पुलिस की ढुलमुल नीति से राजस्थान रोडवेज को लगा हजारों का चूना? रसूख के आगे नतमस्तक व्यवस्था…
सीसीटीवी में स्लीपर की गलती साफ, फिर भी 4 दिन थाने में 'कैद' रहने के बाद कोर्ट के आदेश से छूटी सरकारी बस
चालक ने पुलिस पर लगाए गंभीर आरोप-बस सीज करने के बाद पुलिस ने नही दिया सीजर मेमो (फर्दजब्ती)…
जनमानस शेखावाटी न्यूज के हाथ लगे घटना स्थल के लाइव एक्सीडेंट के सीसीटीवी फुटेज, स्लीपर ने सरकारी रोडवेज को मारी थी पीछे से टक्कर
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अनिल शेखीसर
फतेहपुर : एक ओर जहाँ राज्य सरकार राजस्थान रोडवेज निगम की आय बढ़ाने और आमजन की सुविधा के लिए नए-नए रूटों सहित ग्रामीण क्षेत्रों में बसें संचालित कर हर वर्ग को सुलभ परिवहन सेवा प्रदान करने का प्रयास कर रही है, वहीं दूसरी ओर फतेहपुर कोतवाली पुलिस की कथित ढुलमुल नीति और अड़ियल रवैये के कारण हादसे का शिकार हुई राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम की सरकारी बस पूरे 4 दिनों तक कोतवाली थाने के परिसर में खड़ी धूल फांकती रही। जिस से राजस्थान रोडवेज को हजारों का चूना लगा हैं। पुलिस की इस कार्यशैली के चलते इस व्यस्त रूट पर सफर करने वाले सैकड़ों ग्रामीण यात्रियों को भारी परेशानियों का सामना करना पड़ा और मजबूरी में निजी व महंगे वाहनों की शरण लेनी पड़ी, जिससे सरकारी तंत्र की इस लचर व्यवस्था के कारण निगम को प्रतिदिन हजारों रुपये के राजस्व का चूना उठाना पड़ा।
प्राप्त जानकारी के अनुसार हादसे के दिन से ही पुलिस का रवैया एक रसूखदार निजी बस मालिक को कथित तौर पर राहत पहुंचाने की दिशा में ढीला बना हुआ था। ताज्जुब की बात यह है कि इस हादसे में न तो कोई जनहानि हुई थी और न ही कोई बड़ा नुकसान, इसके बावजूद जनसेवा में लगी एक सरकारी रोडवेज बस को पुलिसिया सुस्ती के कारण 4 दिनों तक थाने में बंधक की तरह खड़ा रखा गया और अंततः कोर्ट के हस्तक्षेप व आदेश के बाद ही इसे छुड़ाया जा सका।

क्या था मामला?
एफआईआर संख्या 0215 के अनुसार रोडवेज चालक लक्ष्मण प्रसाद सैनी ने बताया कि बीते 21 जुलाई 2026 को वे बस संख्या RJ23PB6588 को लेकर सीकर से बीकानेर के निर्धारित रूट पर जा रहे थे। सुबह करीब साढ़े 7 बजे फतेहपुर के सरदारपुरा बस स्टैंड चुंगी नाका पर पीछे से आ रही एक तेज रफ्तार निजी स्लीपर बस संख्या AR20B2111 ने गफलत में लापरवाही से सरकारी बस को पीछे से जोरदार टक्कर मार दी। इस दुर्घटना के बाद रोडवेज का लगभग 416 किलोमीटर का रूट निरस्त करना पड़ा, जिससे सरकारी खजाने को सीधा आर्थिक नुकसान पहुंचा।
जनमानस शेखवाटी न्यूज के हाथ लगे लाइव एक्सीडेंट के सीसीटीवी सबूत
मामले में नया मोड़ तब आया जब हमारी टीम के हाथ दुर्घटना स्थल के लाइव सीसीटीवी फुटेज लगे, जिनमें स्पष्ट रूप से देखा जा सकता है कि निजी स्लीपर बस ने पीछे से आकर रोडवेज बस को टक्कर मारी थी। इसके बावजूद पुलिस द्वारा चालक को सीजर मेमो या फर्द जब्ती नहीं दी गई, जिससे विवश होकर चालक को कानून का दरवाजा खटखटाना पड़ा। दूसरी तरफ दुर्घटना कारित करने वाली निजी स्लीपर बस की ओर से कोई एफआईआर दर्ज नहीं है?।

चालक ने लगाए गंभीर आरोप
मीडिया से बातचीत में पीड़ित रोडवेज चालक लक्ष्मण प्रसाद सैनी ने खाकी पर गंभीर आरोप लगाते हुए बताया कि घटना के तुरंत बाद जब वे परिवाद देने थाने पहुंचे तो पुलिस ने उन्हें न्याय दिलाने के बजाय उल्टे राजीनामे की ‘नसीहत’ दे डाली और डराते हुए कहा कि तुमने जोर से ब्रेक मारे हैं, इसलिए उल्टे तुम ही फंस जाओगे। जब इस पुलिसिया रवैये की खबर मीडिया में प्रमुखता से चली, तब जाकर देर शाम पुलिस ने एफआईआर दर्ज की।
परिवादी की ही बस चार दिन सीज
चालक लक्ष्मण प्रसाद सैनी ने दर्द बयां करते हुए कहा कि 21 जुलाई को घटना के तुरंत बाद परिवाद देने के बावजूद बस को बेवजह सीज़ किया गया। जब उन्होंने जब्ती की रिसीविंग मांगी तो पुलिसकर्मियों ने साफ कह दिया कि जो देंगे कोर्ट में देंगे, बस छुड़वानी है तो कोर्ट से छुड़वा लो। मजबूरी में उन्हें एडवोकेट दिनेश शर्मा के माध्यम से न्यायालय की शरण लेनी पड़ी, जिसके बाद अदालत के आदेश पर 4 दिन बाद बस को कस्टडी से छुड़ाया जा सका।
क्या बोले कोतवाल..?
