पिकअप पर ‘जय बाबा की’ लिखा था, पुलिस ने काटा-चालान:विधायक भाटी बोले- राम राज्य में अपने इष्ट का नाम लिखना क्या गुनाह हैं?
बाड़मेर में वाहन पर 'बाबा गरीबनाथ जी' लिखने पर कटा चालान। विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने उठाए सवाल। जानिए राजस्थान में गाड़ी पर नाम लिखने का विधिक नियम।
बाड़मेर : राजस्थान के बाड़मेर जिले से यातायात नियमों और आम जनता की धार्मिक आस्था के टकराव का एक अनोखा मामला सामने आया है। यहां एक स्थानीय वाहन मालिक का यातायात पुलिस द्वारा इसलिए चालान काट दिया गया क्योंकि उसकी गाड़ी के आगे उसके आराध्य और इष्ट देवता का नाम लिखा हुआ था। वाहन मालिक का दावा है कि उसकी गाड़ी में प्रदूषण (PUC), इंश्योरेंस, सीट बेल्ट या स्पीड लिमिट जैसे अन्य किसी भी प्रकार के यातायात नियमों का कोई उल्लंघन नहीं पाया गया था। इधर, भगवान का नाम लिखे होने के कारण हुई इस कार्रवाई पर शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने सोशल मीडिया के माध्यम से तीखी प्रतिक्रिया व्यक्त की है। बता दें कि पुलिस ने इस वाहन मालिक के 500 रुपए का चालान काटा है।
क्या राम राज्य में इष्ट का नाम लिखना गुनाह है?: भाटी
बाड़मेर में हुए इस चालान की फोटो और जानकारी जैसे ही शिव विधायक रविंद्र सिंह भाटी के पास पहुंची, उन्होंने तुरंत अपने आधिकारिक सोशल मीडिया हैंडल से राज्य सरकार और पुलिस प्रशासन के खिलाफ मोर्चा खोल दिया। भाटी ने इस पूरी कार्रवाई को आम जनता की धार्मिक भावनाओं के साथ खिलवाड़ और संवेदनहीनता करार दिया।
इस वाहन पर हुआ चालान
विधायक रविंद्र सिंह भाटी ने अपने संदेश में सीधे शब्दों में लिखा, “राम राज्य में अपने इष्ट का नाम लिखना भी क्या गुनाह हैं?” भाटी ने इस गंभीर मामले पर हस्तक्षेप करने के लिए अपने पोस्ट में प्रधानमंत्री कार्यालय (@PMOIndia), राजस्थान मुख्यमंत्री कार्यालय (@RajCMO), राजस्थान पुलिस महानिदेशक (@PoliceRajasthan) और बाड़मेर जिला पुलिस (@Barmer_Police) को विधिक रूप से टैग किया।
भाटी ने कहा कि यदि प्रशासन को यातायात नियमों का पालन कराना ही है, तो उसका क्रियान्वयन रसूखदारों और आम जनता सभी के लिए समान रूप से होना चाहिए। उन्होंने प्रशासन को नसीहत दी कि धार्मिक आस्था और आमजन की भावनाओं से जुड़े संवेदनशील मामलों में पुलिस को थोड़ी व्यवहारिकता और संवेदनशीलता दिखानी चाहिए।
भाटी की पोस्ट पर लोगों की प्रतिक्रिया
थानाधिकारी बोले- नियमों के अनुसार की गई कार्रवाई
रीको थाना अधिकारी चैन प्रकाश ने बताया कि 14 जून को एक पिकअप गाड़ी का चालान SI लूणदान उप निरीक्षक, पुलिस थाना रीको बाड़मेर की ओर से काटा गया था। इसकी फ्रंट विंडशील्ड पर दो बड़ी काली फिल्म ऊपर और नीचे लगाई गई थी। उन पर ‘जय बाबा गरीब नाथ जी’ लिखा हुआ था।
इसके अलावा भी विंड शील्ड पर सूरज राहुल स्वरूप वगैरह कुल पांच नाम लिखे हुए थे। इसकी वजह से ड्राइवर के सामने का दृश्य आंशिक रूप से बाधित होता पाया गया है, जो सामान्यतः ड्राइवर के दृश्यता संबंधी नियम के उल्लंघन में मोटर वाहन अधिनियम के तहत चालान बनता है।
हाल ही में राजस्थान पुलिस ने एक राज्यव्यापी अभियान में, वाहनों पर हूटर, फ्लैशलाइट, नंबर प्लेट पर जाति सूचक या पद सूचक अन्य कोई नाम शब्द चिन्ह और वाहनों की विंडशील्ड/फ्रंट ग्लास पर अनाधिकृत शब्द चिन्ह इत्यादि प्रदर्शित करने वाले वाहनों पर कार्रवाई के लिए एक महीने का अभियान चला रखा है। इसी अभियान के तहत कार्रवाई की गई है।
वाहनों पर नाम-स्लोगन लिखने के नियम?
