भीषण गर्मी में पंखे नहीं चलाने को लेकर स्कूल में विवाद, वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल
अभिभावक ने लगाए गंभीर आरोप, जांच के बाद ही सामने आएगी वास्तविकता
फतेहपुर : फतेहपुर क्षेत्र के ग्राम ठिमोली स्थित ग्रामीण विकास पब्लिक उच्च प्राथमिक संस्कृत विद्यालय में कक्षा कक्षों में पंखे नहीं चलाने के आरोप को लेकर अभिभावक और विद्यालय प्रबंधन के बीच विवाद का मामला सामने आया है। घटना से जुड़ा एक वीडियो सोशल मीडिया पर तेजी से वायरल हो रहा है, जिसमें अभिभावक और विद्यालय प्रबंधन के बीच तीखी बहस दिखाई दे रही है।
वायरल वीडियो में अभिभावक आरोप लगाते नजर आ रहे हैं कि भीषण गर्मी के बावजूद विद्यालय में पंखे नहीं चलाए जा रहे, जिसके कारण उनके बच्चे की तबीयत खराब हो गई। अभिभावक का दावा है कि चिकित्सकीय परामर्श के दौरान बच्चे की तबीयत खराब होने का कारण अत्यधिक गर्मी और उमस बताया गया। इसी को लेकर उन्होंने विद्यालय प्रबंधन से जवाब मांगा।

सोशल मीडिया पर प्रसारित वीडियो में विद्यालय प्रबंधन और अभिभावक के बीच बहस के साथ दुर्व्यवहार एवं धक्का-मुक्की के आरोप भी लगाए गए हैं। कुछ पोस्टों में यह दावा भी किया गया है कि विद्यालय प्रबंधन ने पंखे चलाने को लेकर आपत्तिजनक टिप्पणी की। हालांकि इन सभी आरोपों और दावों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हो सकी है।
RTE विद्यार्थियों की सुविधाओं को लेकर उठे सवाल
वीडियो वायरल होने के बाद सोशल मीडिया पर यह बहस भी तेज हो गई है कि क्या राइट टू एजुकेशन (RTE) के तहत प्रवेश पाने वाले विद्यार्थियों को विद्यालय में समान सुविधाएं उपलब्ध कराई जा रही हैं। शिक्षा नियमों के अनुसार RTE के अंतर्गत अध्ययनरत विद्यार्थियों को भी अन्य विद्यार्थियों के समान सभी शैक्षणिक और आधारभूत सुविधाएं उपलब्ध कराना आवश्यक है।

प्रशासनिक जांच का इंतजार
मामले को लेकर अभी तक विद्यालय प्रबंधन अथवा शिक्षा विभाग की ओर से कोई आधिकारिक बयान सामने नहीं आया है। यदि संबंधित पक्षों द्वारा शिक्षा विभाग या पुलिस प्रशासन को शिकायत दी गई है, तो जांच के बाद ही पूरे घटनाक्रम की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सकेगी।
स्थानीय लोगों का कहना है कि विद्यार्थियों की सुविधा और शिक्षा से जुड़े मुद्दों का समाधान संवाद, पारदर्शिता और नियमानुसार कार्रवाई के माध्यम से होना चाहिए, ताकि बच्चों की पढ़ाई और स्वास्थ्य पर किसी प्रकार का प्रतिकूल प्रभाव न पड़े।
यह समाचार सोशल मीडिया पर वायरल वीडियो, उसमें किए गए दावों और उपलब्ध सूचनाओं पर आधारित है। वीडियो में लगाए गए आरोपों अथवा कथित बयानों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। मामले की वास्तविकता संबंधित विभागीय जांच अथवा आधिकारिक तथ्य सामने आने के बाद ही स्पष्ट होगी।
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