NEET पेपर लीक के खिलाफ जयपुर के पत्रिका गेट पर फूटा युवाओं का सैलाब
आँखों में आँसू, हाथों में तख्तियां: लाखों होनहारों के टूटे सपनों की चीख से गूँजा जयपुर, केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान के इस्तीफे की उठी मांग
जयपुर : रात-रात भर जागकर किताबों के पन्नों में अपने डॉक्टर बनने का सपना सींचने वाले लाखों होनहार युवाओं की मेहनत पर जब धांधली और भ्रष्टाचार का पानी फिरता है, तो दिल चीख उठता है। देश की सबसे बड़ी और प्रतिष्ठित मेडिकल प्रवेश परीक्षा ‘नीट’ (NEET) में सामने आई कथित धांधली और पेपर लीक के आरोपों ने देश के भविष्य को झकझोर कर रख दिया है। इसी गम और गुस्से का लावा आज राजधानी जयपुर के ऐतिहासिक पत्रिका गेट पर फूटा, जहाँ हजारों युवाओं और छात्रों ने एकजुट होकर केंद्र सरकार और परीक्षा एजेंसी के खिलाफ हुंकार भरी। प्रदर्शन में शामिल हर युवा के चेहरे पर सिर्फ गुस्सा ही नहीं, बल्कि सालों की मेहनत बर्बाद होने का वो दर्द भी साफ छलक रहा था, जो हर उस मध्यमवर्गीय माँ-बाप का है जिसने अपनी जमापूंजी औलाद के भविष्य के लिए दांव पर लगा दी थी।

प्रदर्शनकारियों ने भरे गले और बुलंद आवाज में साफ शब्दों में कहा कि देश के लाखों छात्रों की निष्ठा और उनके सपनों के साथ इस तरह का खिलवाड़ अब किसी भी कीमत पर स्वीकार नहीं किया जाएगा। युवाओं का कहना था कि शिक्षा व्यवस्था में पारदर्शिता और जवाबदेही किसी भी लोकतंत्र की बुनियाद होती है, लेकिन जब परीक्षा प्रणालियों पर ही सवाल खड़े होने लगें, तो व्यवस्था से भरोसा टूटने लगता है।
जयपुर के पत्रिका गेट पर विरोध जता रहे युवाओं के हाथों में तख्तियां और दिल में व्यवस्था के खिलाफ गहरा आक्रोश था। प्रदर्शनकारियों ने व्यवस्था की नाकामी पर तीखा प्रहार करते हुए नैतिक जिम्मेदारी के तहत केंद्रीय शिक्षा मंत्री धर्मेंद्र प्रधान से तुरंत पद से इस्तीफा देने की मांग की। छात्रों का दर्द बयां करते हुए वक्ताओं ने कहा कि एक गरीब और मध्यमवर्गीय परिवार का बच्चा जब सालों तक अपने कमरों में बंद होकर तैयारी करता है, तब उसके साथ पूरा परिवार तपस्या करता है। लेकिन पेपर लीक करने वाले भू-माफिया और भ्रष्ट तंत्र चंद रुपयों के खातिर उनकी बरसों की तपस्या को एक झटके में नीलाम कर देते हैं। युवाओं की मांग स्पष्ट है—संपूर्ण धांधली की पारदर्शी व निष्पक्ष जांच हो, दोषियों को कड़ी से कड़ी सजा मिले और हर पीड़ित छात्र को न्याय दिया जाए।
दूसरी तरफ, इस पूरे संवेदनशील मामले पर केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय परीक्षा एजेंसी का पक्ष भी सामने आया है। सरकार और प्रशासन का कहना है कि वे छात्रों के भविष्य को लेकर पूरी तरह गंभीर हैं और मामले की उच्चस्तरीय जांच जारी है। अधिकारियों का दावा है कि किसी भी दोषी को बख्शा नहीं जाएगा और साक्ष्यों के आधार पर सख्त से सख्त कार्रवाई की जाएगी।
बहरहाल, वादों और आश्वासनों के बीच पत्रिका गेट पर मौजूद युवाओं की नम आँखें और गूँजते नारे बस एक ही सवाल पूछ रहे हैं—आखिर कब तक देश का होनहार युवा अपनी ही साख और सपनों की भीख मांगने के लिए सड़कों पर उतरने को मजबूर होता रहेगा?
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