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मंढोली में खनन पट्टे देने पर विरोध प्रदर्शन:रैली निकालकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे लोग, खनन शुरू करने पर रास्ता बंद करने की चेतावनी


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मंढोली में खनन पट्टे देने पर विरोध प्रदर्शन:रैली निकालकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे लोग, खनन शुरू करने पर रास्ता बंद करने की चेतावनी

मंढोली में खनन पट्टे देने पर विरोध प्रदर्शन:रैली निकालकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे लोग, खनन शुरू करने पर रास्ता बंद करने की चेतावनी

नीमकाथाना : ग्राम पंचायत मंढोली में प्रस्तावित खनन पट्टे को लेकर ग्रामीणों का विरोध लगातार तेज होता जा रहा है। गुरुवार को ग्रामीणों ने खेतड़ी मोड़ से एसडीएम कार्यालय तक पैदल आक्रोश रैली निकाली। ग्रामीणों ने राज्यपाल के नाम एसडीएम राजवीर यादव को ज्ञापन सौंपा और खनन के लिए प्रस्तावित चार ब्लॉकों का अलॉटमेंट निरस्त करने की मांग की।

कड़ी धूप के बीच महिलाओं ने छोटे-छोटे बच्चों को गोद में लेकर विरोध प्रदर्शन में भाग लिया। ग्रामीण हाथों में बैनर और तख्तियां लेकर एसडीएम कार्यालय पहुंचे तथा जमकर नारेबाजी की। प्रदर्शन के दौरान महिलाओं ने चेतावनी देते हुए कहा कि यदि गांव में खनन शुरू किया गया तो खनन कारोबारियों और खनन वाहनों के लिए गांव के रास्ते बंद कर दिए जाएंगे।

आबादी भूमि के पास खनन पट्टे देने का विरोध

सरपंच मुरारी यादव ने बताया -प्रस्तावित खनन पट्टा ग्राम पंचायत मंढोली की चारागाह भूमि, आबादी क्षेत्र और धार्मिक स्थलों के नजदीक प्रस्तावित किया गया है, जिससे पशुओं के चराई क्षेत्र, ग्रामीणों के मकानों, मंदिरों और पर्यावरण को गंभीर नुकसान पहुंच सकता है। खनन शुरू होने पर धूल, ध्वनि प्रदूषण, कंपन और पर्यावरणीय क्षति बढ़ेगी, जिसका सीधा असर ग्रामीणों के स्वास्थ्य और जनजीवन पर पड़ेगा। ग्रामीणों ने यह भी आरोप लगाया कि खनन के लिए तैयार की गई पर्यावरणीय प्रभाव आंकलन (EIA) रिपोर्ट में गांव की वास्तविक आबादी, चारागाह भूमि, पशुधन और सामूहिक पर्यावरणीय प्रभावों का सही मूल्यांकन नहीं किया गया है।

सीबीआई जांच की मांग

ग्रामीणों का कहना है कि प्रस्तावित पहाड़ी पूरी तरह आबादी क्षेत्र के पास है और गांव के 4 से 5 मंदिर भी प्रभावित क्षेत्र में शामिल हैं। ग्रामीणों ने चारागाह भूमि होने के बावजूद ग्राम पंचायत की ओर से जारी एनओसी की निष्पक्ष जांच, पटवारी हल्का मंढोली की भूमि का पुनः सर्वे और पूरे मामले की सीबीआई जांच कराने की मांग भी उठाई। साथ ही प्रशासन से खनन पट्टे का अलॉटमेंट तत्काल प्रभाव से निरस्त कर पर्यावरण और जनहित को ध्यान में रखते हुए निष्पक्ष कार्रवाई करने की मांग की।

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