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केवल वृक्षारोपण नहीं, वृक्षों का संरक्षण ही सच्चा पर्यावरण धर्म – गजराज शर्मा


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केवल वृक्षारोपण नहीं, वृक्षों का संरक्षण ही सच्चा पर्यावरण धर्म – गजराज शर्मा

केवल वृक्षारोपण नहीं, वृक्षों का संरक्षण ही सच्चा पर्यावरण धर्म - गजराज शर्मा

आज के समय में पर्यावरण संरक्षण एक गंभीर और महत्वपूर्ण विषय बन चुका है। हर वर्ष 5 जून को विश्व पर्यावरण दिवस बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है। इस दिन अनेक संस्थाएं, युवा वर्ग और आमजन वृक्षारोपण करते हैं, फोटो खिंचवाते हैं और सोशल मीडिया पर जागरूकता का संदेश देते हैं। लेकिन सवाल यह है कि क्या केवल एक दिन पेड़ लगाकर हम पर्यावरण की रक्षा कर सकते हैं? वास्तविकता यह है कि केवल पौधा लगाना पर्याप्त नहीं है। यदि उसकी नियमित देखभाल, सिंचाई, सुरक्षा और संरक्षण नहीं किया जाए, तो वह पौधा कुछ ही दिनों में सूख जाता है। ऐसे में वृक्षारोपण का उद्देश्य अधूरा रह जाता है और यह केवल एक औपचारिकता बनकर रह जाता है।

पत्रकार गजराज शर्मा, बीदासर (चूरु), जनमानस शेखावाटी न्यूज संववादाता (सुजानगढ़ विधानसभा क्षेत्र)

आज समाज में एक प्रवृत्ति देखने को मिल रही है कि लोग केवल दिखावे के लिए वृक्षारोपण करते हैं। फोटो खिंचवाना और सोशल मीडिया पर पोस्ट करना ही उनका मुख्य उद्देश्य बन गया है। लेकिन पर्यावरण संरक्षण केवल एक दिन का कार्य नहीं, बल्कि यह निरंतर चलने वाली जिम्मेदारी है। ब्यूरो चीफ ब स्थानीय बीदासर पत्रकार गजराज शर्मा का कहना है कि “यदि हम सच में पर्यावरण को बचाना चाहते हैं, तो हमें लगाए गए पौधों की जिम्मेदारी भी लेनी होगी। जब तक पौधा एक मजबूत वृक्ष नहीं बन जाता, तब तक उसकी देखभाल करना हमारा कर्तव्य है।”हमें यह समझना होगा कि एक पेड़ न केवल हमें ऑक्सीजन देता है, बल्कि यह जलवायु संतुलन बनाए रखने, प्रदूषण कम करने और जीव-जंतुओं के जीवन को सुरक्षित रखने में भी महत्वपूर्ण भूमिका निभाता है। इसलिए हर व्यक्ति को यह संकल्प लेना चाहिए कि वह केवल पेड़ लगाएगा ही नहीं, बल्कि उसकी देखभाल भी अवश्य करेगा।

सरकार, समाज और आमजन सभी को मिलकर इस दिशा में ठोस कदम उठाने होंगे। स्कूलों, कॉलेजों और सामाजिक संगठनों को भी वृक्षारोपण के साथ-साथ “वृक्ष संरक्षण अभियान” चलाना चाहिए, ताकि लोग इस जिम्मेदारी को समझें और निभाएं। अंततः, यही कहा जा सकता है कि पर्यावरण बचाने के लिए केवल एक दिन की पहल नहीं, बल्कि निरंतर प्रयास आवश्यक हैं। जब तक हम पौधों को वृक्ष बनने तक संवारने की जिम्मेदारी नहीं निभाएंगे, तब तक हरियाली का सपना अधूरा ही रहेगा।

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