एशियन ब्रॉन्ज और नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट इस्लाम खान का निधन, खेल जगत में शोक की लहर
एशियन ब्रॉन्ज और नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट इस्लाम खान का निधन, खेल जगत में शोक की लहर
चूरू जिला मुख्यालय स्थित अगूना मोहल्ला के पेनकाक सिलाट में अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भारत का प्रतिनिधित्व कर चुके एशियन ब्रॉन्ज मेडलिस्ट एवं नेशनल गोल्ड मेडलिस्ट युवा खिलाड़ी इस्लाम खान खानजादा का – 22 जुलाई 2026 – को अचानक हृदय गति रुकने से निधन हो गया। उनके असामयिक निधन से खेल जगत, खानजादा समाज और क्षेत्रभर में शोक की लहर दौड़ गई। पूर्व पार्षद एवं पारिवारिक सदस्य आसिफ टीपू खान ने बताया कि बुधवार दोपहर करीब 12 बजे इस्लाम खान की अचानक तबीयत बिगड़ गई। प्रारंभिक जानकारी के अनुसार उन्हें हार्ट अटैक आया। परिजन उन्हें तत्काल अस्पताल लेकर रवाना हुए, लेकिन रास्ते में ही उन्होंने दम तोड़ दिया। अस्पताल पहुंचने पर चिकित्सकों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया।
इस्लाम खान ने पेनकाक सिलाट खेल में राष्ट्रीय और अंतरराष्ट्रीय स्तर पर उल्लेखनीय उपलब्धियां हासिल कर चूरू क्षेत्र एवं राजस्थान और देश का नाम रोशन किया था। उन्होंने राष्ट्रीय प्रतियोगिता में स्वर्ण पदक और एशियाई प्रतियोगिता में कांस्य पदक जीतकर अपनी प्रतिभा का लोहा मनवाया था। खेल के प्रति उनका समर्पण और उपलब्धियां युवा खिलाड़ियों के लिए प्रेरणास्रोत मानी जाती थीं। उनके निधन की सूचना मिलते ही परिजन, मित्र, खिलाड़ी, खेल प्रेमी और समाज के लोग स्तब्ध रह गए। बड़ी संख्या में लोग उनके निवास पर पहुंचकर शोक-संतप्त परिवार एव पिता आमीन खान पीर खानी को सांत्वना दी। इस्लाम खान की उम्र 28 वर्ष थी। आपके दो नन्हे मुन्ने लड़के हैं, एक की उम्र लगभग 3- वर्ष व दूसरे की उम्र 8- माह बताई जा रही है।
इस्लाम खान के निधन को खेल जगत के लिए अपूरणीय क्षति माना जा रहा है। उनके असमय चले जाने से न केवल उनके परिवार बल्कि पूरे क्षेत्र ने एक प्रतिभाशाली खिलाड़ी और प्रेरणादायी व्यक्तित्व को खो दिया है।
“पांचों वक्त की नमाज, लबों पे रब का नाम, इंसानियत थी जिस की पहचान, मोटिवेशनल स्पीकर ,मोहब्बत था । जिसका पैगाम, आज जुदाई का गम है, आंखें हैं अश्क- बार” “कुछ लोग सिर्फ अपनी ज़िंदगी नहीं जीते, वो अपने व्यक्तित्व से अनगिनत दिलों में अपनी पहचान छोड़ जाते हैं। मरहूम इस्लाम खान उन्हीं में से एक थे। राजस्थान के चूरू की धरती से निकले उस मज़बूत कद-काठी वाले चैंपियन ने बॉक्सिंग की दुनिया में अपने हौसले और अनुशासन से सबका दिल जीता। उनका जीवन सादगी और नेक दिली की मिसाल था। उनका अचानक जाना सभी के लिए गहरा सदमा है।
आज आँखें नम हैं, लेकिन सिर गर्व से ऊँचा है। कि मेरे के युवा नाम रोशन किया दुआ है कि अल्लाह उन्हें जन्नतुल फिरदौस में आला मुकाम अता फरमाए, उनकी कब्र नूर से भर दे, और परिवार को सब्र-ए-जमील अता करे। उनकी याद हमारे दिलों में हमेशा ज़िंदा रहेगी।
मरहूम इस्लाम खान सिर्फ एक खिलाड़ी नहीं था, बल्कि हौसले, अनुशासन, और जुनून की मिसाल था उस ने साबित किया कि समर्पण और निष्ठा से कोई भी मुकाम दूर नहीं। उसकी हर जीत मेहनत की कहानी कहती है, और सादगी से जीया उनका जीवन प्रेरणा बन गया। वे दिखाते हैं कि असली ताक़त सिर्फ शरीर में नहीं, उस किरदार में होती है जो विपरीत परिस्थितियों में भी डिगता नहीं। उनकी विरासत हमें यही सिखाती है कि संघर्ष को सम्मान दो, मेहनत से मत भागो, और अपने सपनों को ईमानदारी से जियो।
जब रात्रि 10:00 बजे उनके निवास स्थान से जनाजा उठाया गया तो हजारों की संख्याओं में युवाओं की भीड़ आसपास के क्षेत्र से उमड़ पड़ी । सभी अपने युवा साथी को कंधा देने के लिए पहुंचे।कब्रिस्तान घर के नजदीक होने के बावजूद भी जनाजे को मोहल्ले के लम्बे रास्तों से घूमाकर कब्रिस्तान लाया गया।जहां पर मस्जिद- ए -इमाम ने नमाज -ए- जनाजा अदा करवाई। और दुआ -ए- मगफिरत की, आपके निवास स्थान पर खिराजे -ए-अकीदत पेश करने के लिए शहर एवं आसपास के क्षेत्र के गणमान्य लोग, राजनीतिज्ञक, साहित्यकार ,पत्रकार, डॉक्टर, एडवोकेट्स, शिक्षाविद् एवं खेल- जगत से जुड़े हुए ओर समाजसेवी लोगों ने खिराजे -ए-अकीदत पेश कर दुआ ए मगफिरत की।
- जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान
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