डिजिटल इंडिया की खुली पोल एक हफ्ते से वेंटिलेटर पर ‘वाहन पोर्टल… क्या लेट फीस में मिलेगी जनता को राहत? जनता परेशान…
सिस्टम का 'सर्वर डाउन' जिम्मेदार अफसरों ने ओढ़ी चुप्पी की चादर एक दूसरे पर जिम्मेदारी डालते नजर आए अधिकारी
जनमानस शेखावाटी : आबिद खान (चीफ इन्वेस्टिगेटर जर्नलिस्ट)
सीकर : राजस्थान में परिवहन विभाग की कागजी उड़ान अब जमीन पर रेंगती नजर आ रही है। जिस ‘डिजिटल इंडिया’ के दम पर हम फाइलों के युग को पीछे छोड़ने का दावा कर रहे थे, उसी का एक महत्वपूर्ण स्तंभ यानी ‘वाहन पोर्टल’ पिछले एक सप्ताह से रेंगता नजर आ रहा है। यह महज एक तकनीकी खराबी नहीं, बल्कि उन लाखों प्रदेशवासियों के साथ एक क्रूर मजाक है जो अपने ही काम के लिए दफ्तरों के चक्कर काटने को मजबूर हैं।
राजधानी जयपुर से लेकर शेखावाटी की धरती सीकर सहित कई जिलों तक, परिवहन कार्यालयों का आलम यह है कि वहां काम नहीं, सिर्फ इंतजार हो रहा है। साहबों की कुर्सियां तो एसी में सलामत हैं, लेकिन पोर्टल की सांसो का दम घुटता नजर आ रहा हैं। और ऐसा लग रहा हैं जैसे पोर्टल आईसीयू में एडमिट चल रहा हैं।
तकनीकी प्रयोग या जनता का टॉर्चर?
बताया जा रहा है कि एन आई सी इस पोर्टल को पुराने सिस्टम से हटाकर ‘जियो क्लाउड’ पर माइग्रेट कर रहा है। विभाग के इस ‘डिजिटल एक्सपेरिमेंट’ ने ऐसा रायता फैलाया है कि नए वाहनों के रजिस्ट्रेशन से लेकर एनओसी और हाइपोथेकेशन रिमूवल रजिस्ट्रेशन तक के पहिए जाम कर दिए हैं। शोरूम में नई गाड़ियां खड़ी हैं, पर सड़कों पर निकलने के लिए उनके पास ‘डिजिटल अनुमति’ नहीं है। नए वाहन खरीददार वाहन के मुहर्रत से पहले डिजिटल पोर्टल के चलने के मूहर्रत का इंतजार करते नजर आ रहे हैं। सवाल यह है कि जब माइग्रेशन इतना ही जरूरी था, तो क्या बैक-अप की कोई तैयारी नहीं थी? क्या जनता का समय इतना सस्ता है कि उसे सिस्टम के ‘अपग्रेड’ होने तक बंधक बना लिया जाए?

साहब’ का वर्जन या जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ने का हुनर?
जब इस महा-अव्यवस्था पर जनमानस शेखावाटी की टीम ने जवाबदेही तय करने की कोशिश की, तो विभाग के भीतर ‘पासिंग द पार्सल’ का खेल देखने को मिला। सीकर डीटीओ ताराचंद बंजारा ने स्वीकार तो किया कि समस्या गंभीर है, लेकिन जिम्मेदारी लेने के बजाय गेंद उच्चाधिकारियों के पाले में डालते नजर आए । उन्होंने स्पष्ट कहा कि वे महज सीकर डीटीओ हैं, वर्जन के लिए संभाग के आरटीओ मथुरा प्रसाद मीणा से बात की जाए।
इस गंभीर समस्या पर आरटीओ सीकर की चुप्पी
हैरानी की बात तो यह है कि जब जनमानस शेखावाटी की टीम ने आरटीओ मथुरा प्रसाद मीणा से संपर्क साधने की कोशिश की, तो साहब की चुप्पी किसी रहस्य से कम नहीं लगी। दो दिनों में 7 बार कॉल और व्हाट्सएप पर लगातार मैसेज कर जानकारी मांगने के बावजूद आरटीओ साहब ने न तो कॉल रिसीव किया और न ही कोई व्हाट्सएप पर जवाब दिया। रिपोर्टर के कॉल को कई बार आरटीओ के द्वारा काटा गया ।
जनता परेशान है, पोर्टल ठप है, लेकिन जिम्मेदार अधिकारीयों ने ‘मौन व्रत’ धारण कर लिया है। क्या लोकतंत्र में जनता को यह जानने का हक नहीं कि उनकी परेशानी कब खत्म होगी?
खेद है’ से पेट नहीं भरता, आखिर समाधान कब..?
एन आई सी की टीम का तर्क है कि हमे खेद हैं इंफ्रास्ट्रक्चर पुराना हो चुका है। बदलाव और अपडेट किया जा रहा हैं। ठीक है, बदलाव जरूरी है, लेकिन इस बदलाव की कीमत आम आदमी क्यों चुकाए? जो मजदूर अपनी गाड़ी का काम कराने के लिए दिहाड़ी छोड़कर आरटीओ ऑफिस आता है, उसे ‘सर्वर एरर’ और ‘क्लाउड माइग्रेशन’ जैसे भारी-भरकम शब्दों से क्या लेना-देना?
विभाग की इस अदूरदर्शिता ने साबित कर दिया है कि हमारा सिस्टम तकनीक में तो आगे बढ़ रहा है, पर योजना बनाने में आज भी आदिम युग में जी रहा है।
क्या चुप्पी का मौन व्रत धारण करने वाले अधिकारी देंगे जवाब..?
- क्या इतने बड़े पोर्टल के माइग्रेशन से पहले किसी वैकल्पिक ‘मैन्युअल’ या ‘इमरजेंसी’ व्यवस्था पर विचार क्यों नहीं किया गया?
- अगर माइग्रेशन के दौरान सर्वर ‘मालफंक्शन’ हुआ, तो क्या विभाग के पास कोई ‘डिजास्टर रिकवरी प्लान’ नहीं था?
- जनता के काम रुकने से हो रहे आर्थिक नुकसान की भरपाई कौन करेगा? क्या लेट फीस में राहत दी जाएगी?
- आरटीओ स्तर के अधिकारी का मीडिया के सवालों पर मौन रहना क्या यह नहीं दर्शाता कि उन्हें जनता की पीड़ा से कोई सरोकार नहीं है?
- क्या डिजिटल इंडिया का मतलब सिर्फ कागजों को कंप्यूटर में डालना है, या सेवाओं को निर्बाध बनाना भी है?
- सिस्टम को अब जागना होगा। केवल फाइलों से ‘डिजिटल-डिजिटल’ खेलने से काम नहीं चलेगा। जब तक धरातल पर पोर्टल बहाल नहीं होता, यह ‘महा-लापरवाही’ विभाग के माथे पर वेट एंड वॉच बनकर रहेगी।
देश
विदेश
प्रदेश
संपादकीय
वीडियो
आर्टिकल
व्यंजन
स्वास्थ्य
बॉलीवुड
G.K
खेल
बिजनेस
गैजेट्स
पर्यटन
राजनीति
मौसम
ऑटो-वर्ल्ड
करियर/शिक्षा
लाइफस्टाइल
धर्म/ज्योतिष
सरकारी योजना
फेक न्यूज एक्सपोज़
मनोरंजन
क्राइम
चुनाव
ट्रेंडिंग
Covid-19





Total views : 2152408


