झुंझुनूं में प्राइवेट स्कूल बंद रहे, कलेक्ट्रेट पर नारेबाजी:स्कूल संचालक बोले- सरकार ने मांगें नहीं मानी तो करेंगे उग्र आंदोलन
झुंझुनूं में प्राइवेट स्कूल बंद रहे, कलेक्ट्रेट पर नारेबाजी:स्कूल संचालक बोले- सरकार ने मांगें नहीं मानी तो करेंगे उग्र आंदोलन
झुंझुनूं : झुंझुनूं शहर में प्राइवेट स्कूल संचालकों, शिक्षकों और कर्मचारियों ने मंगलवार को अपनी विभिन्न मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ शक्ति प्रदर्शन किया। प्राइवेट स्कूल संघर्ष समिति के बैनर तले महारैली निकाली गई, जिसमें जिलेभर से बड़ी संख्या में लोग शामिल हुए। फिर गांधी चौक से जिला कलेक्ट्रेट तक मार्च निकालकर सरकार की नीतियों के खिलाफ जोरदार प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चेतावनी दी कि यदि उनकी मांगों पर जल्द सकारात्मक निर्णय नहीं लिया गया तो आंदोलन को पूरे प्रदेश में और तेज किया जाएगा।
सुबह से ही गांधी चौक पर जुटने लगे प्राइवेट स्कूल संचालक
सुबह से ही जिले के विभिन्न निजी शिक्षण संस्थानों से शिक्षक, संचालक और कर्मचारी गांधी चौक पर जुटने लगे। देखते ही देखते चौक लोगों से भर गया। हाथों में बैनर और तख्तियां लिए प्रदर्शनकारियों ने सरकार और प्रशासन के खिलाफ नारे लगाए। इसके बाद विशाल रैली शहर के प्रमुख मार्गों से होती हुई जिला कलेक्ट्रेट पहुंची। रैली के दौरान मुख्य सड़कें शिक्षकों के नारों से गूंजती रहीं, जबकि कलेक्ट्रेट परिसर भी प्रदर्शनकारियों से पूरी तरह भर गया।

‘निजी स्कूलों पर बढ़ रहा अनावश्यक दबाव’
कलेक्ट्रेट परिसर में हुई सभा में वक्ताओं ने कहा कि निजी शिक्षण संस्थानों पर लगातार ऐसे नियम लागू किए जा रहे हैं, जिनसे स्कूलों का संचालन कठिन होता जा रहा है। उनका कहना था कि निजी स्कूल शिक्षा की गुणवत्ता और सुविधाओं के मामले में महत्वपूर्ण योगदान दे रहे हैं, लेकिन प्रशासन का रवैया सहयोगात्मक होने के बजाय दबाव बनाने वाला है।
झुंझुनूं ब्लॉक अध्यक्ष अमित कुमार ने कहा कि प्रशासनिक अधिकारी निजी स्कूलों की समस्याओं का समाधान करने के बजाय अनावश्यक कार्रवाई और दबाव बनाने में लगे हैं। उन्होंने परिवहन विभाग की व्यवस्था पर सवाल उठाते हुए कहा कि वाहनों की फिटनेस के लिए स्कूल संचालकों को दूसरे शहरों के चक्कर लगाने पड़ते हैं, जिससे समय और आर्थिक नुकसान दोनों होता है।
निजी स्कूल संचालक सुरेंद्र अहलावत ने कहा कि स्कूलों पर अव्यावहारिक नियम थोपे जा रहे हैं। यदि सरकार ने समय रहते समाधान नहीं किया तो जिले से लेकर प्रदेश स्तर तक और बड़ा आंदोलन किया जाएगा।
इंजीनियर परवीन कृष्णिया ने कहा कि यदि मांगों पर लिखित आश्वासन नहीं मिला तो आंदोलन पूरे राजस्थान में उग्र रूप लेगा और शिक्षा मंत्री के खिलाफ भी बड़ा अभियान चलाया जाएगा। विकास शर्मा ने कहा कि शिक्षकों का सड़क पर उतरना शिक्षा व्यवस्था के लिए गंभीर संकेत है। उनका कहना था कि निजी स्कूल केवल व्यावहारिक और न्यायसंगत व्यवस्था की मांग कर रहे हैं।

मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम सौंपा ज्ञापन
प्रदर्शन के बाद संघर्ष समिति के प्रतिनिधिमंडल ने जिला कलेक्टर के माध्यम से मुख्यमंत्री और शिक्षा मंत्री के नाम छह सूत्रीय ज्ञापन सौंपा। इसमें प्रमुख रूप से शाला संबल जांच प्रक्रिया समाप्त करने, आरटीई के लंबित भुगतान जारी करने, यूनिट कॉस्ट में हर वर्ष 10 प्रतिशत वृद्धि, बिना फीस टीसी जारी करने के आदेश निरस्त करने, परिवहन विभाग के नियम सरल बनाने, प्री-प्राइमरी कक्षाओं का बकाया भुगतान जारी करने तथा केवल 30 वर्ष से अधिक पुराने स्कूल भवनों के लिए ही भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र अनिवार्य करने की मांग की गई।
संघर्ष समिति की प्रमुख मांगें
- शाला संबल जांच के आदेश तत्काल वापस लिए जाएं।
- आरटीई का लंबित भुगतान समयबद्ध तरीके से जारी हो तथा यूनिट कॉस्ट में हर वर्ष 10% वृद्धि की जाए।
- पूर्ण शुल्क जमा किए बिना टीसी जारी करने का आदेश निरस्त किया जाए।
- स्कूल वाहनों के फिटनेस नियम सरल हों और शुल्क 1000 रुपए निर्धारित किया जाए।
- प्री-प्राइमरी कक्षाओं का लंबित भुगतान जल्द जारी किया जाए।
- केवल 30 वर्ष से अधिक पुराने विद्यालय भवनों के लिए ही भवन सुरक्षा प्रमाण-पत्र अनिवार्य किया जाए और इसका शुल्क 500 रुपए रखा जाए।

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