झुंझुनूं रजिस्ट्री विभाग में रिकॉर्ड गायब!
आरटीआई ने खोली प्रशासनिक लापरवाही की परतें, “फाइल नहीं मिली” जवाब से मचा हड़कंप
जनमानस शेखावाटी सवांददाता : चंद्रकांत बंका
झुंझुनूं : राजस्थान सरकार के पंजीयन एवं मुद्रांक विभाग के उप पंजीयक कार्यालय झुंझुनूं से जुड़ा एक बेहद गंभीर मामला सामने आया है, जिसने सरकारी रिकॉर्ड की सुरक्षा व्यवस्था और विभागीय कार्यप्रणाली पर बड़े सवाल खड़े कर दिए हैं। सूचना का अधिकार (RTI) के तहत मांगी गई जानकारी के जवाब में विभाग ने संबंधित रिकॉर्ड और पत्रावली उपलब्ध नहीं होने की बात स्वीकार की है। इस खुलासे के बाद प्रशासनिक हलकों में हड़कंप मच गया है और आमजन के बीच भी चिंता का माहौल बन गया है।
जानकारी के अनुसार उप पंजीयक कार्यालय झुंझुनूं द्वारा जारी कार्यालय आदेश क्रमांक 121 दिनांक 30 अप्रैल 2026 में उल्लेख किया गया कि आरटीआई पोर्टल पर आवेदन संख्या 180048527388459, 180074800515351, 180194415843699 एवं 180455721615768 प्राप्त हुए थे। इन आवेदनों में दस्तावेज संख्या 2101 दिनांक 7 जून 2018 तथा दस्तावेज संख्या 2157 दिनांक 30 मई 2019 से संबंधित नोटिस एवं रिकॉर्ड की जानकारी मांगी गई थी।
आरटीआई अधिनियम 2005 के तहत सूचना उपलब्ध करवाने के लिए विभागीय स्तर पर रिकॉर्ड तलाशने की प्रक्रिया शुरू की गई। इसके लिए त्रिलोक सिंह (सहायक प्रशासनिक अधिकारी), विद्याधर महला (वरिष्ठ सहायक) तथा दिव्या चौधरी (वरिष्ठ सहायक) को रिकॉर्ड की जांच कर रिपोर्ट प्रस्तुत करने के निर्देश दिए गए।
जांच रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
जांच के बाद जो रिपोर्ट सामने आई उसने पूरे मामले को और गंभीर बना दिया। कार्यालय आदेश के नीचे दर्ज हस्तलिखित टिप्पणी में बताया गया कि संबंधित फाइलों एवं पत्रावलियों की जांच की गई, लेकिन रिकॉर्ड रजिस्टर में उक्त दस्तावेजों से जुड़ी पत्रावली उपलब्ध नहीं मिली। इतना ही नहीं, संबंधित शाखाओं में भी रिकॉर्ड नहीं पाया गया।
सरकारी विभाग में पंजीकृत दस्तावेजों का रिकॉर्ड गायब होना साधारण त्रुटि नहीं माना जा रहा। खासकर तब, जब मामला जमीन, संपत्ति और कानूनी दस्तावेजों से जुड़ा हो। ऐसे में रिकॉर्ड का नहीं मिलना विभागीय रिकॉर्ड प्रबंधन और जवाबदेही पर गंभीर सवाल खड़े कर रहा है।
आमजन के भरोसे पर असर
प्रशासनिक जानकारों का कहना है कि पंजीयन विभाग का रिकॉर्ड आमजन की संपत्तियों और कानूनी अधिकारों से सीधे जुड़ा होता है। यदि ऐसे महत्वपूर्ण दस्तावेज सुरक्षित नहीं रह पा रहे हैं, तो इससे सरकारी तंत्र पर लोगों का भरोसा प्रभावित होना स्वाभाविक है। आरटीआई कानून पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने के उद्देश्य से बनाया गया है, लेकिन जब विभाग खुद रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की बात स्वीकार करे, तो यह स्थिति प्रशासनिक व्यवस्था के लिए बेहद असहज मानी जा रही है।
अब जांच और जवाबदेही पर निगाहें
मामला सामने आने के बाद अब लोगों की नजर इस बात पर टिकी है कि क्या रिकॉर्ड गायब होने के कारणों की विस्तृत जांच कर जिम्मेदार अधिकारियों और कर्मचारियों की जवाबदेही तय की जाएगी या फिर यह मामला केवल विभागीय फाइलों तक सीमित रह जाएगा। इस पूरे घटनाक्रम ने सरकारी रिकॉर्ड सुरक्षा, दस्तावेज संरक्षण और प्रशासनिक पारदर्शिता को लेकर एक नई बहस छेड़ दी है।
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