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बीडीके अस्पताल में 3 माह से सोनोग्राफी सेवा ठप, मरीजों को निजी सेंटरों का सहारा, PMO ने कहा- नए स्टाफ की मांग भेजी


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झुंझुनूंटॉप न्यूज़राजस्थानराज्य

बीडीके अस्पताल में 3 माह से सोनोग्राफी सेवा ठप, मरीजों को निजी सेंटरों का सहारा, PMO ने कहा- नए स्टाफ की मांग भेजी

बीडीके अस्पताल में 3 माह से सोनोग्राफी सेवा ठप, मरीजों को निजी सेंटरों का सहारा, PMO ने कहा- नए स्टाफ की मांग भेजी

झुंझुनू : झुंझुनू जिले के सबसे बड़े बीडीके अस्पताल में पिछले करीब तीन-चार महीने से सोनोग्राफी जांच बंद पड़ी है। रेडियोलॉजिस्ट और सोनोलॉजिस्ट की कमी के कारण अस्पताल में आने वाले मरीजों को जांच के लिए निजी सेंटरों का सहारा लेना पड़ रहा है। ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर मरीजों को मुफ्त जांच नहीं मिलने से अतिरिक्त आर्थिक बोझ उठाना पड़ रहा है। अस्पताल प्रशासन का कहना है कि नए स्टाफ की मांग राज्य सरकार को भेजी गई है।

अस्पताल में बंद पड़ी है सोनोग्राफी सुविधा

सरकारी अस्पतालों में बेहतर स्वास्थ्य सुविधाओं और निशुल्क जांच के दावे किए जाते हैं, लेकिन बीडीके अस्पताल में पिछले करीब तीन-चार महीने से सोनोग्राफी जांच पूरी तरह बंद है। अस्पताल में रेडियोलॉजिस्ट और सोनोलॉजिस्ट जैसे महत्वपूर्ण पद रिक्त होने से यह स्थिति बनी हुई है।

बीडीके अस्पताल के सोनोग्राफी में ताला लगा हुआ है।
बीडीके अस्पताल के सोनोग्राफी में ताला लगा हुआ है।

मरीजों को निजी सेंटरों का लेना पड़ रहा सहारा

ग्रामीण और आर्थिक रूप से कमजोर लोग निशुल्क जांच की उम्मीद लेकर अस्पताल पहुंचते हैं, लेकिन डॉक्टरों द्वारा सोनोग्राफी लिखने के बाद उन्हें बाहर से जांच कराने के लिए कहा जा रहा है। इससे मरीजों को आर्थिक और मानसिक दोनों तरह की परेशानी का सामना करना पड़ रहा है।

मरीज बोले- बाहर करानी पड़ी जांच

खतेहपुरा निवासी सरोज ने बताया कि वह सोनोग्राफी करवाने अस्पताल पहुंची थीं, लेकिन यहां आकर पता चला कि सुविधा बंद है। उन्हें निजी सेंटर पर जांच करवानी पड़ी। अलग-अलग गांवों से आए मरीजों ने बताया कि वे निशुल्क जांच के लिए अस्पताल पहुंचे थे, लेकिन सोनोग्राफी सुविधा बंद होने के कारण उन्हें बाहर जांच करानी पड़ी, जिस पर करीब 800 रुपए खर्च हुए। बोई गांव से आए एक बुजुर्ग ने बताया कि वह अपनी बेटी गुड़िया को दिखाने अस्पताल आए थे। डॉक्टर ने सोनोग्राफी लिखी, लेकिन अस्पताल में सुविधा नहीं मिलने के कारण उन्हें निजी सेंटर जाना पड़ा, जहां 800 रुपए खर्च करने पड़े।

गंभीर बीमारियों की पहचान के लिए जरूरी है जांच

मरीजों का कहना है कि गंभीर बीमारियों की समय पर पहचान के लिए सोनोग्राफी जांच बेहद जरूरी होती है। सरकारी अस्पताल में यह सुविधा बंद रहने से आम लोगों को परेशानी उठानी पड़ रही है।

पीएमओ बोले- नए स्टाफ की मांग भेजी

बीडीके अस्पताल के पीएमओ डॉ. जितेंद्र भाम्बू ने बताया कि सोनोग्राफी विभाग के लिए रेडियोलॉजिस्ट और सोनोलॉजिस्ट के पद रिक्त हैं। इसके लिए राज्य सरकार को प्रस्ताव भेजा गया है। उन्होंने बताया कि पूर्व में एक चिकित्सक की पोस्टिंग की गई थी, लेकिन पीजी में चयन होने के कारण वे जयपुर चले गए। अब नए पदस्थापन के लिए मांग भेजी गई है और स्टाफ मिलने के बाद सोनोग्राफी व्यवस्था दोबारा शुरू कर दी जाएगी।

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