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एसबीआई इंश्योरेंस को क्लेम भुगतान के आदेश:हार्ट ऑपरेशन खर्च नहीं लौटाने पर कंपनी पर ब्याज, जुर्माना और खर्च लगाया


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एसबीआई इंश्योरेंस को क्लेम भुगतान के आदेश:हार्ट ऑपरेशन खर्च नहीं लौटाने पर कंपनी पर ब्याज, जुर्माना और खर्च लगाया

एसबीआई इंश्योरेंस को क्लेम भुगतान के आदेश:हार्ट ऑपरेशन खर्च नहीं लौटाने पर कंपनी पर ब्याज, जुर्माना और खर्च लगाया

झुंझुनूं : झुंझुनूं जिला उपभोक्ता विवाद प्रतितोष आयोग ने स्वास्थ्य बीमा क्लेम का भुगतान नहीं करने के मामले में एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी के रवैये पर कड़ी टिप्पणी करते हुए उपभोक्ता के पक्ष में महत्वपूर्ण फैसला सुनाया है। आयोग ने कहा कि बीमा कंपनियों का वैधानिक एवं नैतिक दायित्व है कि वे उपभोक्ताओं को पॉलिसी की शर्तें सरल एवं स्पष्ट भाषा में समझाएं।

आयोग के अध्यक्ष मनोज कुमार मील एवं सदस्य प्रमेन्द्र कुमार सैनी की पीठ ने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी तथा एसबीआई लुहारू शाखा को सेवा में कमी एवं उपभोक्ता को मानसिक प्रताड़ना पहुंचाने का दोषी मानते हुए क्लेम राशि, ब्याज, हर्जाना एवं कानूनी खर्च का भुगतान करने के आदेश दिए हैं।

आयोग ने अपने आदेश में कहा कि पीड़ित उपभोक्ता को इलाज पर खर्च हुए 3 लाख 94 हजार 194 रुपये की राशि 20 फरवरी 2018 से वास्तविक भुगतान की तिथि तक 9 प्रतिशत वार्षिक ब्याज सहित अदा की जाए। इसके अतिरिक्त मानसिक एवं शारीरिक प्रताड़ना के लिए 45 हजार रुपये हर्जाना तथा 5 हजार 500 रुपये कानूनी खर्च के रूप में देने के भी निर्देश दिए गए हैं।

प्रकरण के अनुसार सूरजगढ़ तहसील के गांव पीपली निवासी प्रदीप कुमार ने जिला आयोग में परिवाद प्रस्तुत किया था। प्रदीप कुमार का खाता भारतीय स्टेट बैंक की लुहारू शाखा में था, जहां से उन्होंने एसबीआई जनरल इंश्योरेंस कंपनी की समूह स्वास्थ्य बीमा पॉलिसी ली थी। यह पॉलिसी 10 दिसंबर 2016 से 9 दिसंबर 2017 तक प्रभावी थी, जिसके लिए उन्होंने 3 हजार 600 रुपये प्रीमियम जमा कराया था।

बीमा अवधि के दौरान जुलाई 2017 में प्रदीप कुमार को हृदय संबंधी गंभीर बीमारी हो गई। उन्हें जयपुर के फोर्टिस एस्कॉर्ट हॉस्पिटल में भर्ती कराया गया, जहां हार्ट ऑपरेशन एवं वाल्व ट्रांसप्लांट किया गया। इलाज, दवाइयों एवं अस्पताल खर्च सहित कुल 3 लाख 94 हजार 194 रुपये खर्च हुए।

इलाज के बाद प्रदीप कुमार ने सभी आवश्यक दस्तावेज एवं बिल बीमा कंपनी को प्रस्तुत कर क्लेम मांगा, लेकिन कंपनी ने दावा स्वीकृत नहीं किया। बाद में कंपनी ने यह कहते हुए क्लेम खारिज कर दिया कि जरूरी दस्तावेज प्राप्त नहीं हुए हैं। मामला आयोग पहुंचने पर कंपनी ने क्षेत्राधिकार एवं अन्य तकनीकी आपत्तियां भी उठाईं।

आयोग ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद बीमा कंपनी की सभी तकनीकी आपत्तियों को खारिज कर दिया। आयोग ने स्पष्ट किया कि उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत परिवादी अपने निवास क्षेत्र वाले आयोग में शिकायत दर्ज करा सकता है। चूंकि प्रदीप कुमार झुंझुनूं जिले के निवासी हैं तथा पॉलिसी में भी यही पता दर्ज था, इसलिए झुंझुनूं आयोग को मामले की सुनवाई का पूर्ण अधिकार है।

रिकॉर्ड की जांच में आयोग ने पाया कि उपभोक्ता ने अस्पताल के सभी मूल बिल एवं रसीदें समय पर जमा कराई थीं तथा बीमा कंपनी के पास क्लेम रोकने का कोई ठोस आधार नहीं था। आयोग ने टिप्पणी करते हुए कहा कि कानूनी मुद्दों पर निर्णय होने के बाद भी बार-बार तकनीकी आपत्तियां उठाना न्याय प्रक्रिया को अनावश्यक रूप से लंबा खींचने जैसा है, जबकि उपभोक्ता कानून का उद्देश्य आमजन को त्वरित एवं प्रभावी न्याय उपलब्ध कराना है।

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