इस बड़े सियासी बवाल के बीच आम वाहन चालकों के लिए यह जानना बेहद जरूरी है कि मोटर वाहन अधिनियम (Motor Vehicles Act) और राजस्थान उच्च न्यायालय के विधिक निर्देश इस संबंध में क्या कहते हैं। बाड़मेर पुलिस और परिवहन विभाग द्वारा की जा रही इस प्रकार की कार्रवाइयों के पीछे विशिष्ट कानूनी नियम काम करते हैं:
1. नंबर प्लेट पर कुछ भी लिखना पूरी तरह प्रतिबंधित (Section 50/177 of MV Act)
केंद्रीय मोटर वाहन नियम 1989 के विधिक नियम 50 (Central Motor Vehicles Rules) के तहत वाहन की रजिस्ट्रेशन नंबर प्लेट पर केवल और केवल आरटीओ (RTO) द्वारा जारी नंबर ही अंकित होने चाहिए। नंबर प्लेट पर किसी भी भाषा में भगवान का नाम, जाति सूचक शब्द (जैसे जाट, राजपूत, गुर्जर, मीणा आदि), पद का नाम (जैसे सरपंच, प्रधान, विधायक) या कोई अन्य स्लोगन लिखना पूरी तरह से गैर-कानूनी है। ऐसा करने पर पुलिस सीधे तौर पर नंबर प्लेट टेम्परिंग के तहत भारी आर्थिक जुर्माने का चालान काटती है।
2. वाहन की बॉडी, विंडस्क्रीन (शीशे) पर नाम लिखने का नियम
राजस्थान उच्च न्यायालय (Rajasthan High Court) ने पूर्व में एक विधिक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य सरकार और पुलिस को सख्त निर्देश दिए थे कि वाहनों के आगे और पीछे के मुख्य शीशों (Windscreen) या बॉडी पर किसी भी प्रकार के जातिगत, धार्मिक, या पद सूचक शब्दों का बड़े अक्षरों में प्रदर्शन नहीं होना चाहिए।
वजह: इसके पीछे कानून का तर्क यह है कि गाड़ी पर लिखे बड़े-बड़े अक्षर या धार्मिक/जातिगत स्लोगन सड़क पर चल रहे अन्य वाहन चालकों का ध्यान भटकाते हैं (Distraction), जिससे गंभीर सड़क दुर्घटनाएं होने का खतरा बना रहता है।
चालान की धारा: पुलिस ऐसे मामलों में मोटर वाहन अधिनियम की धारा 177 (सामान्य नियम उल्लंघन) या धारा 179 (अधिकारियों के आदेशों की नाफरमानी) के तहत चालान की विधिक कार्रवाई अमल में लाती है।
देश
विदेश
प्रदेश
संपादकीय
वीडियो
आर्टिकल
व्यंजन
स्वास्थ्य
बॉलीवुड
G.K
खेल
बिजनेस
गैजेट्स
पर्यटन
राजनीति
मौसम
ऑटो-वर्ल्ड
करियर/शिक्षा
लाइफस्टाइल
धर्म/ज्योतिष
सरकारी योजना
फेक न्यूज एक्सपोज़
मनोरंजन
क्राइम
चुनाव
ट्रेंडिंग
Covid-19






Total views : 2229835

