बुहाना नगरपालिका में ठेकेदारी प्रथा खत्म करने की मांग:कलेक्टर से मिले वाल्मीकि समाज के लोग, बोले-सफाई कर्मचारियों की भर्ती हो
बुहाना नगरपालिका में ठेकेदारी प्रथा खत्म करने की मांग:कलेक्टर से मिले वाल्मीकि समाज के लोग, बोले-सफाई कर्मचारियों की भर्ती हो
झुंझुनूं : बुहाना नगरपालिका में लंबे समय से सफाई व्यवस्था ठेकेदारी प्रथा के भरोसे चल रही है। वाल्मीकि समाज का आरोप है कि इससे स्थानीय युवाओं का आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है। कस्बे में एक भी स्थायी सफाई कर्मचारी नहीं है और युवाओं को नियमित भर्ती का इंतजार है। इन्हीं मांगों को लेकर समाज के प्रतिनिधियों ने कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपकर नए पद स्वीकृत करने, भर्ती प्रक्रिया शुरू करने और ठेकेदारी प्रथा खत्म करने की मांग की।
‘ठेकेदारी प्रथा से मेहनतकश युवाओं का हो रहा शोषण’
पूर्व सरपंच हरिकृष्ण यादव ने कहा कि बुहाना नगरपालिका में लंबे समय से सफाई व्यवस्था ठेकेदारी प्रथा के भरोसे चल रही है। इससे वाल्मीकि समाज के मेहनतकश युवाओं का आर्थिक और मानसिक शोषण हो रहा है। उन्होंने कहा कि जब प्रदेश के अन्य निकायों में सफाई कर्मचारियों की नियमित भर्ती हो रही है, तो बुहाना को इससे वंचित रखना क्षेत्र के साथ अन्याय है। उन्होंने राज्य सरकार से मांग की कि वाल्मीकि समाज के हितों को ध्यान में रखते हुए जल्द नए पद स्वीकृत कर भर्ती निकाली जाए, ताकि स्थानीय युवाओं को उनका हक और स्थायी रोजगार मिल सके।
‘न पूरा मानदेय मिलता, न सामाजिक सुरक्षा’
वाल्मीकि समाज के प्रतिनिधि राजकुमार ने कहा कि बुहाना कस्बे में वर्तमान में एक भी स्थायी सफाई कर्मचारी नियुक्त नहीं है। सफाई का काम ठेके पर कराया जा रहा है, जहां कर्मचारियों को न समय पर पूरा मानदेय मिलता है और न ही किसी तरह की सामाजिक सुरक्षा मिलती है। उन्होंने कहा कि समाज के युवा लंबे समय से सरकारी भर्ती का इंतजार कर रहे हैं। जब तक ठेकेदारी प्रथा खत्म कर भर्ती प्रक्रिया शुरू नहीं होती, तब तक समाज अपने अधिकारों की लड़ाई जारी रखेगा।
जल्द निर्णय लेने की लगाई गुहार
पूर्व सरपंच हरिकृष्ण यादव, प्रतिनिधि राजकुमार और वाल्मीकि समाज के अन्य प्रतिनिधियों ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजकर मामले में जल्द सकारात्मक निर्णय लेने की मांग की।
ये रहे मौजूद
ज्ञापन सौंपने के दौरान मनीषा कुमारी, आची, अलका, जमना, संजू, विजय कुमार, कृष्णा, मनीषा, अतिता, सुमन, सत्यप्रकाश, लखन, कन्हैया लाल, सुमेर सिंह, संतोष कुमार, राजकुमार, मंटू सहित बड़ी संख्या में समाज के लोग मौजूद रहे।
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