अनीता शर्मा ने सिखाया धरती को हरा-भरा बनाने का हुनर, जयपुर में मिला सर्वोच्च सम्मान
अकेले चले थे... अब कारवां बन रहा है, व्याख्याता अनीता शर्मा को ‘आरईईसीसी पर्यावरण पुरस्कार 2026’, जिनकी आवाज सुनकर हजारों लोगों ने थामी पौधों की कमान
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : कैलाश बबेरवाल
झुंझुनूं : झुंझुनूं जिले के कल्याण राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय की व्याख्याता और प्रख्यात पर्यावरण कार्यकर्ता अनीता शर्मा को जयपुर के होटल क्लार्क्स आमेर में आयोजित राज्य स्तरीय ‘विश्व पर्यावरण दिवस शिखर सम्मेलन’ में प्रतिष्ठित आरईईसीसी पर्यावरण पुरस्कार 2026 से सम्मानित किया गया है। पूर्व विधायक सीपी जोशी, प्रशासनिक अधिकारी समीत शर्मा और केईआई के सीएमओ गोविंद शर्मा जैसे दिग्गजों ने उन्हें यह सम्मान सौंपकर उनके जज्बे को सलाम किया।
पुरस्कार तो एक बहाना है, असली मकसद धरती को बचाना है!
अनीता शर्मा को यह पुरस्कार केवल एक औपचारिकता के लिए नहीं, बल्कि उनके द्वारा किए गए उस ‘साइलेंट रिवोल्यूशन’ यानि मौन क्रांति के लिए मिला है, जिसने झुंझुनूं और आस-पास के इलाकों की तस्वीर बदल दी है। जहां लोग सोशल मीडिया पर वक्त बिता रहे हैं, वहीं अनीता शर्मा ने ‘रेडियो’ के पारंपरिक और सशक्त माध्यम को चुना। उन्होंने अपनी आवाज के जादू से रेडियो के जरिए घर-घर, ढाणी-ढाणी तक यह संदेश पहुंचाया कि अगर आज पानी और पेड़ नहीं बचाए, तो हमारा कल नहीं होगा। उन्होंने लोगों को सिखाया कि पेड़ लगाना सिर्फ फोटो खिंचवाने का जरिया नहीं है। उनके नेतृत्व में हजारों पौधों को गोद लिया गया और उन्हें पेड़ बनने तक पाला गया। डार्क जोन की तरफ बढ़ रहे शेखावाटी क्षेत्र में उन्होंने जल संरक्षण के पारंपरिक तरीकों को पुनर्जीवित करने के लिए अनूठा अभियान चलाया।
अनीता शर्मा सिर्फ एक नाम नहीं, एक प्रेरणा हैं। आज के इस दौर में जब ग्लोबल वार्मिंग और भीषण गर्मी से दुनिया परेशान है, तब अनीता शर्मा जैसे जमीनी सितारे हमें उम्मीद देते हैं। रेडियो और धरातल पर किया गया उनका यह प्रयास हर युवा और नागरिक के लिए एक सीख है कि हम अपने स्तर पर भी बड़ा बदलाव ला सकते हैं। अनीता शर्मा को मिला यह सम्मान सिर्फ उनकी उपलब्धि नहीं है, बल्कि यह हम सभी के लिए एक ‘वेक-अप कॉल’ अर्थात प्रेरणा है।
उदयपुरवाटी की स्कूल से निकलकर राज्य स्तर पर अपनी पहचान बनाने वाली यह शिक्षिका हमें सिखाती हैं कि पर्यावरण को बचाने के लिए सरकार या किसी संस्था के भरोसे बैठने की जरूरत नहीं है। सभी को अपने बच्चों के जन्मदिन पर कम से कम एक पौधा जरूर लगाएं और उसे बड़ा करने की जिम्मेदारी लें। पानी की बर्बादी रोकें, क्योंकि जल ही जीवन का आधार है। पर्यावरण के प्रति खुद भी जागरूक हों और दूसरों को भी प्रेरित करें।
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