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हाईकोर्ट के निर्णय की पालना में मुख्यमंत्री एवं शिक्षा सचिव के नाम सौंपा ज्ञापन


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हाईकोर्ट के निर्णय की पालना में मुख्यमंत्री एवं शिक्षा सचिव के नाम सौंपा ज्ञापन

हाईकोर्ट के निर्णय की पालना में मुख्यमंत्री एवं शिक्षा सचिव के नाम सौंपा ज्ञापन

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद अली पठान

चूरू : राजस्थान हाईकोर्ट के निर्णय की पालना सुनिश्चित कराने की मांग को लेकर वाइस प्रिंसिपल डीपीसी प्रकरण में माननीय मुख्यमंत्री एवं अतिरिक्त मुख्य सचिव (स्कूल शिक्षा) के नाम जिला कलेक्टर को ज्ञापन सौंपा गया। कॉमन सीनियरिटी संघर्ष समिति के बैनर तले व्याख्याता मनोज श्योराण ने बताया कि यह मामला आरपीएससी स्कूल व्याख्याता भर्ती-2015 से जुड़ा है। उन्होंने बताया कि भर्ती के 19 विषयों की काउंसलिंग एवं नियुक्ति प्रक्रिया लगभग दो माह तक चली।

जिस विषय की काउंसलिंग पूरी होती गई, उसी क्रम में नियुक्ति आदेश जारी किए जाते रहे। वर्ष 2022 में विभाग द्वारा जारी वरिष्ठता सूची में वरिष्ठता का निर्धारण अभ्यर्थियों की मेरिट के बजाय जॉइनिंग तिथि के आधार पर किया गया। इसके आधार पर सितंबर 2025 में वाइस प्रिंसिपल पद के लिए डीपीसी आयोजित की गई, जिससे कुछ विषयों के लगभग सभी पात्र अभ्यर्थियों को पदोन्नति मिल गई, जबकि आठ विषयों के एक भी व्याख्याता को पदोन्नति नहीं मिल सकी। इससे भर्ती-2015 के लगभग 9,000 व्याख्याताओं को अन्य विषयों के कम मेरिट वाले अभ्यर्थियों से भी पीछे होना पड़ा।

इस विसंगति के विरोध में प्रभावित व्याख्याताओं ने हाईकोर्ट की शरण ली। करीब चार वर्ष तक चले कानूनी संघर्ष के बाद 8 जुलाई 2026 को राजस्थान हाईकोर्ट की डबल बेंच ने महत्वपूर्ण फैसला सुनाते हुए पूर्व में हुई विवादित डीपीसी को निरस्त कर दिया तथा विभाग को चार माह के भीतर भर्ती-2015 के सभी विषयों की कॉमन मेरिट के आधार पर संशोधित वरिष्ठता सूची तैयार कर पुनः डीपीसी करने के निर्देश दिए।

ज्ञापन के दौरान जिला कलेक्टर ने पूरे मामले की जानकारी गंभीरता से सुनी और नियमानुसार उचित कार्रवाई का आश्वासन दिया। इस अवसर पर व्याख्याता दुष्यंत सिंह, मोहन कलकल, आरिफ खान, आसिफ खान, भंवरलाल बुडानिया, धर्मेंद्र सोलंकी, सुभाष पूनिया, यशपाल बेनीवाल सहित अन्य व्याख्याता उपस्थित रहे।

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