जयपुर पुलिस की ‘अदृश्य’ रिकवरी वेन! जनता को ‘कानून’ का पाठ, खुद की ‘नंबर प्लेट’ गायब
साहब, इस क्रेन का चालान कौन काटेगा?" खुद बेनंबर, लेकिन दूसरों को सिखा रहे कानून का पाठ..!
जनमानस शेखावाटी सवंददाता : आबिद खान
जयपुर : जयपुर के खासा कोठी इलाके से एक ऐसी तस्वीर सामने आई है, जो ‘कानून के रखवालों’ की कथनी और करनी के बीच की गहराई की पोल खोल रही है। शहर भर में अवैध पार्किंग और यातायात नियमों को तोड़ने वालों पर कहर बनकर टूटने वाली ‘श्री कृष्णा क्रेन सर्विसेज’ (पुलिस रिकवरी वेन) खुद कानून को धता बता रही है।
अदृश्य नंबर प्लेट, दृश्य कार्रवाई..?
खासा कोठी पर तैनात इस रिकवरी वेन (टाटा 407) का फ्रंट बम्पर न केवल क्षतिग्रस्त है, बल्कि उस पर सबसे महत्वपूर्ण चीज—नंबर प्लेट—गायब है। जी हां, जिस वेन पर जनता के वाहनों को जब्त करने की जिम्मेदारी है, उसका खुद का कोई आधिकारिक वजूद (नंबर के रूप में) सड़क पर नजर नहीं आ रहा है। यह वेन एक निजी कार को क्रेन से उठाकर ले जा रही है, जिस पर नियमानुसार नंबर प्लेट (RJ 45 C…) साफ-साफ लगी है।
नियम जनता के लिए, पुलिस के लिए रियायत..?
आम आदमी अगर बिना नंबर प्लेट या क्षतिग्रस्त नंबर प्लेट के साथ वाहन चलाता पकड़ा जाए, तो पुलिस तुरंत भारी-भरकम चालान थमा देती है। लेकिन यहाँ, पुलिस के संरक्षण में चल रही क्रेन बेखौफ होकर बिना नंबर प्लेट के घूम रही है। क्या यातायात नियम सिर्फ जनता की जेब ढीली करने के लिए हैं?
क्या पुलिस की गाड़ियों और उनके द्वारा अनुबंधित क्रेन को कानून से ऊपर रहने का विशेषाधिकार प्राप्त है?
इस मामले में पुलिस अधिकारी चुप्पी साधे हुए हैं। लेकिन जनता पूछ रही है “साहब, इस क्रेन का चालान कौन काटेगा?” क्या कानून का पाठ सिर्फ दूसरों को पढ़ाने के लिए है, या खुद पर लागू करने की भी हिम्मत है?
कहते हैं, कानून की आंखें अंधी होती हैं, लेकिन जयपुर के खासा कोठी में कानून की आंखें शायद ‘सुविधाजनक’ रूप से अंधी हो गई हैं। यहाँ एक क्रेन’ को सक्रियता से आम जनता की गाड़ियों को उठाकर ले जाते देखा गया। इस क्रेन के जज्बे को सलाम, जो टूटे बम्पर और बिना नंबर प्लेट के भी ‘अवैध पार्किंग’ के खिलाफ जंग लड़ रही है।
यह बताने के लिए काफी है कि यह पीछे लटका वाहन वैध है। वहीं, जो क्रेन उसे ‘दंडित’ कर रही है, उसकी खुद की पहचान गुमनाम है। उसके आगे के बंपर पर कोई नंबर प्लेट नजर नहीं आ रही है। यह कुछ ऐसा है जैसे कोई ‘पहचान छिपाकर’ शहर में न्याय बांट रहा हो।
अब सवाल यह उठता है कि अगर यह क्रेन किसी दुर्घटना का शिकार हो जाए, या किसी वाहन को नुकसान पहुंचा दे, तो पीड़ित व्यक्ति किस नंबर के आधार पर शिकायत दर्ज कराएगा? क्या यह पुलिस का नया ‘मूनलाइटिंग’ अभियान है, जहाँ गाड़ियां तो उठाई जाएंगी, लेकिन उठाने वाली क्रेन का कोई रिकॉर्ड नहीं होगा?
शहर की स्मार्टनेस का दम भरने वाली जयपुर पुलिस को इस ‘सुपर-स्मार्ट’ क्रेन पर गर्व होना चाहिए, जो खुद कानून के दायरे से बाहर रहकर कानून व्यवस्था बनाए रखने का ढोंग कर रही है। आम जनता इस ‘बिना नंबर वाली’ क्रेन को देखकर बस यही गुनगुना रही है-“हम करें तो चोरी, तुम करो तो सीनाजोरी!”
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