्मत दिखाएगा?
’जेसीबी ऑपरेटर बीमार था’ जैसी शर्मनाक और गैर-जिम्मेदाराना दलील देकर पल्ला झाड़ने वाले टोल कर्मचारियों को बचाने का खेल कब तक चलेगा-क्या स्थानीय गोभक्त सड़क पर उतरकर इस बर्बरता का हिसाब मांगेंगे? ये देखना होगा
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