गाजे-बाजे के साथ निकली बाईसा स्नेह यात्रा, सुलताना में फिर जीवंत हुई राजस्थानी संस्कृति
गाजे-बाजे के साथ निकली बाईसा स्नेह यात्रा, सुलताना में फिर जीवंत हुई राजस्थानी संस्कृति
सुलताना : भागदौड़ भरी जिंदगी, बदलते सामाजिक परिवेश और रिश्तों में बढ़ती दूरियों के बीच झुंझुनूं जिले के सुलताना कस्बे में आयोजित बाईसा स्नेह मिलन समारोह भावनाओं, संस्कृति और पारिवारिक जुड़ाव का अनूठा संगम बन गया। मालुपुरा रोड स्थित जमवाय माता गेस्ट हाउस परिसर में चल रहे तीन दिवसीय समारोह के दूसरे दिन ऐसा भावुक नजारा देखने को मिला, जिसने हर किसी को भावुक कर दिया। बरसों बाद मायके और गांव लौटी बहन-बेटियों ने बचपन की यादों, रिश्तों की मिठास और राजस्थानी संस्कृति को फिर से जीवंत कर दिया।
समारोह के दूसरे दिन सुबह बहन-बेटियों को सुलताना कस्बे में भव्य नगर भ्रमण करवाया गया। कार्यक्रम की शुरुआत गणेश वंदना और जमवाय माता मंदिर में पूजा-अर्चना के साथ हुई। इसके बाद पारंपरिक राजस्थानी वेशभूषा में सजी बहन-बेटियां गाजे-बाजे के साथ शोभायात्रा के रूप में कस्बे के देवस्थानों के दर्शन के लिए निकलीं।सबसे पहले गढ़ परिसर स्थित शक्ति गुमान कंवर मंदिर में दर्शन किए गए। इसके बाद नगर के आराध्य देव गोपीनाथ मंदिर में पूजा-अर्चना की गई तथा सुलताना के संस्थापक हाथीराम जी की प्रतिमा स्थल पर पहुंचकर श्रद्धासुमन अर्पित किए गए।

इस दौरान पुरुषों ने केसरिया साफा, धोती-कुर्ता पहनकर राजस्थानी परंपरा की झलक पेश की।कस्बे के मुख्य मार्गों से निकली शोभायात्रा के दौरान स्थानीय लोगों ने घरों की छतों और रास्तों पर खड़े होकर पुष्प वर्षा कर बाहर से आई बहन-बेटियों का स्वागत किया। पूरे कस्बे में लोकसंस्कृति, पारंपरिक संगीत और उत्साह का माहौल देखने को मिला। महिलाओं ने लोकगीत गाते हुए घूमर नृत्य प्रस्तुत किया, वहीं युवाओं और कलाकारों ने भी सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से समां बांध दिया। स्नेह मिलन समारोह में बचपन की यादों को ताजा करने के लिए पारंपरिक खेल प्रतियोगिताओं का भी आयोजन किया गया। बहनों और भोजाइयों ने चम्मच दौड़, रस्साकशी, पकड़म-पकड़ाई जैसे खेलों में उत्साहपूर्वक भाग लिया।
इन खेलों ने वर्षों पुराने अपनत्व और पारिवारिक रिश्तों को फिर से ताजा कर दिया।आयोजकों के अनुसार समारोह में बाड़मेर, करौली, अजमेर, पाली, भीलवाड़ा, जैसलमेर, राजसमंद, सिरोही, चूरू, नागौर, बीकानेर, जोधपुर, जयपुर और सीकर सहित राजस्थान के विभिन्न जिलों के अलावा महाराष्ट्र, हरियाणा और मध्यप्रदेश से करीब 300 विवाहित बहन-बेटियां शामिल हुई हैं। इनमें कई महिलाएं ऐसी भी हैं जो वर्षों बाद अपने मायके और गांव पहुंची हैं, जिससे यह आयोजन भावनात्मक मिलन का केंद्र बन गया।समारोह में बाहर से पधारी बहन-बेटियों का दुपट्टा ओढ़ाकर और पुष्पगुच्छ भेंट कर सम्मान किया गया। दोपहर में आयोजित सामूहिक भोज में पारंपरिक मारवाड़ी व्यंजनों का स्वाद परोसा गया। पूरे आयोजन में सामाजिक संवाद, सांस्कृतिक प्रस्तुतियों, पारिवारिक मेल-मिलाप और राजस्थानी परंपराओं का अद्भुत संगम देखने को मिला।
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