दूसरी ओर, पूरे मामले पर अपना पक्ष रखते हुए फतेहपुर कोतवाली थाना प्रभारी महेंद्र कुमार मीणा ने चालक के आरोपों को सिरे से खारिज किया है। थाना प्रभारी का कहना है कि लगाए गए सभी आरोप निराधार हैं और इन्वेस्टिगेशन के दौरान सीज़ की गई बस की जब्ती कॉपी (फर्द जब्ती) तुरंत नहीं दी जाती। क्या पता मामला किस वे में जाए उन्होंने बताया कि वे दो दिनों से जयपुर में थे और गश्त पे जाना हैं। मामले की निष्पक्ष जांच की जाएगी। जो भी तथ्य सामने आएंगे, उसी के आधार पर विधि सम्मत कार्रवाई होगी। कोतवाल ने यह भी कहा कि रोडवेज चालक को इस मामले में चार्ज शीट मिलेगी जिसके डर से ये सब कर रहा हैं। – कोतवाली थाना प्रभारी महेंद्र कुमार मीणा
हालाँकि, प्रत्यक्षदर्शियों और उपलब्ध सीसीटीवी फुटेज के सामने आने के बाद अब यह सवाल उठना लाज़मी है कि जब गलती साफ तौर पर निजी स्लीपर बस की दिख रही थी, तो फिर सरकारी बस को 4 दिनों तक थाने में रोककर राजस्थान रोडवेज के राजस्व को नुकसान पहुँचाने का जिम्मेदार कौन है? क्या पुलिस उसी समय वहां के सीसीटीवी फुटेज खंगाल कर दूध का दूध पानी का पानी नहीं कर सकती थी?
कानूनी सलाहकारो की राय
थानाधिकारी की इच्छाशक्ति होती, तो नहीं डूबता सरकारी राजस्व!”
मामले को लेकर जब हमारी टीम ने निष्पक्ष कानूनी सलाहकारों से संपर्क साधा, तो पुलिसिया कार्यशैली की पोल खुलकर सामने आ गई। विशेषज्ञों का स्पष्ट रूप से कहना है कि जब दुर्घटना स्थल के लाइव सीसीटीवी फुटेज मौजूद थे, तो पुलिस केवल फुटेज खंगालकर पल भर में पूरी स्थिति साफ कर सकती थी। इसके अलावा, जब निजी स्लीपर बस की तरफ से कोई एफआईआर तक दर्ज नहीं कराई गई थी और प्रत्यक्ष रूप से रोडवेज बस का पिछला हिस्सा (डिग्गी) व स्लीपर बस का अगला केबिन क्षतिग्रस्त पाया गया था, तो मामला पूरी तरह साफ था।
कानूनी विशेषज्ञों के अनुसार, ऐसे मामलों में पुलिस को परिवादी रोडवेज चालक का मुकदमा दर्ज कर तुरंत प्रभाव से दोनों वाहनों का मैकेनिकल मुआयना और फोटोग्राफी करवानी चाहिए थी। इसके बाद नियमानुसार रोडवेज बस को थाना स्तर पर ही पाबंद/सुपुर्दगी पर छोड़ा जा सकता था, जिससे राजस्थान रोडवेज को लगने वाले हजारों रुपये के दैनिक राजस्व नुकसान से आसानी से बचाया जा सकता था। जानकारों ने दोटूक शब्दों में कहा कि थानों में सड़ती सरकारी गाड़ियों और राजस्व क्षति को रोकने की प्राथमिक जिम्मेदारी सीधे तौर पर थानाधिकारी (एसएचओ) की होती है, लेकिन यहाँ कानूनी विवेक और जनहित की जगह पुलिसिया हठधर्मिता हावी दिखाई दे रही हैं।
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