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बेसहारा गोवंश को तड़पते देख पसीजा दिल, तीन दोस्तों ने मिलकर खोल दी गोशाला


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बेसहारा गोवंश को तड़पते देख पसीजा दिल, तीन दोस्तों ने मिलकर खोल दी गोशाला

छ्ह गांवों में घूम रही दानवाहिनी, रोजाना 1 क्विंटल मिल रहा खाद्यान्न

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : मोहम्मद आरिफ चंदेल

इस्लामपुर : माखर ग्राम पंचायत के रतनशहर गांव में सड़क किनारे बेसहारा गोवंश को तड़प-तड़पकर मरते देख कुछ लोगों का दिल पसीजा। गांव के तीन दोस्तों केसरदेव सैनी, प्रतापराम सैनी व नरसीराम सैनी ने मिलकर गांव में गोशाला खोलने का बीड़ा उठाया। इन तीनों दोस्तों ने मिलकर कुछ साल पहले एक छोटे से बाड़े में 6 निराश्रित और बेसहारा गोवंश को रखकर गोशाला की शुरुआत की थी। आज यह संख्या लगभग 150 के करीब पहुंच गई है। शुरुआत में ये तीनों साथी अपने-अपने घर से सिर पर चारे की गठरी रखकर लाते थे। प्रारंभ में गांव के कुछ लोगों ने इन तीनों दोस्तों को उलाहना भी दी मगर उनकी लगन और गोवंश की सेवा के प्रति इनके जज्बे के सामने उलाहना देने वालों की एक न चली। इनकी मेहनत और गायों के प्रति सेवा की भावना को देखते हुए धीरे-धीरे दूसरे लोग भी इनसे जुड़ते गए और आज उस छोटे से बाड़े ने एक बड़ी गोशाला का रूप ले लिया है।

इस प्रकार हुआ कार्यकारिणी का गठन

2020 में श्रीकृष्ण गोशाला रतनशहर का रजिस्ट्रेशन होने के बाद दिसम्बर में गोशाला के लिए कार्यकारिणी का गठन किया। कार्यकारिणी में सर्वसम्मति से प्रतापराम सैनी को अध्यक्ष, केशरदेव सैनी को सचिव व नरसीराम सैनी को कोषाध्यक्ष बनाकर कुल 15 सदस्यों को गोशाला की जिम्मेदारी सौंपी गई ओर सभी से 2100-2100 रुपए इकट्ठे कर कोष बनाया गया।

गोशाला में जनसहयोग से हुए चारदीवारी से लेकर ट्यूबवेल तक के काम

ग्रामीणों ने जनसहयोग से जनवरी 2020 में एक बाड़े में गोशाला शुरू की थी। आज 5 हजार वर्ग मीटर में इसका फैलाव है। रतनशहर गोशाला में भामाशाह भी दिल खोलकर सहयोग कर रहे हैं। गोशाला में चारदिवारी से लेकर ट्यूबवेल तक के सभी कार्य जनसहयोग से ही हुए हैं। गोशाला में चारदीवारी, ट्यूबवेल व सोलर सिस्टम का निर्माण कार्य इस्लामपुर निवासी व मुंबई प्रवासी भामाशाह नरेंद्र कटवालिया की ओर से, राधा-कृष्ण मंदिर का निर्माण ठेकेदार महेंद्र सैनी व बड़े टीनशेड का निर्माण रेणु बंसल गाजियाबाद की ओर से करवाया गया है।

छ्ह गांवों में घूम रही दानवाहिनी, रोजाना 1 क्विंटल मिल रहा खाद्यान्न

सचिव कृष्ण सांखला ने बताया कि रतनशहर गोशाला की दानवाहिनी रोजाना माखर, चन्द्रपुरा, रतनशहर, इस्लामपुर, खुडाना व जयपहाड़ी सहित 6 गांवों में घूम रही है जिससे गोवंश के लिए प्रतिदिन लगभग 1 क्विंटल खाद्यान्न इकट्ठा हो रहा है। दानवाहिनी का साप्ताहिक रूट तय है। वह रूट के हिसाब से घर-घर पहुंचती है। दानवाहिनी पर साउंड सिस्टम लगा हुआ है जिसकी आवाज सुनते ही दानदाता दौड़कर अपने-अपने दरवाजे पर आ जाते हैं और गोवंश के लिए अनाज, रोटी, आटा, गुड़ व हरा चारा आदि दान करते हैं। दानदाताओं को दानवाहिनी का बेसब्री से इंतजार रहता है। दानवाहिनी में दान पत्र भी रहता है जिसमें दानदाता अपनी इच्छानुसार नकद राशि का दान करते हैं।

जैविक खाद प्लांट व गाय का दूध बना आमदनी का जरिया

गोशाला में जैविक खाद प्लांट भी लगाया गया है जिसमें केंचुए की खाद तैयार कर बेची जाती है साथ ही प्रतिदिन लगभग 20 लीटर दूध भी ग्राहकों को बेचा जा रहा है। जैविक खाद और दूध से प्राप्त आमदनी को गायों पर खर्च किया जाता है। जैविक खाद और गायों का दूध गोशाला में आमदनी का जरिया बन रहा है।

गोवंश के लिए 20 बीघा में बनाया चारागाह

गोशाला में गोवंश के लिए पंजाब, हरियाणा व अन्य जगहों से छानी, तूड़ा व चारा मंगाया जाता था। गोशाला सेवा समिति सदस्यों की ओर से ग्राम पंचायत से अनापत्ति प्रमाण पत्र जारी करवाकर गोशाला के नजदीक ही लगभग 20 बीघा में चारागाह बनाया गया है। समिति सदस्यों की ओर से चारागाह भूमि में गायों के चारे के साथ ही लगभग विभिन्न प्रकार के 120 पेड़ भी लगाए गए हैं।

साल भर होते हैं धार्मिक आयोजन

इतना ही नहीं बल्कि गोशाला में साल भर विभिन्न प्रकार के धार्मिक आयोजन भी होते रहते हैं। समिति सदस्यों ने बताया कि गोशाला में गोपाष्टमी, शरद पूर्णिमा, निर्जला एकादशी व मकर संक्रांति जैसे पावन पर्वों पर गोशाला में भजन संध्या व पंचकुंडीय गायत्री महायज्ञ जैसे बड़े धार्मिक आयोजन भी होते रहते हैं। साथ ही आसपास के क्षेत्र से लोग शादी-विवाह, जन्मदिन व दशोठण जैसे मांगलिक अवसरों पर गोशाला में आकर गायों की सेवा और दान पुण्य करते हैं।

शुरुआत में गांव में तड़पते बेसहारा गोवंश को आश्रय देने और फसलों को हो रहे नुकसान से बचाने के लिए ग्रामीणों की ओर से गोशाला खोली गई थी और आज यही गोशाला इन बेसहारा गोवंश के लिए आश्रय स्थल, सेवा और उपचार के साथ-साथ गोवंश पर हो रहे खर्चे की आमदनी का जरिया बन गई है।

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