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झमाझम बारिश से राहत के साथ आफत : उदयपुरवाटी में सड़कें बनीं तालाब, 8 साल से नालों की सफाई न होने से घरों में घुसा गंदा पानी


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झमाझम बारिश से राहत के साथ आफत : उदयपुरवाटी में सड़कें बनीं तालाब, 8 साल से नालों की सफाई न होने से घरों में घुसा गंदा पानी

सरजू सागर कोट बांध में बढ़ा जलस्तर; पालिका प्रशासन की अनदेखी से कस्बे में नारकीय हालात, कर्मचारियों की मनमानी से आमजन बेहाल

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : कैलाश बबेरवाल

उदयपुरवाटी : कस्बे सहित आसपास के क्षेत्रों में मंगलवार को हुई झमाझम बारिश ने जहां लोगों को भीषण गर्मी और उमस से बड़ी राहत दी, वहीं दूसरी ओर नगर पालिका प्रशासन की घोर लापरवाही की पोल खोल कर रख दी। बारिश के कारण कस्बे की मुख्य सड़कों और कॉलोनियों में एक से डेढ़ फीट तक गंदा पानी भर गया, जिससे जनजीवन पूरी तरह अस्त-व्यस्त हो गया। मंगलवार दोपहर तक तेज धूप के बाद अचानक मौसम का मिजाज बदला।

दोपहर बाद शुरू हुई हल्की बारिश शाम तक कहीं तेज तो कहीं मूसलाधार रूप में जारी रही। ठंडी हवाओं के साथ हुई इस बारिश से लोगों को गर्मी से निजात मिली।

इस बारिश से निकटवर्ती नांगल ग्राम पंचायत के राजस्व गांव कोट में स्थित सरजू सागर बांध में लगभग आधा फीट पानी की आवक हुई है। उल्लेखनीय है कि बांध में साढ़े 25 फीट पानी आने पर चादर चलने लगेगी।

सड़कों पर लबालब पानी, घरों में घुसा गन्दा नाले का मलबा
बारिश से मौसम तो सुहावना हुआ, लेकिन जल निकासी की माकूल व्यवस्था न होने से कस्बे के कई इलाकों में जलभराव हो गया। जिनमें शाकंभरी गेट, बस स्टैंड, पुरानी सब्जी मंडी, घाट नाला, जांगिड़ कॉलोनी तथा झुंझुनूं स्टेट हाईवे पर नई सब्जी मंडी से चुंगी नंबर 3 तक सड़कें जलमग्न हो गईं। स्टेट हाईवे पर सड़क किनारे बसे लोगों के घरों में नालों का गंदा पानी घुस गया। सड़कों पर 1 से 1.5 फीट पानी जमा होने से वाहन चालकों, पैदल राहगीरों और स्कूली बच्चों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा।

आठ साल से नालों की सफाई नहीं, मौसमी बीमारियों का बढ़ा खतरा
स्थानीय निवासियों का गुस्सा नगर पालिका प्रशासन पर फूट पड़ा। लोगों का आरोप है कि पिछले 8 वर्षों से कस्बे में स्थित गंदे नालों की समुचित सफाई नहीं हुई है। जिससे जलभराव और गंदगी के कारण क्षेत्र में डेंगू, मलेरिया जैसी मौसमी बीमारियां फैलने का डर बना हुआ है, लेकिन पालिका प्रशासन ‘कुंभकर्णी नींद’ में सोया हुआ है।

पालिका में व्यवस्थाएं राम भरोसे: ‘ईओ से ज्यादा चपरासी की है हैसियत’
स्थानीय नागरिकों ने नगर पालिका की कार्यप्रणाली पर तीखे प्रहार करते हुए गंभीर आरोप लगाए हैं उनका कहना है कि नगर पालिका में कोई सुनने वाला नहीं है। आलम यह है कि एक चतुर्थ श्रेणी कर्मचारी (चपरासी) की हैसियत ईओ से भी ज्यादा बनी हुई है और सारे पावर उसी की मुट्ठी में हैं। वह आमजन के काम करने के बजाय उन्हें दिनभर चक्कर कटवाता है। वहीं, सफाई कर्मचारी सफाई का मूल कार्य छोड़कर दिनभर पालिका दफ्तर में बैठकर कुर्सियां तोड़ते हैं।

कस्बेवासियों ने चेतावनी दी है कि यदि जल्द ही नालों की सफाई करवाकर जल निकासी की व्यवस्था दुरुस्त नहीं की गई, तो वे पालिका प्रशासन के खिलाफ विरोध-प्रदर्शन करने पर मजबूर होंगे।

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