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“राष्ट्रीय शिक्षा नीति कार्यशाला में गूंजा संदेश – विद्यालय बने राष्ट्रनिर्माण की प्रयोगशाला”


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“राष्ट्रीय शिक्षा नीति कार्यशाला में गूंजा संदेश – विद्यालय बने राष्ट्रनिर्माण की प्रयोगशाला”

विद्यालय शिक्षक की प्रयोगशाला- गुप्ता

सीकर : सम्राट पृथ्वीराज चौहान राजकीय महाविद्यालय, अजमेर में अखिल भारतीय राष्ट्रीय शैक्षिक महासंघ राजस्थान (विद्यालय शिक्षा) के तत्वावधान में राष्ट्रीय शिक्षा नीति–2020 के अंतर्गत शैक्षिक उन्नयन, नवाचार एवं कौशल विकास विषय पर आयोजित प्रकोष्ठ एवं आयाम कार्यशाला में शिक्षा को राष्ट्रनिर्माण का सबसे प्रभावी माध्यम बनाने का आह्वान किया गया। कार्यशाला में प्रदेशभर से आए शिक्षकों ने उत्साहपूर्वक भाग लिया।

वरिष्ठ प्रदेश उपाध्यक्ष संपत सिंह ने बताया कि महासंघ के अखिल भारतीय अध्यक्ष नारायण लाल गुप्ता ने कहा कि देश को कमजोर करने के लिए लगातार नए-नए नैरेटिव गढ़े जा रहे हैं, ऐसे समय में शिक्षकों की भूमिका और अधिक महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्होंने कहा कि शिक्षक केवल वेतन-भत्तों तक सीमित कर्मचारी नहीं, बल्कि समाज परिवर्तन के सशक्त निर्माता हैं। विद्यालय को “शिक्षक की प्रयोगशाला” बताते हुए उन्होंने शिक्षकों से अपने विद्यालय को आदर्श बनाने का संकल्प लेने का आह्वान किया।

द्वितीय सत्र में अखिल भारतीय महामंत्री महेंद्र कपूर ने भारतीयता आधारित शिक्षा की आवश्यकता पर बल देते हुए कहा कि शिक्षा संबंधी सभी निर्णय भारतीय संस्कृति, परंपरा और राष्ट्रीय हितों को केंद्र में रखकर होने चाहिए। उन्होंने प्रेरणादायी शिक्षकों की पहचान कर उनका सम्मान करने को शिक्षा जगत की महत्वपूर्ण जिम्मेदारी बताया।

तृतीय सत्र में माध्यमिक शिक्षा बोर्ड राजस्थान के अध्यक्ष हनुमान सिंह राठौड़ ने कहा कि वास्तविक स्वतंत्रता अपनी शिक्षा, अपनी भाषा और अपने मूल्यों से प्राप्त होती है। उन्होंने “हमारा विद्यालय, हमारा तीर्थ” सूत्र को शिक्षा जगत का मार्गदर्शक बताते हुए विद्यार्थियों में भारत के सामर्थ्य, गौरवशाली इतिहास और सांस्कृतिक चेतना के संस्कार विकसित करने पर जोर दिया।

कार्यक्रम की अध्यक्षता करते हुए प्रदेशाध्यक्ष रमेश चंद्र पुष्करणा ने सभी प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया और कहा कि कार्यशाला में प्राप्त अनुभवों को विद्यालयों में क्रियान्वित कर शिक्षा में सकारात्मक परिवर्तन की शुरुआत स्वयं से करनी होगी।

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