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पर्यावरण संरक्षण से ही संभव है सतत विकास : प्रो. निष्ठा जसवाल


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पर्यावरण संरक्षण से ही संभव है सतत विकास : प्रो. निष्ठा जसवाल

पर्यावरण संरक्षण से ही संभव है सतत विकास : प्रो. निष्ठा जसवाल

जयपुर : विश्व पर्यावरण दिवस के अवसर पर डॉ. भीमराव अम्बेडकर विधि विश्वविद्यालय, जयपुर द्वारा “स्वदेशी संरक्षण पद्धतियों के माध्यम से सतत विकास” विषय पर ऑनलाइन विशेष व्याख्यान का आयोजन किया गया। कार्यक्रम की अध्यक्षता कुलगुरु प्रो. (डॉ.) निष्ठा जसवाल ने की, जबकि प्रख्यात पर्यावरणविद् एस.पी. मेहरा मुख्य वक्ता रहे।

कुलगुरु प्रो. जसवाल ने कहा कि भारतीय संस्कृति में प्रकृति को पूजनीय माना गया है। पर्यावरण संरक्षण केवल नीतिगत विषय नहीं, बल्कि मानवीय जिम्मेदारी भी है। उन्होंने कहा कि सतत विकास लक्ष्यों की प्राप्ति के लिए पर्यावरण संरक्षण और विकास के बीच संतुलन आवश्यक है।

मुख्य वक्ता एस.पी. मेहरा ने भारतीय पारंपरिक एवं स्वदेशी संरक्षण पद्धतियों की उपयोगिता पर प्रकाश डालते हुए कहा कि स्थानीय ज्ञान और पारंपरिक जीवनशैली आज भी पर्यावरणीय चुनौतियों के समाधान प्रस्तुत करती हैं। उन्होंने बिश्नोई समुदाय की संरक्षण परंपराओं, पारंपरिक जल संरक्षण प्रणालियों और सामुदायिक संसाधन प्रबंधन के उदाहरण साझा किए।

उन्होंने युवाओं से पर्यावरण संरक्षण को जीवनशैली का हिस्सा बनाने तथा स्थानीय संरक्षण परंपराओं के संवर्धन में सक्रिय भूमिका निभाने का आह्वान किया। संवाद सत्र में प्रतिभागियों के प्रश्नों के उत्तर भी दिए गए।

कार्यक्रम का समन्वयन डॉ. मीनाक्षी कुमावत ने किया। कुलसचिव वीरेंद्र वर्मा ने अतिथियों एवं प्रतिभागियों का आभार व्यक्त किया। कार्यक्रम में विश्वविद्यालय के शिक्षक, शोधार्थी, विद्यार्थी एवं कर्मचारी बड़ी संख्या में ऑनलाइन जुड़े।

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