उर्स-ए-आला हज़रत सिर्फ़ ईसाल-ए-सवाब का दिन नहीं, बल्कि अपने ईमान, अपनी फ़िक्र और अपने मस्लकी उसूलों को ताज़ा करने का दिन भी है
उर्स-ए-आला हज़रत सिर्फ़ ईसाल-ए-सवाब का दिन नहीं, बल्कि अपने ईमान, अपनी फ़िक्र और अपने मस्लकी उसूलों को ताज़ा करने का दिन भी है
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
चूरू : जिला मुख्यालय पर सैनिक बस्ती स्थित मदरसा सैयदना तौकीरुल उलूम में मुफ्ती-ए-आजम हिंद आला हजरत अहमद रज्जा रहमतुल्लाह अलेही का उर्स मुबारक मनाया गया। जिसकी सदारत मदरसा के सदर शिक्षाविद हाजी उस्मान गनी दिलावर खानी ने की मदरसा के मुफ्ती गुलशेर मोहम्मद रज्जा ने कहां कि आपका उर्स -ए -मुबारक बरेली शहर उत्तर प्रदेश मैं आपकी खानकाह पर बड़े ही शान- ओ- शौकत और अकीदत के साथ मनाया जाता है।
अगर हम वाक़ई आला हज़रत से मोहब्बत करते हैं, तो सिर्फ़ उनका उर्स मनाना काफ़ी नहीं, बल्कि -उनकी तालीमात को सीखें और फैलाएँ। बद मज़हब, गुमराह, बिद्दत, खुराफाती कामों से दूर रहे। दीन-ओ-सुन्नत की ख़िदमत को अपनी ज़िन्दगी का मिशन बनाएँ। अल्लाह तआला हमें अक़ाइद-ए-अहले सुन्नत, दिफ़ा-ए-अहले सुन्नत और दीन-ओ-सुन्नत की ख़िदमत पर आख़िरी साँस तक क़ायम रखे। आमीन। आला हज़रत से आम तौर पर इमाम अहमद रज़ा ख़ान रहमतुल्लाहि अलैह की मुराद होती है।
“आला हज़रत” क्यों कहा जाता है? उनका असली नाम अहमद रज़ा ख़ान था। “आला” का अर्थ है बुलंद, श्रेष्ठ और ऊँचा, जबकि “हज़रत” सम्मान के लिए बोला जाता है। उनके इल्मी मक़ाम, तक़वा, फ़िक़्ह, हदीस और दीनी ख़िदमात की वजह से उलमा और लोगों ने अदब व मोहब्बत से उन्हें “आला हज़रत” कहना शुरू किया, और यही नाम मशहूर हो गया।
उनकी मशहूर किताबों में फ़तावा रज़विया और कंजुल ईमान शामिल हैं। दुआ में हाफ़िज़ अब्बास, मौलाना शहाबुद्दीन,शिक्षाविद् मोहिउद्दीन, मौलाना अहमद अली, हाफिज कुर्बान अली, एवं मदरसे के छात्रों ने हिस्सा लिया दरूदो सलाम पढ़ा गया। और अमन चैन शांति सौहार्द की दुआएं की गई।
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