[pj-news-ticker post_cat="breaking-news"]

न्याय की जीत: 10 साल के मानसिक संताप के बाद पुलिस ए.एस.आई. श्रवण कुमार दोषमुक्त, क्या लौट पाएंगे ज़िंदगी के वो अनमोल साल?


निष्पक्ष निर्भीक निरंतर
  • Download App from
  • google-playstore
  • apple-playstore
  • jm-qr-code
X
टॉप न्यूज़ब्रेकिंग न्यूज़राजस्थानराज्यसीकर

न्याय की जीत: 10 साल के मानसिक संताप के बाद पुलिस ए.एस.आई. श्रवण कुमार दोषमुक्त, क्या लौट पाएंगे ज़िंदगी के वो अनमोल साल?

बेदाग़ पुलिसवाले के दशक भर के संघर्ष की दर्दनाक कहानी

जनमानस शेखावाटी सवांददाता : अनिल शेखीसर

सीकर/रामगढ़ : “सत्य परेशान हो सकता है, पराजित नहीं” यह पंक्तियाँ सुनने में जितनी ढाढस बंधाती हैं, हकीकत में इस अग्निपरीक्षा से गुजरने वाले इंसान की रूह तक कांप जाती है। भ्रष्टाचार के एक झूठे, बेबुनियाद आरोप की आग में झुलस रहे एक ईमानदार छवि के पुलिस अधिकारी को आखिरकार एक दशक के लंबे और दर्दनाक इंतजार के बाद न्यायालय से न्याय मिल गया है।

विशिष्ट न्यायाधीश, भ्रष्टाचार निवारण अधिनियम, सीकर के पीठासीन अधिकारी अखिलेश कुमार ने ऐतिहासिक निर्णय सुनाते हुए तत्कालीन ए.एस.आई. श्रवण कुमार को सभी आरोपों से दोषमुक्त कर दिया है। लेकिन इस इंसाफ की चौखट तक पहुँचते-पहुँचते एक बेकसूर अधिकारी ने जो खोया है, उसकी भरपाई दुनिया की कोई ताकत नहीं कर सकती।

क्या था मामला..
यह पूरा मामला साल 2016 का है, जब रामगढ़ सेठान थाने में पूरी निष्ठा से तैनात ए.एस.आई. श्रवण कुमार के खिलाफ महज एक व्यक्तिगत रंजिश के चलते एसीबी में झूठी शिकायत दर्ज कराई गई थी। परिवादी महेश कुमार ने एक मुकदमे को रफा-दफा करने के एवज में रिश्वत की मांग का ताना-बाना बुना था। मगर इस साजिश की बुनियाद इतनी खोखली थी कि ट्रायल के दौरान सच खुद-ब-खुद चीखने लगा।

अदालत की कार्यवाही के दौरान यह चौंकाने वाला सच सामने आया कि शिकायत करने वाला परिवादी खुद कभी कोर्ट में गवाही देने नही आया।

कई बार समन भेजने के बावजूद वह गायब रहा। वहीं इस मामले के सबसे बड़े स्वतंत्र गवाहों भगवान सहाय और सुभाषचंद ने भरी अदालत में अपनी अंतरात्मा की आवाज सुनी और साफ कह दिया कि उन्होंने न तो कभी श्रवण कुमार को रिश्वत मांगते देखा और न ही पैसे लेते देखा। गवाहों ने साफ किया कि कथित राशि श्रवण कुमार के हाथ में नहीं, बल्कि जमीन पर लावारिस पड़ी हुई मिली थी।

जिंदा जमीर लोगो ने अदालत के सामने बोल दिया सच
बचाव पक्ष के गवाह कांस्टेबल प्यारेलाल और पुख्ता दस्तावेजों ने अदालत के सामने यह कड़वा सच भी रखा कि घटना से कुछ दिन पहले ही श्रवण कुमार ने अपनी ड्यूटी निभाते हुए परिवादी के खिलाफ शांतिभंग की धारा 151 के तहत कार्रवाई की थी। इसी बात की खुंदक और दुर्भावना में आकर एक ईमानदार पुलिसकर्मी को फंसाने का यह घिनौना चक्रव्यूह रण रचा गया था।

माननीय न्यायालय ने अपने फैसले में पूरी संवेदनशीलता से माना कि केवल किसी रासायनिक जांच या कथित बरामदगी मात्र से किसी बेगुनाह को गुनहगार नहीं ठहराया जा सकता, जब तक कि रिश्वत की मांग और उसे स्वीकार करने का कोई विश्वसनीय प्रमाण न हो। अभियोजन पक्ष की झूठी कहानियों में विरोधाभास को देखते हुए कोर्ट ने श्रवण कुमार को “संदेह का लाभ देते हुए बरी कर दिया।

एक बेदाग करियर पर लगा वो गहरा जख्म…
कानूनन तो श्रवण कुमार आज जीत गए, लेकिन सोचिए उस इंसान और उसके परिवार पर क्या गुजरी होगी? एक पुलिस अधिकारी के लिए, जिसने अपनी पूरी जवानी समाज की सुरक्षा और विभाग की साख को बनाए रखने में होम कर दी हों, उसके लिए बेईमानी का एक दाग भी मौत से बदतर होता है। साल 2016 से लेकर 2026 तक… पूरे 10 साल! उम्र का एक ऐसा पड़ाव (59 वर्ष की उम्र) जो सुकून और सम्मान से कटना चाहिए था, उसे श्रवण कुमार ने समाज की तिरछी नजरों, विभाग के निलंबन, अपनों के भीतर उठते सवालों और अदालतों के चक्करों के गहरे मानसिक संताप में काटा।

इस झूठे केस ने उनसे उनकी मानसिक शांति, रात की नींद और वह सम्मान छीन लिया जिसके वो हकदार थे। आज भले ही अदालत ने उन्हें दोषमुक्त कर उनके माथे से वो कलंक मिटा दिया है और न्याय व्यवस्था में जनता का भरोसा अटूट किया है, लेकिन हमारी व्यवस्था को यह सोचना चाहिए कि किसी बेगुनाह पर लगे झूठे आरोपों के कारण जो उसके जीवन के १० साल की खुशियाँ, चैन और प्रतिष्ठा खाक हो गई, उसका क्या होगा?

श्रवण कुमार को इस जीत पर बधाई, उनके धैर्य और सच्चाई की इस लड़ाई को सलाम। सत्य की जीत तो हुई, पर बहुत कुछ खोने के बाद!

दो पक्ष आपस में लड़ रहे थे मेने 151 में दोनो को बंद कर दिया था जिसके बाद एक व्यक्ति ने रंजिश के तहत ये सब किया यह मामला होने के बाद मुझे सस्पेंड कर दिया गया था जोधपुर, बीकानेर कई जगह गए लंबे समय से चुरू पुलिस लाइन में हूं। सत्य की जीत हुई हैं।
श्रवण कुमार मानावत एएसआई राजस्थान पुलिस

Related Articles

Mantratoto luwakpoker aladin66 tupaiwin rupiah89